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केजरीवाल जी, आपके गले की फांस न बन जाए विज्ञापन विवाद!

दिल्ली सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन का उल्लंघन कर प्रचार में सरकारी पैसे खर्च करने का आरोप है

Sanjay Singh Updated On: Apr 01, 2017 09:44 AM IST

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केजरीवाल जी, आपके गले की फांस न बन जाए विज्ञापन विवाद!

दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वो सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपए की वसूली करें. एलजी का कहना है कि केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर प्रचार में पैसे खर्च किए.

एलजी का ये आदेश मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है.

यूं तो एलजी ने ये निर्देश दिल्ली के मुख्य सचिव को जारी किया है. पर असल में ये मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए है. अब दिल्ली सरकार को ये रकम वसूलनी है, तो केजरीवाल को मुख्यमंत्री के तौर पर इस आदेश का पालन करना होगा.

आम आदमी पार्टी अगर इस आदेश को मानती है तो केजरीवाल को अपनी पार्टी के खजाने से ये 97 करोड़ रुपए अपनी सरकार को चुकाने होंगे.

ये रकम वसूलने के लिए केजरीवाल सरकार के पास सिर्फ तीस दिन का वक्त है. ये पैसे जमा करने के लिए पार्टी प्रमुख के तौर पर भी केजरीवाल के पास सिर्फ तीस दिन हैं. केजरीवाल को 97 करोड़ रुपए का इंतजाम तो करना ही होगा, सियासी तौर पर भी उन्हें शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा.

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार को दो साल पूरे हो चुके हैं (फोटो: फेसबुक से साभार)

मौजूदा हालात कुछ इस तरह है- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल से लगभग 100 करोड़ रुपयों की वसूली करनी होगी. केजरीवाल ऐसा करेंगे तो वो ये मानेंगे कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने धांधली की और जनता के पैसे का दुरुपयोग किया.

वो पैसे जो जनता के हित में खर्च होने चाहिए थे लेकिन केजरीवाल ने उसे अपनी पार्टी के लिए इस्तेमाल किया. अरविंद केजरीवाल को इस बात से तगड़ा सियासी झटका लगना तय है.

आम आदमी पार्टी, जो साफ-सुथरी राजनीति का वादा करके आई थी अब वो ऐसे अनैतिक हथकंडे आजमा रही है. ऐसे में अलग तरह की राजनीति का उसका दावा खोखला साबित हो गया है.

अच्छा मसाला मिल जाएगा

केजरीवाल ये रकम वसूलते हैं तो कांग्रेस और बीजेपी को उन पर हमला करने का अच्छा मसाला मिल जाएगा. अगर वो रकम की वसूली नहीं करते हैं, तो केजरीवाल पर अदालत के साथ-साथ एलजी के आदेश की अवहेलना का आरोप लगेगा.

इससे उनकी सरकार पर संविधान के दायरे से बाहर जाकर काम करने का भी आरोप लगेगा.

एलजी ने जिस 97 करोड़ रुपए की वसूली का फरमान सुनाया है, उसमें से 42 करोड़ रुपए विज्ञापन एजेंसियों को दिए जा चुके हैं, जबकि शेष 55 करोड़ रुपए दिए जाने हैं.

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सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के एलजी के बीच कटु संबंध अक्सर चर्चा का विषय रहे हैं

एलजी ने 97 करोड़ की वसूली का फरमान, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी कमेटी के आदेश की बिनाह पर सुनाया है. इस कमेटी ने सरकारी विज्ञापनों को लेकर निर्देश जारी किए थे. कमेटी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया था.

इस कमेटी ने पाया कि दिल्ली सरकार ने राज्य के बाहर के अखबारों में जो विज्ञापन दिए, वो आम आदमी पार्टी के प्रचार के लिए दिए गए थे, न कि दिल्ली सरकार और जनता के फायदे के लिए.

इसलिए आम आदमी पार्टी को ये रकम सरकार को देनी होगी. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कमेटी कांग्रेस नेता अजय माकन की अर्जी पर जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची थी. अजय माकन ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दी थी.

अदालत के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कमेटी ने छह हफ्तों की जांच के बाद ये पाया कि आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली सरकार के खजाने का दुरुपयोग किया.

नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई

निगरानी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, 'इस कमेटी ने जांच के बाद पाया कि इसके निर्देशों का उल्लंघन हुआ है. कमेटी का निर्देश है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाए.'

'माननीय सुप्रीम कोर्ट का सरकारी विज्ञापनों की गाइडलाइन तय करने का यही मकसद था कि सरकारी पैसे का दुरुपयोग न हो. जनता के पैसे से नेताओं की इमेज न चमकाई जाए. फिर भी इस मामले में ऐसा ही हुआ. ऐसे में जिस राजनैतिक दल ने ऐसा किया है, जिस दल को इसका फायदा हुआ है, उससे खर्च की गई रकम वसूली जानी चाहिए'.

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सुप्रीम कोर्ट (तस्वीर-फर्स्टपोस्ट)

कमेटी ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि:

1. राज्य के बाहर तमाम मौकों पर दिए गए विज्ञापनों (निविदाओं और भर्तियों के विज्ञापनों को छोड़कर)

2. ऐसे विज्ञापन जिनमें आम आदमी पार्टी का जिक्र हो

3. अन्य राज्यों में हुई घटनाओं पर मुख्यमंत्री की राय बताने वाले विज्ञापनों

और

4. विपक्ष को निशाना बनाने वाले विज्ञापनों पर खर्च का हिसाब लगाया जाए. फिर इस रकम को आम आदमी पार्टी से वसूला जाए.

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कमेटी को निर्देश दिया था कि वो अपनी एक रिपोर्ट हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को दें. कमेटी ने निर्देश दिया कि, 'सचिव इस आदेश की कॉपी दिल्ली के उप-राज्यपाल और मुख्य सचिव को मुहैया कराएं, ताकि जरूरी कदम उठाए जा सकें'.

इस साल मार्च में तैयार अपनी रिपोर्ट में सीएजी ने भी केजरीवाल सरकार की खिंचाई की थी. सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया था कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली के बाहर विज्ञापन देकर खजाने को 29 करोड़ रुपए का चूना लगाया. जबकि ये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिल्कुल खिलाफ था.

गाइडलाइन के हिसाब से गैर-जरूरी

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि, 'हमने दस्तावेजों की पड़ताल में पाया कि 24.29 करोड़ रुपए ऐसे विज्ञापनों पर खर्च किए गए जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के हिसाब से गैर-जरूरी थे. एक प्रचार अभियान में खर्च हुए 33.40 करोड़ रुपयों में से 85 फीसदी रकम दिल्ली से बाहर विज्ञापन देने पर खर्च की गई. जबकि ये दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी'.

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आम आदमी पार्टी से पैसे वसूलने का एलजी का आदेश एमसीडी चुनावों से ठीक पहले आया है. इससे नए उप-राज्यपाल अनिल बैजल और केजरीवाल सरकार के बीच तनातनी का नया दौर शुरू हो सकता है. लेकिन इस बार जनता की राय केजरीवाल और उनकी सरकार के हक में नहीं है.

जितने बड़े पैमाने पर केजरीवाल सरकार के खिलाफ सबूत हैं और जिस तरह अदालतें उन पर टिप्पणी कर रही हैं, उससे जनता इस बार शायद आम आदमी पार्टी के साथ न खड़ी हो.

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