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विधान परिषद चुनाव: एसपी के पास बीएसपी को ‘रिटर्न गिफ्ट’ देने का मौका

प्रदेश विधानमण्डल के उच्च सदन की 13 सीटों पर आगामी 26 अप्रैल को चुनाव होंगे, परिणाम भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे

Bhasha Updated On: Apr 08, 2018 07:35 PM IST

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विधान परिषद चुनाव: एसपी के पास बीएसपी को ‘रिटर्न गिफ्ट’ देने का मौका

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगामी चुनाव विपक्षी एकता की ताकत को जानने के लिहाज से अहम हैं. हाल के राज्यसभा चुनाव में मिली मायूसी के बाद इस चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि एसपी बीएसपी को गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में जीत का ‘रिटर्न गिफ्ट‘ दे पाएगी या नहीं.

प्रदेश विधानमण्डल के उच्च सदन की 13 सीटों पर आगामी 26 अप्रैल को चुनाव होंगे. परिणाम भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे. एक प्रत्याशी को जिताने के लिए प्रथम वरीयता के 29 मतों की जरूरत होगी.

प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर पिछले महीने हुए चुनाव में नौ सीटें जीतने वाली बीजेपी प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में 324 विधायकों के दम पर कम से कम 11 सीटें आसानी से जीत सकती है.

एक प्रत्याशी को एमएलसी बनाने के बाद एसपी के पास बचेंगे 16 वोट

एसपी के पास 47 विधायक हैं लेकिन उसके राष्ट्रीय महासचिव रहे नरेश अग्रवाल के बीजेपी में चले जाने के बाद उनके विधायक पुत्र नितिन अग्रवाल ने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी को वोट दिया था. वहीं विधायक हरिओम यादव जेल में हैं. वह राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सके थे. ऐसे में एसपी के पास 45 वोट ही हैं. वह अपने दम पर एक प्रत्याशी को विधान परिषद पहुंचा सकती है. इसके बावजूद उसके पास 16 वोट बच जाएंगे.

बीएसपी को अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए लेना होगा एसपी-कांग्रेस से मदद

बीएसपी के पास 19 विधायक हैं, मगर उसके विधायक मुख्तार अंसारी राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सके थे, लिहाजा इस बार भी उनके वोट डालने की संभावना बहुत कम है. वहीं, बीएसपी विधायक अनिल सिंह ने बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी. उस लिहाज से देखें तो बीएसपी अपने 17 विधायकों पर ही भरोसा करेगी. हर तरह से बीएसपी को अपना उम्मीदवार जिताने के लिए एसपी का साथ लेना होगा. बीएसपी का काम कांग्रेस के सात विधायकों की मदद मात्र से भी नहीं चलेगा.

हालांकि विधान परिषद चुनाव में राज्यसभा चुनाव की तरह जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की संभावना कम ही है. बीजेपी के पास अपने 11 प्रत्याशियों को जिताने के बाद केवल पांच वोट शेष रह जाएंगे. माना जा रहा है कि सभी सीटों पर निर्विरोध चुनाव हो जाएगा.

फिलहाल विधान परिषद में एसपी के 61 और बीजेपी के 13 सदस्य

प्रदेश की 100 सदस्यीय विधान परिषद में इस वक्त बीजेपी के मात्र 13 सदस्य हैं. वहीं, एसपी के 61, बीएसपी के नौ, कांग्रेस के दो, राष्ट्रीय लोकदल का एक तथा अन्य 12 सदस्य हैं. दो सीटें खाली हैं.

बीजेपी के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि उनकी पार्टी विधान परिषद की 13 में से 11 सीटें जीतने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है. वहीं, सपा प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने कहा कि एसपी और बीएसपी गठबंधन आसानी से दो सीटें जीतेगा.

कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह ने कहा कि विधानसभा में अपने संख्याबल के आधार पर उनकी पार्टी अपना एक भी प्रत्याशी जिताने की स्थिति में नहीं है. हालांकि वह समान विचारों वाली पार्टियों का समर्थन कर सकती है. बहरहाल, उन्हें उम्मीद है कि अगर कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला करती है तो उसे बीएसपी का साथ मिलेगा, क्योंकि उसने राज्यसभा चुनाव में इस पार्टी का पूरा सहयोग किया था.

अखिलेश यादव का भी खत्म हो रहा कार्यकाल

विधान परिषद सदस्य और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीजेपी सरकार के मंत्रियों महेन्द्र सिंह और मोहसिन रजा समेत 13 सदस्यों का कार्यकाल आगामी पांच मई को समाप्त हो रहा है. जो 13 सीटें खाली होंगी, उनमें सात एसपी की, दो-दो बीजेपी और बीएसपी की और एक राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) की है. इनमें एक सीट पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी की भी है, जो उनके एसपी से बीएसपी में जाने के बाद खाली हुई थी.

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