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योगी को मालूम होता कि मेट्रो चलते ही रुक जाएगी तो अखिलेश को श्रेय जरूर देते

लखनऊ वालों को मेट्रो की ढेरों बधाई. लेकिन लखनऊ की नई नवेली मेट्रो सेवा को देख कर लगता नहीं कि लोग सरकार के इस 'गिफ्ट' से खुश हैं

Updated On: Sep 06, 2017 04:49 PM IST

Subhesh Sharma

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योगी को मालूम होता कि मेट्रो चलते ही रुक जाएगी तो अखिलेश को श्रेय जरूर देते

लखनऊ वालों को मेट्रो की ढेरों बधाई. लेकिन लखनऊ की नई नवेली मेट्रो सेवा को देख कर लगता नहीं कि लोग सरकार के इस 'गिफ्ट' से खुश हैं. लखनऊ मेट्रो दौड़ में कितना आगे जाएगी, इसकी पोल उसकी पहले दिन की रेस में ही खुल गई. चारबाग से ट्रांसपोर्टनगर के लिए जा रही लखनऊ मेट्रो दुर्गापुरी और मैवाया स्टेशन के बीच तकनीकी खराबी की वजह से 25 मिनट से ज्यादा रुकी रही.

फिर थोड़ा और आगे बढ़ी तो आलमबाग स्टेशन पर इमरजेंसी ब्रेक लगने के कारण रुक गई. यहां भी ट्रेन करीब 45 मिनट रुकी रही. ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे. एक घंटे से भी ज्यादा समय से फंसे परेशान और बेहाल यात्रियों को इमरजेंसी दरवाजे से बाहर निकाला गया. खराब हुई मेट्रो को दूसरी मेट्रो से खिंचवाकर वर्कशॉप के लिए रवाना किया गया.

Lucknow Metro

सोचने वाली बात ये है कि पहले दिन जब ये हाल है. तो आगे क्या होगा? योगी सरकार ने सीना ठोक कर मेट्रो बनवाने का श्रेय लिया. पांच सितंबर को मेट्रो के लॉन्च पर मंच से कई बड़ी-बड़ी बातें की. राज्य के अन्य शहरों में भी जल्द से जल्द मेट्रो सेवा शुरू करने का वादा किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद कहा. कुल मिलाकर क्रेडिट लेने का एक भी मौका नहीं छोड़ा.

मेट्रो शुरू होने की खुशी गोरखपुर और फर्रुखाबाद में हुई बच्चों की मौतों से भी बड़ी नजर आई. लेकिन यहां भी सीएम की खुशी को लगता है किसी की नजर लग गई और मेट्रो रेस शुरू होने से पहले ही थम गई. मालूम होता कि मेट्रो पहले ही दिन रुक जाएगी, तो यूपी सरकार अखिलेश यादव को इसका श्रेय देना शायद न भूलती. शायद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सरकार से क्रेडिट देने की मांग न करनी पड़ती.

पूर्व सीएम अखिलेश यादव के ट्वीट बताते हैं कि मेट्रो शुरू होने पर उन्हें जरा सा भी क्रेडिट न मिलने का कितना दुख है. अखिलेश ने मेट्रो के लॉन्च से पहले कहा था कि इंजन तो पहले ही शुरू हो चुका था. बस डिब्बे लगाने बाकी थे. अपने पार्टी अध्यक्ष की उदासी देख सपा कार्यकर्ताओं ने मेट्रो बनवाने का श्रेय न दिए जाने पर प्रदर्शन भी किया. लेकिन क्रेडिट फिर भी नहीं मिला.

Akhilesh Yadav

वर्तमान और पूर्व दोनों ही सरकारों को इस समय यूपी में मासूम बच्चों की मौत, बढ़ते ट्रेन हादसों, बढ़ते क्राइम और बिगड़ती लॉ एंड ऑर्डर से ज्यादा क्रेडिट की पड़ी है. पूर्व सीएम अखिलेश और मौजूदा सीएम योगी दोनों ही मेट्रो के खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार है.

मेट्रो के लॉन्च के लिए एक अजीब सी हड़बड़ी देखी गई है. अखिलेश यादव को जहां यूपी विधानसभा चुनाव में अपनी इमेज को चमकाने के लिए इसकी जरूरत मालूम होती दिखती थी. वहीं योगी आदित्यनाथ लगता है प्रदेश की जनता को मेट्रो का गिफ्ट देकर गोरखपुर और ट्रेन हादसों का गम कम करना चाहते हैं. लोगों की जान की परवाह किसी को ही नहीं है.

lucknow metro

लोग मेट्रो में घंटे भर से ज्यादा फंसे रहे. कुछ भी हो सकता है. कोई पैनिक कर जाता तो कौन संभालता? कई बुजुर्गों को इमरजेंसी दरवाजे से बाहर आने के बाद उतरने में दिक्कतें हुईं. कहने का मतलब ये है कि क्या विकास जान से बढ़कर है? इतनी हड़बड़ी क्यों है. मेट्रो में कमियां थीं, तो भी उसे लोगों के लिए क्यों चला दिया गया. मेट्रो की लॉन्चिंग फेल होने के बाद एक बार फिर योगी सरकार सवालों के घेरे में है. साथ-साथ पूर्व की अखिलेश सरकार पर भी सवाल उठाए जाने लाजिमी हैं. आखिर अब वो मेट्रो में सामने आई खामियों की जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते.

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