live
S M L

लालबत्ती से पहले अपनी अकड़ छोड़िए नेताजी!

लाल बत्ती वाले मंत्री हों या कोई और नेता उनका काम जनता की सेवा करना है मगर वो तो शासक बनकर बर्ताव करते हैं

Updated On: Mar 29, 2017 08:31 AM IST

Monobina Gupta

0
लालबत्ती से पहले अपनी अकड़ छोड़िए नेताजी!

हमारे राजनेता सोचते हैं कि सिर्फ लाल बत्ती छोड़ देने से वीआईपी कल्चर खत्म करने की उनकी नेकनीयती जाहिर होती है. जब आम आदमी पार्टी ने साल 2014 में दिल्ली में सरकार बनाई, तो उसके मंत्रियों ने लाल बत्ती लगाकर चलना छोड़ दिया.

तीन साल बाद अब पंजाब की अमरिंदर सरकार ने भी इसका एलान कर दिया है. कहा जा रहा है कि यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार का इरादा भी मंत्रियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटाने का है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही लाल बत्ती कल्चर खत्म करने का एलान कर चुकी हैं. वहीं बिहार के शिक्षा मंत्री और कांग्रेस के नेता अशोक चौधरी भी अपनी सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो मंत्रियों को लाल बत्ती लगाने से रोके.

शायद वीआईपी कल्चर का इतना विरोध होने की वजह से तमाम सरकारें लाल बत्ती छोड़कर अपने नेक इरादे जाहिर करना चाहती हैं. ये कोशिश जनता के विरोध के चलते एक लीपापोती का कदम ज्यादा नजर आता है.

लालबत्ती हटाने से कम नहीं होता गुरूर

असल में तो हमारे नेता एक भी सुविधा नहीं छोड़ना चाहते. सिर्फ लालबत्ती को 'त्याग' करके नेता लोग जनता को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, वो बाकी सुविधाएं, यहां तक कि अकड़ भी छोड़ने को राजी नहीं हैं. जहां भी जाते हैं अपनी हेकड़ी दिखाकर अलग से सुविधाएं मांगने लगते हैं.

आज जनता, नेताओं से इतनी नफरत इसीलिए करती है क्योंकि उनके बर्ताव में नेता होने का गुरूर झलकता है. लालबत्ती गाड़ी से चलना इसकी सिर्फ एक मिसाल है. अब सिर्फ लाल बत्ती हटाने से न तो नेता का गुरूर कम होने वाला है और न ही उनकी हेकड़ी.

हाल में शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ की करतूत को ही लीजिए. गायकवाड़ ने सिर्फ पसंदीदा सीट न मिलने पर एयर इंडिया के कर्मचारी को सरेआम चप्पलों से पीटा.

वो इकॉनोमी क्लास वाली फ्लाइट में बिजनेस क्लास की सीट मांग रहे थे. बार-बार समझाने पर भी उन्हें ये बात समझ में नहीं आई. गायकवाड़ की हेकड़ी इतनी बढ़ी कि उन्होंने साठ साल के एयर इंडिया कर्मचारी को सरेआम सैंडल मारे. फिर वो अपनी करतूत को जहां-तहां गाते फिर रहे थे.

ravindra gaikwad

शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ (तस्वीर साभार एएनआई)

शिवसेना जैसी पार्टियों की वजह से आती है अकड़ 

गायकवाड़ की करतूत पर शिवसेना ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी है वो और भी शर्मनाक है. शिवसेना का रवैये से जाहिर होता है कि नेता इतने अकड़ते क्यों हैं और वो ये हेकड़ी क्यों नहीं छोड़ते.

पार्टी ने रवींद्र गायकवाड़ के बर्ताव पर कोई एक्शन लेने के बजाय उसे जायज ठहराना शुरू कर दिया. शिवसेना ने कहा कि वो हिंसा की निंदा करती है. मगर दूसरे का पक्ष भी सुना जाना चाहिए.

सोमवार को शिवसेना ने कहा कि वो अपने सांसद का टिकट कैंसिल करने पर एयर इंडिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी.

पार्टी ने रवींद्र गायकवाड़ के साथ एयर इंडिया के सलूक के खिलाफ उनके इलाके उस्मानाबाद में बंद भी बुलाया. शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि गायकवाड़ के खिलाफ किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है.

किसी पार्टी का अपने नेता के बर्ताव पर ऐसी प्रतिक्रिया देना, वीआईपी कल्चर को बढ़ावा देना ही है. यही वजह है कि गायकवाड़ ने अब तक अपने बर्ताव पर माफी नहीं मांगी है. वैसे लोगों से खुलेआम बदसलूकी करने वाले रवींद्र गायकवाड़ न तो पहले नेता हैं और न ही आखिरी.

uddhav thakrey

शिवसेना ने रवींद्र गायकवाड़ की हरकत का समर्थन किया

पहले भी नेता कर चुके हैं बदसलूकी 

2014 में महाराष्ट्र सदन में 11 सांसदों ने अरशद जुबैर नाम के मुस्लिम कर्मचारी के मुंह में रोटी ठूंस दी थी. जबकि उन्हें मालूम था कि वो उस वक्त रोजे पर था.

अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अरशद ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि, 'सभी मेहमान मीडिया के साथ महाराष्ट्र सदन के किचेन में आ गए. वहां खाना तैयार हो रहा था. मैं लोगों को खाना तैयार करने के निर्देश दे रहा था. उस वक्त मैंने वर्दी पहन रखी थी. उसमें मेरी नेम प्लेट भी लगी थी. वहां मौजूद सभी लोगों को पता था कि मेरा नाम अरशद है...'

ऐसा नाकाबिले-बर्दाश्त सियासी कल्चर हमारे नेताओं को बदसलूकी के लिए उकसाता है. ये हमारे राजनीतिक सिस्टम की खामी भी जाहिर करता है. पहले तो पार्टियां अपराधियों को टिकट देती हैं. फिर जब वो चुनाव जीतकर ऐसी हरकतें करते हैं तो फिर तमाम दल उसे जायज भी ठहराने लगते हैं.

कभी भी पार्टी का नेतृत्व या आलाकमान ऐसे बदमिजाज नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता. ऐसी एक घटना के बाद दूसरी घटना होती है. इसी वजह से नेताओं के बुरे बर्ताव का सिलसिला जारी रहता है.

रवींद्र गायकवाड पहली बार सांसद बने हैं. वो दो बार विधायक भी रह चुके हैं. उनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धमकी देने और सरकारी कर्मचारियों के साथ हिंसा करने के कई केस चल रहे हैं.

सच तो ये है कि चाहे लाल बत्ती वाले मंत्री हों या कोई और नेता, सबकी जिम्मेदारी जनता की सेवा करना है. मगर वो तो शासक बनकर बर्ताव करते हैं.

जब तक वो अपनी बुनियादी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक वो खुद को आम लोगों से ऊपर समझते रहेंगे. वो सरेआम हेकड़ी दिखाएंगे. लोगों से बुरा बर्ताव करेंगे. उनके किरदार में बदलाव आने, वीआईपी कल्चर खत्म होने की उम्मीद कम ही है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi