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जेड+ से जेड कैटेगरी पर 'खाल खींचने' को तैयार? उनसे पूछिए जिन्होंने देखा है जंगलराज

'ए टू जेड' नेताओं के सिक्योरिटी कनेक्शन को देखें तो सिक्युरिटी की सियासत 'प्लस और माइनस' में उलझी दिखाई देती है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Nov 28, 2017 06:14 AM IST

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जेड+ से जेड कैटेगरी पर 'खाल खींचने' को तैयार? उनसे पूछिए जिन्होंने देखा है जंगलराज

जेड प्लस सिक्योरिटी यानी देश की सबसे वीवीआईपी सुरक्षा कैटेगरी जिसमें सबसे ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं. 36 सुरक्षाकर्मियों के घेरे में 10 एनएसजी कमांडो भी हर वक्त वीवीआईपी की सुरक्षा में डटे रहते हैं. जेड प्लस सिक्योरिटी के लिए कहा जाता है कि ये ऐसा सुरक्षा चक्र होता है जिसमें परिंदा भी पर नहीं मार सकता. लेकिन इस सुरक्षा के पर केंद्र सरकार कतर भी सकती है. इस बार केंद्र सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की जेड प्लस सुरक्षा वापस ले ली. साथ ही उनकी सुरक्षा में लगे एनएसजी कमांडो को हटाने का फैसला भी ले लिया. ऐसा नहीं कि लालू प्रसाद यादव के पास सुरक्षा कवच ही नहीं होगा बल्कि उसमे कटौती करते हुए उन्हें जेड कैटेगरी की सिक्योरिटी दी गई है.

बस इसी ‘प्लस के माइनस’ होने से बवाल ऐसा मचा कि लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजप्रताप यादव ने इसे पिता के मर्डर की साजिश करार दिया. लालू के बड़े बेटे के बड़े बोल ने पीएम मोदी के लिये अभद्र भाषा तक का इस्तेमाल सवाल ये है कि आखिर लालू की जान को किससे खतरा है? बिहार में लालू जननायक हैं और उनका ठोस जनाधार है तो ऐसे में लालू पर हमला कर किसको क्या हासिल हो सकता है?

बात सिर्फ लालू प्रसाद यादव की नहीं है. बिहार से सिर्फ उनका ही नाम खासतौर पर नहीं चुना गया. लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी के साथ साथ जेडीयू के बागी नेता शरद यादव की सुरक्षा भी कम कर दी गई है.

sharad yadav

शरद यादव

शरद यादव की जेड सिक्योरिटी को घटा कर वाई प्लस कर दिया गया है. वहीं देश के छह वीवीआईपी की सुरक्षा में भी कटौती की गई है. केंद्रीय गृहमंत्रालय ने दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग, जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद बुखारी, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी की सुरक्षा में भी कटौती की है.

अब लालू प्रसाद यादव से सवाल पूछा जा सकता है कि इन बड़े नामों की सुरक्षा में कटौती की क्या वजह हो सकती है?

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इससे पहले लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को केंद्रीय विमानन मंत्रालय से मिली पटना एयरपोर्ट पर विशेष छूट भी खत्म कर दी गई थी जिसके तहत लालू और राबड़ी बिना सुरक्षा जांच के बिना पटना एयरपोर्ट के रनवे तक जाने की छूट मिली थी.

जेड प्लस सिक्योरिटी के माइनस होने से लालू नाराज हैं. उनका कहना है कि अब उनके साथ सिर्फ चार सिपाही रहेंगे. लेकिन जेड सिक्योरिटी कैटेगरी में भी सुरक्षा के जवानों की कोई कमी नहीं होती है. जहां जेड प्लस में 36 सुरक्षाकर्मी होते हैं और 10 एनएसजी के कमांडो होते हैं तो वहीं जेड सिक्योरिटी कैटेगरी में 22 सुरक्षाकर्मी और 5 एनएसजी कमांडो हर वक्त तैनात रहते हैं.

ऐसे में लालू की दलील समझ से परे है क्योंकि उनकी सुरक्षा में वैसी कटौती नहीं की गई जिसकी हवा तेज प्रताप यादव बना रहे हैं.

tej pratap

तेज प्रताप ने जेड प्लस सिक्योरिटी हटाने पर कहा था कि लालू जी कई कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और ऐसे में सिक्योरिटी में कटौती करना उनकी हत्या की साजिश के बराबर है.

जबकि लालू जी की सिक्योरिटी में सिर्फ प्लस और माइनस का ही फर्क आया है उसे जीरो नहीं किया गया है.

लेकिन इसके पीछे की राजनीति को समझने की असली जरूरत है. दरअसल जेड प्लस सिक्योरिटी से नेता का एक अलग ही 'माहौल' बनता है. किसी भी कार्यक्रम स्थल में पहुंचने से पहले ही सुरक्षाकर्मी वहां पहुंच कर माहौल गर्मा देते हैं. ठेठ राजनीतिक भाषा में कहें तो ये सिक्योरिटी की झांकी नेताओं का माहौल बनाने का काम करता है.

नेताओं के काफिले के साथ बुलेटप्रूफ कार होती है, मोबाइल जैमर साथ चलता है और इसके अलावा एडवांस्ड वेपन सिस्टम और सर्विलांस सिस्टम भी मौजूद होता है. कभी-कभी ये सारा तामझाम भी भीड़ इकट्ठा करने के काम आता है क्योंकि लोगों का कौतुहल इसे देखने के लिए नेताओं की रैली तक उन्हें खींच लाता है.

जितनी बड़ी सिक्योरिटी यानी उतना बड़ा नेता. आज के दौर में जेड प्लस सिक्योरिटी जान की हिफाजत से ज्यादा स्टेटस सिंबल बन चुका है. लालू कह रहे हैं कि वो समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या सरकार के पास सैनिकों की कमी हो गई है या वो पाकिस्तान पर चढ़ाई करने वाले हैं.

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देश में सैनिकों की कमी नहीं है. सेना प्रमुख देश को भरोसा दिला चुके हैं कि देश की सेना ढाई मोर्चे पर जंग लड़ने के लिये तैयार है. लेकिन इस देश की विडंबना ही कुछ ऐसी है कि यहां नेताओं के बेटे सेना में नहीं जाते वर्ना सेना में जवानों की पर्याप्त से ज्यादा भरमार होती क्योंकि नेताओं की कमी नहीं है. रहा सवाल पाकिस्तान पर चढ़ाई करने का तो लालू जी के सवाल में ही जवाब भी छिपा हुआ है. अगर केंद्र सरकार ने सुरक्षाकर्मी में कटौती कर उन्हें कहीं और लगाया है तो इसमें कहीं न कहीं देशहित छिपा हुआ है और ये जरूरी नहीं कि पाकिस्तान पर हमला करने के लिए ही लालू जी के एनएसजी के कमांडो की जरूरत पड़े.

Young Lalu Yadav

लालू युवावस्था के वक्त जेपी के आंदोलन से जुड़े थे. लोहिया और जेपी के ही पदचिन्हों पर चलने के लिए राजनीति में उतरे. इतिहास गवाह है कि लोहिया और जेपी का राजनीतिक कद कितना बड़ा था. आम जनता की भीड़ में खुद को सुरक्षित मानने वाले ये नेता न तो सत्ता के लिये लालायित थे और न ही सुरक्षा को लेकर भयाक्रांत. जेपी के आंदोलन से ही निकली पीढ़ी में लालू, मुलायम,नीतीश और शरद यादव जैसे नेताओं को जब सत्ता मिली तो केंद्र और राज्य सरकारों ने सुरक्षा की तय कैटेगरी के मुताबिक सिक्योरिटी भी दी.

लेकिन अब सियासी बवाल सिक्योरिटी के प्लस से माइनस होने को लेकर है. जो जनाधार किसी आम इंसान को नेता बना देता है बाद में उसी जनाधार में नेताओं को अपनी सुरक्षा में खतरा भी दिखाई देने लगता है. इस मानव विज्ञान से हर वो नेता कभी न कभी दो-चार होता है जब उसके हाथ से सत्ता जाती है और फिर धीरे से सिक्योरिटी भी. लालू भी उसी बेचैनी से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और सियासी असुरक्षा में उन्हें केंद्र का हर कदम साजिश नजर आ रहा है.

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