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विधानसभा चुनाव: जीत के लिए सिद्धपीठ और साधु-संतों की शरण में BJP-कांग्रेस के नेता

कहा जाता है कि जब-जब देश के ऊपर विपत्तियां आती हैं तब-तब कोई न कोई न कोई गोपनीय रूप से मां बगलामुखी की साधना व यज्ञ-हवन करता ही है

Dinesh Gupta Updated On: Apr 27, 2018 10:20 AM IST

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विधानसभा चुनाव: जीत के लिए सिद्धपीठ और साधु-संतों की शरण में BJP-कांग्रेस के नेता

साल के अंत में मध्यप्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी विधानसभा के आम चुनाव होने हैं. मध्यप्रदेश और राजस्थान के उप चुनावों के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आने के बाद से ही राजनीतिक क्षेत्रों में यह अनुमान लगाए जा रहे हैं कि इन दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के लिए आम चुनाव चुनौती भरे हैं. छत्तीसगढ़ में भी रमन सिंह के लिए राह आसान नजर नहीं आ रही है. तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री अपनी-अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए गांव-गांव की खाक छानने के साथ-साथ शक्ति पीठों पर जाकर भी अपनी जीत की कामना कर रहे हैं.

पीतांबरा शक्ति पीठ पर है नेताओं का भरोसा

पीतांबरा शक्ति पीठ मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित है. दतिया, उत्तरप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है. यह शक्ति पीठ शत्रु बाधा को शांत करने के लिए सिद्ध स्थल माना जाता है. इस शक्ति पीठ रोज मंत्र जप की क्रिया चलती रहती है. शक्ति पीठ पर कुछ लोग खुद मंत्र जपकर शत्रु बाधा को शांत करने की कोशिश करते हैं. जबकि राजनेता पंडितों को संकल्प देकर अनुष्ठान कराते हैं. पंडित उसी अनुष्ठान का संकल्प लेते हैं, जिसमें किसी को क्षति पहुंचाने का भाव न हो.

कहा जाता है कि जब भी कोई भक्त यहां श्रद्धा से पीताबंरा माता से कुछ मांगता है तो वह उसे अवश्य प्राप्त होता है. मां पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी है और राजसत्ता प्राप्ति में मां की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस शक्ति पीठ के चमत्कारों की कई कहानियां हैं. इनमें एक भारत-चीन के युद्ध से जुड़ी हुई है. दरअसल भारत-चीन युद्ध के समय यहां फौजी अधिकारियों व तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर देश की रक्षा के लिए मां बगलामुखी की प्रेरणा से 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया था. जिसके परिणामस्वरूप 11वें दिन अंतिम आहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं. उस समय यज्ञ के लिए बनाई गई यज्ञशाला आज भी यहां स्थित है. यहां लगी पट्टिका पर इस घटना का उल्लेख भी है.

पीतांबरा पीठ का मुख्य द्वार.

पीतांबरा पीठ का मुख्य द्वार.

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कहा जाता है कि जब-जब देश के ऊपर विपत्तियां आती हैं तब-तब कोई न कोई न कोई गोपनीय रूप से मां बगलामुखी की साधना व यज्ञ-हवन करता ही है. कारगिल युद्ध के दौरान भी यहां अनुष्ठान होने की बात कही जाती है. मां पीतांबरा देवी दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं . राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मुकदमे आदि के सिलसिले में मां पीताम्बरा का अनुष्ठान सफलता दिलाने वाला होता है. पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में ही 'मां धूमावती देवी' का मन्दिर है, जो भारत में भगवती धूमावती का एक मात्र मन्दिर है.

पीताम्बरा पीठ की स्थापना एक सिद्ध संत स्वामी जी महाराज ने 1935 में की थी. वर्तमान में पीतांबरा पीठ ट्रस्ट की अध्यक्ष राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया हैं. इससे पहले उनकी मां विजयाराजे सिंधिया ट्रस्ट की अध्यक्ष थीं. वसुंधरा राजे सिंधिया के मामा ध्यानेन्द्र सिंह भी ट्रस्ट में सदस्य हैं. वे मध्यप्रदेश की नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री माया सिंह के पति हैं. ध्यानेन्द्र सिंह खुद भी नब्बे के दशक में मंत्री रहे हैं. वसुंधरा राजे सिंधिया नियमित रूप से मां पीताबंरा के दर्शन के लिए आती रहतीं हैं. हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी दतिया पीतांबरा के दर्शन के लिए आए थे. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फण्नवीस और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मंदिर में हाजिरी लगाई है. मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह भी यहां अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं.

होड़ा माता मंदिर भी पहुंची वसुंधरा राजे सिंधिया

पिछले दिनों राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया अचानक राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में स्थित होड़ा माता के दर्शन करने के लिए पहुंची थीं. साथ में उनके पुत्र झालावाड़ के सांसद दुष्यंत सिंह भी थे. होड़ा माता को सिंधिया परिवार की कुल देवी कहा जाता है. मध्यप्रदेश की खेल एवं युवक कल्याण मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया यहां नियमित तौर पर दर्शन करने के लिए जातीं हैं. गांव के लोगों ने कभी माधव राव सिंधिया अथवा ज्योतिरादित्य सिंधिया को यहां आते नहीं देखा है. वसुंधरा राजे सिंधिया ने अपनी हाल की यात्रा में मंदिर का विकास न होने को लेकर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के समक्ष नाराजगी भी जाहिर की. होड़ा माता का मंदिर राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है. होड़ा माता का यह मंदिर सात सौ साल पुराना है. कहा जाता है कि भील राजाओं ने इसकी स्थापना की थी.

धर्मगुरूओं और साधु-संतों की शरण में

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पांच साधु-संतों को राज्य मंत्री का दर्जा भावी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही दिया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक एजेंडे में साधु-संतों का विशेष स्थान है. कांग्रेस के नेताओं ने भी अब यह रास्ता पकड़ लिया है. मुरारी बापू पिछले दिनों छिंदवाड़ा गए थे. कमलनाथ ने उनसे मुलाकात की. जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुलाकात की और उनसे आशीर्वाद लिया. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा के जरिए अपनी हिंदू विरोधी छवि को सुधारने की कोशिश की है.

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भिंड जिले के रावतपुरा में इन दिनों रावतपुरा सरकार द्वारा सामाजिक कुंभ किया जा रहा है. इस कुंभ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. छत्तीसगढ़ में रावतपुरा सरकार के खासे समर्थक हैं. रावतपुरा सरकार के अनुयायी कई राज्यों में हैं.

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