S M L

झारखंड की ये सड़क न होती तो शायद मधु कोड़ा मुख्यमंत्री न होते

झारखंड में सड़क निर्माण विवाद मधु कोड़ा के लिए सीएम पद तक पहुंचने की सीढ़ी साबित हुआ

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Dec 13, 2017 10:41 PM IST

0
झारखंड की ये सड़क न होती तो शायद मधु कोड़ा मुख्यमंत्री न होते

सीबीआई की विशेष अदालत ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा समेत चार लोगों को कोयला घोटाले में दोषी करार दिया है. अदालत ने इसी मामले में मधु कोड़ा समेत चार लोगों को अपने पद का दुरुपयोग और आपराधिक साजिश रचने का दोषी माना है. सभी अभियुक्तों को 14 दिसंबर यानी गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी.

इस घोटाले में झारखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव ए के बसु, माइंस के उस समय के तत्कालीन निदेशक विपिन बिहारी सिंह, लोक सेवक बी के भट्टाचार्य और केंद्रीय कोयला सचिव एच सी गुप्ता भी दोषी करार दिए गए हैं.

एक निर्दलीय विधायक से झारखंड के मुख्यमंत्री बनने के सफर में मधु कोड़ा पर कई आरोप लगे. कोयला घोटला का आरोप भी उनमें से एक है. गौरतलब है कि मधु कोड़ा साल 2007 में कोयला आवंटन को लेकर विवादों में आए थे. मधु कोड़ा और दोषी करार दिए अन्य लोगों पर कोलकाता की एक कंपनी विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का आरोप है.

मधु कोड़ा ने कोयला खदान आवंटित करने के लिए सरकार और इस्पात मंत्रालय को अनुशंसा किए बगैर ही कंपनी को खदान का आवंटन कर दिया था. मधु कोड़ा उस समय राज्य के मुख्यमंत्री थे और कोयला मंत्रालय का प्रभार भी उन्हीं के पास था.

ये भी पढ़ें: राहुल गांधी के इंटरव्यू की जांच करेगा चुनाव आयोग

सीबीआई और ईडी ने कोयला खदान के इस आवंटन में अरबों रुपए की रिश्वतखोरी और हेराफेरी को उजागर किया था. मधु कोड़ समेत चार लोगों पर आरोप है कि कोयला अवंटित करने वाली स्क्रीनिंग कमेटी ने उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अंधेरे में रख कर यह फैसला लिया. उस समय कोयला मंत्री का प्रभार भी मनमोहन सिंह के पास ही था, जिन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई. सीबीआई ने भी बाद में इस मामले को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूछताछ की थी, जो कि काफी विवादों में रही थी.

manmohan singh

मनमोहन सिंह तत्कालीन पीएम थे जब मधु कोड़ा पर आरोप लगे.

गौरतलब है कि 9 अक्टूबर 2009 को मधु कोड़ा और अन्य के खिलाफ ईडी ने एफआईआर दर्ज की थी. इसके कुछ दिन बाद ही 6 नवंबर को मधु कोड़ा और अन्य अभियुक्तों के कई ठिकानों पर सीबीआई और ईडी का छापा पड़ा था.

सीबीआई ने 30 नवंबर 2009 को मधु कोड़ा को गिरफ्तार कर लिया था. काफी दिनों तक दिल्ली की तिहाड़ और रांची की बिरसा मुंडा जेल में रहने के बाद कोड़ा को 18 फरवरी 2015 को जमानत मिली थी. मधु कोड़ा फिलहाल जमानत पर थे, लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद एक बार फिर से उनको गिरफ्तार कर लिया गया है.

मधु कोड़ा 14 सितंबर 2006 को झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे. मधु कोड़ा के नाम सबसे ज्यादा दिन तक निर्दलीय विधायक रहते मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का रिकॉर्ड है. मधु कोड़ा 23 अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रहे थे. जेएमएम ने मधु कोड़ा की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिसकी वजह से कोड़ा की सरकार गिर गई थी.

मधु कोड़ा का मुख्यमंत्री बनना भी कम दिलचस्प नहीं है. कहा यह जाता है कि एक रोड के चक्कर में अर्जुन मुंडा की सरकार गिरी थी. मधु कोड़ा झारखंड के चाईबासा जिले के रहने वाले हैं. बीजेपी के उस समय के धाकड़ नेता और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने अर्जुन मुंडा बगल के जिले जमशेदपुर से आते हैं. दोनों एक-दूसरे से सटा हुआ जिला है.

जानकार मानते हैं कि साल 2006 के विधानसभा चुनाव में मधु कोड़ा बीजेपी से टिकट चाह रहे थे पर अर्जुन मुंडा की वजह से उनको टिकट नहीं मिल पाया. बाद में मधु कोड़ा निर्दलीय जीत कर आ गए. क्योंकि राज्य में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था इसलिए राज्य में अर्जुन मुंडा की नेतृत्व वाली बीजेपी की सरकार बन गई और मधु कोड़ा को कैबिनेट मंत्री का पद दिया गया.

झारखंड के कोल्हान एरिया में माइंस का बड़ा कारोबार होता है. इसी एरिया में एक सड़क बन रही थी. यह सड़क जगन्नाथपुर विधानसभा को जोड़ती है, जहां से मधु कोड़ा चुन कर आए थे. कहा जाता है कि सड़क का निर्माण घटिया तरीके से किया जा रहा था. जिसकी शिकायत मधु कोड़ा राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से कई बार कर चुके थे. पर, उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी.

जिस सड़क का निर्माण हो रहा था उस सड़क का नाम था हाट गावरिया रोड. कहा जाता है कि इस सड़क को बनाने वाली कंपनी से उस समय के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के अच्छे संबंध थे. इस हाट गावरिया रोड को लेकर राज्य में सियासत शुरू हो गई. पश्चिमी सिंहभूम यानी चाईबासा इलाके के जितने भी विधायक थे इस सड़क के निर्माण कार्य में धांधली को लेकर गोलबंद होना शुरू हो गए. सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों और विधायकों ने अपना एक गुट बना लिया. एक गुट बना कर इन लोगों ने अर्जुन मुंडा की सरकार को गिरा दिया.

arjun munda

इस गुट को बनाने में कमलेश सिंह, भानु प्रताप सिंह और आजसू के सुदेश महतो की अहम भूमिका थी. आखिरकार हाट गंवरिया रोड के कारण सरकार गिर गई.

ये भी पढ़ें: आधार से खातों को लिंक करने की नई डेडलाइन 31 मार्च 2018 हुई

राज्य में नई सरकार को लेकर सियासत शुरू हो गई. कांग्रेस, जेएमएम और आरजेडी को लगा कि क्योंकि मधु कोड़ा एक निर्दलीय विधायक हैं इसलिए औरों की तुलना में कोड़ा को संभालना काफी आसान होगा. इसलिए झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और आरजेडी ने मिलकर मधु कोड़ा को मुख्यमंत्री बना दिया.

झारखंड की राजनीति को करीब से समझने वाले कहते हैं कि कोड़ा के मुख्यमंत्री काल में लालू प्रसाद यादव के साथ काफी करीबी संबंध थे. कोड़ा का दो सालों तक राज्य में मुख्यमंत्री पद पर बने रहना कहीं न कहीं लालू प्रसाद यादव के आशीर्वाद के बिना मुमकिन नहीं था. लालू प्रसाद यादव उस समय केंद्र में रेल मंत्री थे और सोनिया गांधी के साथ उनकी निकटता जगजाहिर थी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
गोल्डन गर्ल मनिका बत्रा और उनके कोच संदीप से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi