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कोयला घोटाला: मधु कोड़ा को 3 साल की सजा, 25 लाख का जुर्माना

विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराए गए पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु और एक अन्य को भी 3-3 साल की सजा सुनाई है

Updated On: Dec 16, 2017 03:34 PM IST

FP Staff

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कोयला घोटाला: मधु कोड़ा को 3 साल की सजा, 25 लाख का जुर्माना

कोयला घोटाले में दोषी करार दिए गए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा को तीन साल की सजा सुनाई गई है. दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को सजा का ऐलान किया. अदालत ने मधु कोड़ा पर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

कोड़ा के अलावा मामले में दोषी करार दिए गए तीनों लोगों को भी कोर्ट ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है. विशेष अदालत ने विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) कंपनी पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. कोर्ट द्वारा दोषी एच सी गुप्ता पर भी एक लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया है.

हालांकि, अदालत ने सजा के ऐलान के कुछ समय बाद मधु कोड़ा और तीन अन्य दोषियों को हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 2 महीने के लिए अंतरिम जमानत दे दी.

अदालत ने बीते 13 दिसंबर को इस मामले में मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु और एक अन्य को आपराधिक षडयंत्र और धारा 120 बी के तहत दोषी माना है.

यह मामला झारखंड में राजहरा नॉर्थ कोल ब्लॉक को कोलकाता की विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है.

कौन हैं मधु कोड़ा?

46 साल के मधु कोड़ा सितंबर 2006 से अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. वो इस आदिवासी राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री थे. मुख्यमंत्री बनने के समय वो राज्य की विधानसभा में निर्दलीय विधायक थे.

राजनीति में ऑल झारखंड स्टूडेंड यूनियन (आजसू) के एक कार्यकर्ता के तौर पर शुरूआत करने वाले मधु कोड़ा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़े रहे हैं.

बीजेपी की बाबूलाल मरांडी की सरकार में कोड़ा पंचायती राज मंत्री बने थे. वर्ष 2005 के चुनाव में बीजेपी ने मधु कोड़ा को टिकट नहीं दिया था. इसके बाद कोड़ा निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते थे. विधानसभा में किसी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाले अर्जुन मुंडा सरकार को अपना समर्थन दिया था.

सितंबर 2006 में मधु कोड़ा और 3 दूसरे निर्दलीय विधायकों ने अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था. जिसके बाद अल्पमत में आई बीजेपी सरकार गिर गई थी. बाद में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर राज्य में अपनी सरकार बनाई थी.

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