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लखीमपुर के गन्ना किसानों के लिए सियासी वादे महज छलावे

अखिलेश सरकार की नीतियों से नाराज हैं गन्ना किसान, बीजेपी से है आस

Updated On: Feb 13, 2017 06:46 PM IST

Amitesh Amitesh

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लखीमपुर के गन्ना किसानों के लिए सियासी वादे महज छलावे

लखीमपुर के सम्भर खेड़ा के रहने वाले किसान हरबख्श सिंह बगल की ही एक चीनी मिल में गन्ने की ट्राली लेकर पहुंचे हैं. हरबख्श सिंह की 5 से 6 एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं. लेकिन, उनकी शिकायत है कि समय पर दाम नहीं मिल रहे.

सम्भर खेड़ा की चीनी मिल में अबतक इनकी 20 ट्राली से गन्ना आ चुका है फिर भी थोड़ा ही भुगतान हुआ है. 27 नवंबर के बाद लाए गए गन्ने पर अबतक इनको कुछ भी नहीं मिल पाया है.

हमें तो सूद देना पड़ता है पर मिलता नहीं

 

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किसाना धर्मेश मिश्र और हरबख्श सिंह

अपना दुखड़ा सुनाते हुए हरबख्श सिंह कहते हैं ‘किसान सेवा सहकारी समिति से 75000 रुपए लिए हैं, उस पर सूद तो जा रहा है. लेकिन, चीनी मिल से सही वक्त पर पैसा नहीं मिल पाने के कारण पैसा चुकता नहीं कर सकता.’

उनकी नाराजगी इस बात से भी है कि चीनी मिल देर से पैसा देने पर गन्ना के बकाए पर सूद देते नहीं हैं.

लखीमपुर खीरी के दूसरे गन्ना किसान भी चीनी मिलों से पैसे में हुए भुगतान की देरी से खिन्न दिख रहे हैं. लेकिन, मजबूरी ऐसी की कुछ कर न पा रहे. फसल तैयार है तो मिल के पास तो आना ही होगा.

सम्भर खेड़ा की चीनी मिल पर अपने गन्ने को लेकर आए किसान पवन वर्मा का कहना है ‘अखिलेश यादव ने कई वादे किए थे लेकिन, इसमें कुछ भी पूरा नहीं हुआ. अब बीजेपी की तरफ से वादे किए जा रहे हैं, देखते हैं क्या होता है. हालाकि, फसल ऋण की माफी होती है तो भी किसानों को फायदा तो जरूर होगा.’

बीजेपी के वादों से है आस

PM Modi

दरअसल बीजेपी इस बार किसानों को अपनी ओर खींचने के लिए वादों की झड़ी लगा रही है. बीजेपी ने किसानों के फसली ऋण माफ करने का भरोसा दिया है. लेकिन, सबसे बड़ी समस्या चीनी मिल से किसानों को भुगतान में देरी को लेकर होती रही है.

बीजेपी की तरफ से वादा किया गया है कि सरकार बनने पर पिछले बकाए का भुगतान 120 दिन के भीतर कर दिया जाएगा, जबकि, आगे से हर भुगतान दो हफ्ते के भीतर ही करवाया जाएगा.

बीएसपी की तरफ से किसानों की कर्ज माफी की बात कर उन्हें लुभाया जा रहा है तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव की तरफ से भी समर्थन मूल्य में बढोत्तरी के अपने कदम को भी दिखाकर किसानों को अपने पाले में लाने की कोशिश हो रही है.

सम्भर खेड़ा के चीनी की मिल के बाहर चाय की दूकान पर चर्चा करते हुए कई किसानों और चाय दूकानदार के बीच बहस अचानक तेज हो गई.

सबकी अलग-अलग राय

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ज्ञानपुर के किसान धर्मेश मिश्रा कहते हैं ‘दिल्ली में जब से मोदी सरकार बनी है तब से किसानों के लिए बहुत काम हुआ है. लखीमपुर खीरी में कृषि अनुसंधान केंद्र खुला है. यूपी में बीजेपी सरकार बनेगी तभी सही वक्त पर किसानों को पैसे का भुगतान होगा.’

लेकिन, चाय दूकानदार शत्रुघ्नलाल गौतम तो ने पलटकर धर्मेन्द्र मिश्रा की बात का जवाब दिया. ‘गौतम ने कहा  कि किसी से कुछ नहीं होने वाला है. बहन जी के आने पर  शासन चुस्त-दुरुस्त हो जाता है. इस बार भी ऐसा ही होगा. जब बहन जी सत्ता में आएंगी तो फिर से सही वक्त पर किसानों को पैसा मिलेगा.’

लगातार चीनी मिल के सामने कई सालों से चाय की दूकान चलाने वाले शत्रुघ्नलाल गौतम का लगातार किसानों से वास्ता होता रहता है.

धीरे-धीरे किसानों के मुद्दे पर शुरू हुई बहस चुनावी बहस में तब्दील होने लगी. किसान धर्मेश मिश्रा ने बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए. मिश्रा कहते हैं ‘केंद्र में अच्छा काम हो रहा है पहले सरकार बना कर तो देखो यहां भी अच्छा काम होगा. लेकिन, गौतम का मानना है यूपी में हर  मर्ज की दवा बहन जी हैं.’

गन्ने का मौसम चल रहा है फसलों में गन्ना लहलहा रहे हैं. पश्चिमी यूपी से लेकर तराई के इलाके में किसान फसलों को लेकर लंबी-लंबी कतारों में दिख रहे हैं. लेकिन, मौसम चुनाव का है तो गन्ना के पैसे के भुगतान में देरी चुनाव के वक्त चर्चा का केंद्र बन गया है.

लेकिन, इन तमाम चर्चाओं के बीच लखीमपुर खीरी के कुछ इलाकों में आने वाली बाढ और कटान की विभीषिका पर चर्चा गायब है.

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