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महिलाओं को गुजारा भत्ता के लिए HC को कानून मंत्रालय का खत

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी हाईकोर्ट को कहा है कि वो महिलाओंं को गुजारा-भत्ता दिलाने के लिए हर जिला में वहां के संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाए

Updated On: Dec 25, 2017 02:10 PM IST

Ranjita Thakur

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महिलाओं को गुजारा भत्ता के लिए HC को कानून मंत्रालय का खत

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाने की मुहिम के साथ ही सभी धर्म-समुदाय की महिलाओं के हक में एक नई पहल की है. उसने सभी हाईकोर्ट को कहा है कि वो महिलाओंं को गुजारा-भत्ता दिलाने के लिए हर जिला में वहां के संबंधित जिलाधिकारी (डीएम) की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाए. इससे यह सुनिश्चित होगा कि महिलाओं को गुजारा भत्ता समय से और निरंतर मिले.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद की ओर से देश के सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीशों को लिखे गए एक पत्र में कहा गया है कि यह सरकार, न्यायालय और कार्यपालिका सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वह महिलाओं को उनका अधिकार दिलाए और समय से दिलाए.

कानून मंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि जिला न्यायाधीश की अध्यक्षता में जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की एक निगरानी टीम बनाई जाए. अदालत ऐसे मामले को तेजी से निपटाए और जिला पुलिस उसके तामील को सुनिश्चित करे.

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रविशंकर प्रसाद के इस पत्र के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने सभी जिला और फैमिली कोर्ट को इस तरह की निगरानी कमेटी बनाने की सलाह दी है. साथ ही जिलों के एसपी को भी इसके प्रति सजगता बरतने को कहा है. इसी तरह से जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने भी कहा है कि वह यह देखेगा कि ऐसे मामले किस स्थिति में हैं. और एक बार अदालत की ओर से आदेश के बाद महिलाओं को गुजारा भत्ता हकीकत में कितने दिन बाद मिलता है.

कानून मंत्री ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि उनके पास मंत्रिमंडल में उनकी सहयोगी और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी की ओर से एक पत्र आया था. इसमें उन्होंने गुजारा भत्ता की हकदार महिलाओं की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इस पर कुछ कदम उठाने का अनुरोध किया था.

गुजारा भत्ता की हकदार महिलाओं की स्थिति का जिक्र करते हुए रविशंकर प्रसाद ने अपने पत्र में लिखा है कि एक संवेदनशील और जवाबदेह सरकार, न्यायपालिका और कार्यपालिका होने के नाते यह हमारा सामूहिक कर्तव्य है कि हम इस पर संजीदगी से कदम उठाएं और महिलाओं को उनका हक दिलाएं.

कानून मंत्री की इस पहल को उन मुस्लिम नेताओं को एक जवाब भी माना जा रहा है जिनका कहना था कि तीन तलाक से पहले मोदी सरकार सामान्य शादी-विवाह के झगड़ों मेंं फंसी हिंदू महिलाओं के बारे में कुछ विचार-विमर्श करे.

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