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लालू प्रसाद यादव को लेकर सीबीआई की क्या होगी अगली रणनीति?

बार-बार लालू प्रसाद यादव सीबीआई के सामने पेश होने से बच रहे हैं

Updated On: Sep 25, 2017 09:44 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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लालू प्रसाद यादव को लेकर सीबीआई की क्या होगी अगली रणनीति?

रेलवे टेंडर घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव सीबीआई में दूसरी बार पेश नहीं हुए. लालू प्रसाद यादव के वकीलों ने सीबीआई से दो हफ्ते का और समय मांगा है.

सीबीआई ने इससे पहले 11 और 12 सितंबर को पूछताछ के लिए लालू यादव और उनके बेटे तेजस्वी को बुलाया था. हालांकि, दोनों पिता-पुत्र उस तारीख को भी हाजिर नहीं हो पाए थे.

दोनों ने 11 और 12 सिंतबर को दिल्ली आने में असमर्थता जाहिर की थी. इसके बाद सीबीआई ने एक और नया डेट जारी किया था. सितंबर महीने के पहले हफ्ते में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को सीबीआई की ओर से पेश होने का समन जारी हुआ था.

लालू यादव के बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी कल यानी 26 सितंबर को सीबीआई के सामने पेश होना है. ऐसा लगता है कि पिता की तरह वह भी सीबीआई से कुछ और दिन का वक्त मांग लें.

Tejashwi Yadav

सीबीआई लालू यादव को और मोहलत देने को तैयार नहीं

सूत्रों के अनुसार सीबीआई लालू प्रसाद यादव को और मोहलत देने को तैयार नहीं है. सीबीआई लालू प्रसाद यादव के द्वारा दिए गए पिछले दो कारणों की जांच कर रही है.

सीबीआई की जांच में अगर लालू प्रसाद यादव द्वारा बताए कारण सही पाए गए तो सीबीआई कुछ दिनों की और मोहलत दे सकती है. अगर जांच में लालू प्रसाद यादव द्वारा दिए गए कारण गलत पाए गए तो सीबीआई लालू प्रसाद यादव के खिलाफ अदालत जा सकती है.

सीबीआई अदालत में रिपोर्ट दाखिल कर लालू प्रसाद यादव के खिलाफ जांच में सहयोग नहीं करने का आरोपपत्र दाखिल कर सकती है. ऐसे में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि हो सकता है कि अदालत की तरफ से लालू को पेशी के लिए डेट मिले.

बता दें कि लालू प्रसाद यादव पर आरोप है कि रेलमंत्री रहने के दौरान उन्होंने रांची और पुरी रेलवे होटलों को अपने करीबियों को लीज पर बेच डाला था.

सीबीआई को मिले दस्तावेज के मुताबिक, होटल लीज पर देने के नाम पर रेलवे के नियमों को ताक पर रखा गया था. लालू प्रसाद यादव उस वक्त रेल मंत्री थे. रेलवे को रांची और पुरी के होटल लीज पर देने को लेकर लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव के साथ झारखंड से राज्यसभा सांसद और पार्टी के नेता प्रेमचंद्र गुप्ता और उनकी पत्नी सरला गुप्ता को अभियुक्त बनाया गया है.

इसके साथ ही इस मामले में होटल लीज पर लेने वाले विनय कोचर, विजय कोचर और पी के गोयल को भी आरोपी बनाया गया है. सीबीआई पहले ही कोचर बंधुओं, पीके गोयल और सरला गुप्ता से पूछताछ कर चुकी है.

rakesh asthana

इस केस को सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना देख रहे हैं

सीबीआई के एडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना इस केस को देख रहे हैं. लालू प्रसाद यादव और राकेश अस्थाना का सामना पहले भी कई मौकों पर हो चुका है.

राकेश अस्थाना इससे पहले भी देश में चर्चित चारा घोटाले की प्रारंभिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. राकेश अस्थाना के सीबीआई में रहते ही लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले में शिकंजा कसा गया था.

सीबीआई के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल आवंटन में गड़बड़ियां हुई हैं. होटल लीज पर लेने के बदले जमीन ली गई. पटना के बेली रोड स्थित प्राइम लोकेशन पर तीन एकड़ जमीन लालू परिवार को दिया गया. इसकी कीमत उस वक्त करोड़ों में आंकी जा रही थी.

32 करोड़ की जमीन सिर्फ 65 लाख में दी गई. इसी जमीन पर तेजस्वी यादव मॉल का निर्माण करा रहे थे. जिसे बाद में रुकवा दिया गया था.

पटना के बेली रोड पर तीन एकड़ की यह जमीन कोचर बंधुओं की थी. कोचर बंधुओं ने यह जमीन पहले प्रेमचंद्र गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता की कंपनी के नाम ट्रांसफर किया.

बाद में सरला गुप्ता की कंपनी ने यह जमीन लालू परिवार की कंपनी डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिया. बाद में डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड का नाम बदल कर लारा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया.

सीबीआई ने इसको लेकर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के केस में आईपीसी की धारा 420 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया था.

आयकर विभाग और सीबीआई की छापेमारी में बरामद दस्तावेज बताते हैं कि पूर्व कोचर बंधुओं को रांची और पूरी के होटल 30 साल की लीज पर दी गई थी. लेकिन, बाद में इसकी अवधि बढ़ाकर 60 साल कर दी गई.

रेलवे होटल लीज मामले में जांच के दौरान सीबीआई ने कई तरह की अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेज जब्त किए थे. सीबीआई इसी दस्तावेजों को आधार बना कर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से पूछ-ताछ कर करना चाहती है.

लेकिन, बार-बार लालू प्रसाद यादव सीबीआई के सामने पेश होने से बच रहे हैं. ऐसे में सीबीआई जल्द ही अदालती आदेश जारी कर उन पर शिकंजा कस सकती है.

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