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लगातार 7वें दिन संसद स्थगित, कांग्रेस ने कहा चर्चा से भाग रही है सरकार

खड़गे ने कहा कि सरकार एक तरफ तो सदन में चर्चा से भाग रही है और वहीं वह बाहर आकर विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाती है

Updated On: Mar 13, 2018 04:28 PM IST

Bhasha

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लगातार 7वें दिन संसद स्थगित, कांग्रेस ने कहा चर्चा से भाग रही है सरकार

कांग्रेस ने मंगलवार को सत्तारूढ़ बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसके सहयोगी दल ही संसद में गतिरोध उत्पन्न कर रहे हैं और सरकार की ओर से उन्हें मनाने और विपक्षी नेताओं के साथ बातचीत करने की कोई पहल नहीं की जा रही है.

पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार संसद में चर्चा से भाग रही है और विपक्ष को सदन में उसकी बात कहने का मौका नहीं दिया जा रहा है.

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संवाददाताओं से कहा कि जब से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हुआ है, कांग्रेस पीएनबी घोटाला और उसके आरोपी नीरव मोदी से जुड़े मुद्दे को कार्य स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाने का प्रयास कर रही है. इसके लिए पार्टी की ओर से बराबर नोटिस भी दिया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि सरकार इसे नकार रही है और वह कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत चर्चा नहीं करना चाहती है. इससे यह जाहिर हो रहा है कि सरकार इस मुद्दे पर जनता का ध्यान बंटाने के लिए अलग-अलग विषयों को उठा है.

उन्होंने कहा कि अन्य दलों द्वारा सदन में जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जैसे टीडीपी द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने का मुद्दा या अन्नाद्रमुक द्वारा कावेरी मुद्दा उठाया जाना, उनकी आड़ लेकर सरकार कह रही है कि सदन में कोई एक मुद्दा नहीं उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘मैं खुले तौर पर यह कहना चाहता हूं कि यह सब सरकार की शह पर किया जा रहा है.’

खड़गे ने कहा कि कांग्रेस रेलवे, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कृषि और युवा मामलों सहित छह मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा चाहती है. फिर अचानक हमें यह अचानक जानकारी मिलती है कि आज शाम पांच बजे इन छह मंत्रालयों की अनुदान मांगों का गिलोटिन होगा.

विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को दिया ज्ञापन

उन्होंने कहा कि जब वित्त विधयेक या अन्य महत्वपूर्ण विधायी कामकाज ध्वनिमत से ही पारित करना है तो फिर संसद की क्या जरूरत है. उन्होंने सवाल किया कि सरकार इन महत्वपूर्ण विषयों पर संसद में चर्चा से भाग क्यों रही है?

उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से मिलकर उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा है. हमने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि सदन में विपक्ष को उसकी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है.

खड़गे ने कहा कि सरकार एक तरफ तो सदन में चर्चा से भाग रही है और वहीं वह बाहर आकर विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाती है. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए कलंक की बात है. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष चर्चा से भाग रहा होता तो वह कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा का नोटिस क्यों देता?

उन्होंने कहा कि छह मंत्रालयों की अनुदान की मांगों को गिलोटिन करवाने का साफ मतलब है कि सरकार चर्चा से भाग रही है और वह लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती.

खड़गे ने कहा कि पूर्व में जब विपक्ष के नेता सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे तो उन पर कार्रवाई की जाती थी, उन्हें निलंबित किया जाता था. किंतु आज सत्तारूढ़ दल के घटक दल के सदस्य ही विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, आसन के समक्ष तख्तियां लेकर खड़े हो जाते हैं. किंतु दो मिनट के भीतर सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया जाता है. उन्होंने कहा, यह क्या तरीका है?

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब लोकतंत्र को खत्म करने का तरीका है. प्रधानमंत्री कोई रूचि नहीं ले रहे हैं. सात दिन गतिरोध के हो गए हैं. उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री को कोई निर्देश नहीं दिया है. विपक्ष के नेताओं के साथ कोई बैठक भी नहीं की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार अपने सहयोगी दलों को क्यों नहीं मना रही है? उनसे बातचीत क्यों नहीं की जा रही है?

वित्त और विनियोग विधेयक नहीं हो सका पेश

लोकसभा में मंगलवार को लगातार सातवें दिन भी कामकाज नहीं हो सका और पिछले छह दिन से विभिन्न मुद्दों पर चल रहा हंगामा आज भी जारी रहने के कारण बैठक को एक बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया. सदस्यों के शोर शराबे के कारण सदन में वित्त एवं विनियोग विधेयक 2018 चर्चा के लिए पेश नहीं हो सका.

लोकसभा की कार्यवाही की कार्यसूची में मंगलवार शाम पांच बजे वर्ष 2018-19 के लिए केंद्रीय बजट के संबंध में बकाया अनुदान की मांगों को सभा में मतदान के लिए रखा जाना था. लेकिन हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका .

बजट सत्र के दूसरे चरण में पिछले छह दिनों से विभिन्न दलों के सदस्य अलग अलग मुद्दों पर हंगामा कर रहे हैं जिसके कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है. मंगलवार सुबह भी भारी हंगामे के कारण एक बार के स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे फिर शुरू हुई तो टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, टीआरएस और अन्नाद्रमुक के सदस्य अपने अपने मुद्दों पर नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गए.

टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के सदस्य आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने और राज्य से संबंधित कुछ मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे थे. उधर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सांसद आसन के पास आकर पीएनबी धोखाधड़ी मामले पर नारेबाजी कर रहे थे.

अन्नाद्रमुक के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड बनाने की मांग कर रहे थे तो तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य अपने राज्य में आरक्षण कोटा बढ़ाने की मांग उठा रहे थे. इन दोनों दलों के सभी सांसद भी आसन के समीप नारेबाजी कर रहे थे. उधर सीपीएम के सदस्यों को अपने स्थानों पर ही कुछ तस्वीरें लहराते हुए देखा गया.

अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भारी हंगामे के बीच आवश्यक कागजात पेश कराए. हंगामा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी.

इन दलों ने किया हंगामा

इससे पहले, सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर अध्यक्ष ने जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ करने को कहा, वैसे ही टीडीपी, कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस, अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अपने अपने मुद्दों पर नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गए थे और हंगामा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने कुछ ही मिनट बाद बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी थी.

आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा, पीएनबी धोखाधड़ी मामले समेत कुछ अन्य मुद्दों पर हंगामे के कारण मंगलवार को लोकसभा में विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक 2018 और विनियोग लेखानुदान विधेयक 2018 चर्चा के लिए नहीं पेश किया जा सका.

लोकसभा की कार्यसूची में विधायी कार्य के तहत इन्हें पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया था .

लोकसभा की पुनरीक्षित कार्य सूची में कहा गया है कि वित्त मंत्री अरूण जेटली वित्तीय वर्ष 2018-19 की सेवाओं के लिए भारत की संचित निधि से कतिपय राशियों के संदाय और विनियोग को प्राधिकृत करने संबंधी विनियोग विधेयक 2018 को विचार करने के लिए पेश करेंगे .

इसके अलावा अरूण जेटली प्रस्ताव करेंगे कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय प्रस्थापनाओं को प्रभावी करने वाला वित्त विधेयक 2018 पर विचार किया जाए .

इसके साथ ही कार्यसूची में कहा गया है कि अरुण जेटली प्रस्ताव करेंगे कि वित्तीय वर्ष 2017-18 की सेवाओं के लिए भारत की संचित निधि में से कतिपय राशियों के संदाय और विनियोग को प्राधिकृत करने वाले विनियोग लेखानुदान विधेयक 2018 पर विचार किया जाए.

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