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लालू यादव को बचाने में विफल रही बीजेपी की एक लॉबी!

खबर थी कि खुद को बचाने के लिए लालू प्रसाद बीजेपी के कुछ खास नेताओं से संपर्क में थे

Updated On: May 16, 2017 12:53 PM IST

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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लालू यादव को बचाने में विफल रही बीजेपी की एक लॉबी!

लगता है कि भाजपा की एक खास लॉबी लालू प्रसाद को बचाने में अंततः विफल रही. आयकर के छापे की घटना से अब यह बात साबित हो गयी है. इससे पहले पिछले कुछ समय से दिल्ली और पटना के राजनीतिक हलकों में यह चर्चा थी कि एक से एक खुलासे के बावजूद लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों द्वारा कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? उनके ठिकानों पर छापे क्यों नहीं डाले जा रहे हैं?

बिहार बीजेपी सूत्रों ने बताया था कि खुद को बचाने के लिए लालू प्रसाद बीजेपी के कुछ खास केंद्रीय नेताओं से संपर्क में थे. यह भी खबर थी कि व्यावसायिक हितों वाले एक स्वामी भी लालू परिवार को बचाने की कोशिश में लगे हुए थे. लेकिन लगता है कि अंततः कुछ भी काम नहीं आया.

हाल के कुछ हफ्तों से बिहार बीजेपी के नेता सुशील कुमार मोदी और देश के कुछ निजी चैनल लालू परिवार की अरबों की संपत्ति को लेकर खुलासे कर रहे थे. इसके बावजूद केंद्र सरकार की संबंधित एजेंसियां शांत थीं. शायद वे उचित अवसर की तलाश में थी. तूफान से पहले की वह शांति थी.

वह अवसर आ गया और आयकर के छापे पड़ने लगे. उससे पहले जानकार सूत्रों ने बताया था कि लालू प्रसाद ने भागलपुर दंगे से संबंधित एक प्रकरण की याद एक बड़े बीजेपी नेता को दिलाई थी.

ये भी पढ़ें: लालू यादव की बेनामी संपत्ति का मामला: 22 ठिकानों पर आयकर विभाग की रेड

याद रहे कि 1989 के दिसंबर में लालू प्रसाद ने लोकसभा में कहा था कि भागलपुर दंगे के पीछे संघ परिवार का हाथ नहीं है. उन्होंने कहा था, 'मेरे पास इस बात का पक्का सबूत है कि कांग्रेसी नेताओं ने ही अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए दंगा करवाया.'

याद रहे कि 1989 के भागलपुर दंगे में करीब एक हजार लोग मारे गये थे. भागलपुर दंगे की पृष्ठभूमि में हुए लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में वी पी सिंह की सरकार बन गई. लालू सांसद चुने गए. केंद्र सरकार कम्युनिस्टों और बीजेपी के समर्थन से चल रही थी.

बिहार विधानसभा का चुनाव 1990 में होने वाला था. लालू प्रसाद को तब यह लगता था कि संभवतः बिहार में भी जनता दल को सत्ता के लिए बीजेपी की मदद की जरूरत पड़ेगी. लालू मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे.

हाल में मिली सूचना के अनुसार लालू प्रसाद ने भागलपुर प्रकरण की याद दिलाते हुए शीर्ष भाजपा नेता से कहा था कि हम एक बार फिर आपके काम आ सकते हैं. लेकिन लगता है केंद्र सरकार ने लालू बचाओ लॉबी की पहल की परवाह नहीं की.

बिहार बीजेपी के एक जिम्मेदार नेता ने इन पंक्तियों के लेखक का ऐसी जानकारी दी थी. एक वरिष्ठ भाजपा एमएलसी ने बताया था कि हमारी पार्टी तेजप्रताप यादव से संपर्क में रही है. पटना में प्रकाश पर्व के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने तेज प्रताप यादव से कहा था कि ‘कहो कृष्ण कन्हैया, क्या हाल चाल है ?’

याद रहे कि लालू प्रसाद ने तेज प्रताप को नजरअंदाज करके अपने छोटे पुत्र तेजस्वी यादव को उप मुख्य मंत्री बना दिया. एमएलसी के अनुसार हम लोग भविष्य में तेज प्रताप को तोड़ सकते हैं.

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