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उपेंद्र कुशवाहा को ‘कुशवाहा कार्ड’ से ही घेरने की तैयारी में अरुण कुमार, बिछाई सियासी बिसात

28 जून को एक नई पार्टी का ऐलान होने वाला है. यह पार्टी अरुण कुमार की ही देखरेख में चलेगी

Updated On: Jun 22, 2018 01:54 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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उपेंद्र कुशवाहा को ‘कुशवाहा कार्ड’ से ही घेरने की तैयारी में अरुण कुमार, बिछाई सियासी बिसात

मोदी सरकार के चार साल पूरा होने के बाद अब अगले लोकसभा चुनाव में महज एक साल से भी कम का वक्त बचा है. लोकसभा चुनाव की अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है, लिहाजा सभी राजनीतिक दल और राजनेता भावी रणनीति को लेकर अपनी तैयारियों में लग गए हैं. बिहार भी इस सियासी हलचल से अछूता नहीं है. लोकसभा चुनाव से पहले बिहार में एक और सियासी धमाका होने जा रहा है. जहानाबाद के सांसद और आरएलएसपी (अरुण गुट) के अध्यक्ष अरुण कुमार अब बिहार की सियासत में नया धमाका करने की तैयारी में हैं.

28 जून को होगा नई पार्टी का ऐलान

सूत्रों के मुताबिक, 28 जून को एक नई पार्टी का ऐलान होने वाला है. यह पार्टी अरुण कुमार की ही देखरेख में चलेगी. सूत्रों के मुताबिक, अगले 28 जून को पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में एक बड़े कार्यक्रम में नई पार्टी के गठन का औपचारिक ऐलान किया जाएगा. नई पार्टी का नाम राष्ट्रीय समता पार्टी (सेक्युलर) होगा. अरुण कुमार के करीबी और पूर्व विधान पार्षद अजय सिंह अलमस्त इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, जबकि ओम प्रकाश बिंद पार्टी के बिहार अध्यक्ष होंगे. अजय सिंह अलमस्त अरुण कुमार के सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं. उनका राजनीतिक इतिहास रहा है. वो खुद विधानपार्षद रहे हैं. लेकिन, उनके पिता मंजर लाल कुशवाहा भी अपने जमाने के बड़े नेता रहे हैं.

बिहार में अजय सिंह अलमस्त और उनके पिता का काफी प्रभाव रहा है. अलमस्त पिछड़ी जाति के कुशवाहा समाज से ही आते हैं, लिहाजा उन्हें पार्टी की कमान सौंपकर कोशिश कुशवाहा समाज में पार्टी की पैठ बनाने की है. इसके अलावा ओमप्रकाश बिंद जो कि अतिपिछड़ी जाति से आते हैं, उन्हें बिहार प्रदेश की कमान सौंपकर अति पिछड़ी जातियों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है.

कुशवाहा और कुमार की राहें पहले से ही अलग

आरएलएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी कुशवाहा समाज से ही आते हैं. उपेंद्र कुशवाहा के साथ अरुण कुमार की अदावत जगजाहिर है. उपेंद्र कुशवाहा और अरुण कुमार ने मिलकर ही 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले आरएलएसपी की स्थापना की थी. उस वक्त उपेंद्र कुशवाहा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अरुण कुमार बिहार प्रदेश के अध्यक्ष बनाए गए थे.

उस वक्त पहली बार पार्टी ने बीजेपी के साथ मिलकर तीन लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था. तीनों सीटों पर ही पार्टी को जीत मिली थी. उपेंद्र कुशवाहा काराकाट से जबकि अरुण कुमार जहानाबाद से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. सीतामढ़ी की तीसरी सीट पर भी रामकुमार वर्मा ने जीत दर्ज की थी. लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नई सरकार में उपेंद्र कुशवाहा को राज्य मंत्री बनाया गया था. राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी उनके पास ही रहा. आगे चलकर पार्टी के दोनों नेताओं में अनबन के बाद उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली आरएलएसपी ने अरुण कुमार को पार्टी से निलंबित कर दिया, जिसके बाद से ही अरुण कुमार एनडीए के भीतर रहते हुए अपने-आप को खड़ा करने में लगे हैं.

हालांकि अभी भी असली आरएलएसपी को लेकर दोनों पक्ष अपना-अपना दावा करते रहे हैं. अभी भी अरुण कुमार अपने-आप को आरएलएसपी (अरुण गुट) के अध्यक्ष के तौर पर ही दावा करते रहे हैं. अरुण गुट के मुताबिक अभी आरएलएसपी पर दावे को लेकर मामला चुनाव आयोग में लंबित है. लेकिन, उससे पहले अरुण कुमार की तरफ से नई पार्टी बनाकर एक नए विकल्प की कोशिश की जा रही है.

अलमस्त करेंगे कुशवाहा को पस्त!

अब अजय सिंह अलमस्त को नई पार्टी की कमान सौंपकर उपेंद्र कुशवाहा के वोट बैंक पर सबसे पहले प्रहार करने की तैयारी है. कुशवाहा समाज के अलमस्त आने वाले दिनों में अपनी पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर जनाधार बढ़ाने की कोशिश करेंगे. अरुण कुमार के करीबी सूत्रों का दावा है कि आरएलएसपी के अधिकतर कुशवाहा कार्यकर्ता भी उनके ही साथ रहेंगे.

लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी से सीधे जुड़ेंगे अरुण कुमार

Arun Kumar MP

हालांकि आरएलएसपी से निलंबित सांसद अरुण कुमार भी पार्टी से सीधे तौर पर नहीं जुड़ेंगे. सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले इस साल के अंत तक अरुण कुमार औपचारिक तौर पर रासपा (आरएसपी / राष्ट्रीय समता पार्टी) से जुड़ जाएंगे. जबकि आरएलएसपी के विधायक ललन पासवान भी आगे चलकर आरएसपी के साथ चले आएंगे. सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में औपचारिक तौर पर शामिल होने के बाद आरएसपी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर अरुण कुमार पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगे.

जॉर्ज फर्नांडिस के सिद्धांतों पर चलेगी पार्टी

हालांकि, जहानाबाद सांसद अरुण कुमार पहले से ही जॉर्ज विचार मंच के जरिए एक समानांतर संगठन चला रहे हैं जिसके माध्यम से नई पार्टी का पूरे बिहार के भीतर संगठन खड़ा करने में मदद मिली है. उनकी तरफ से लगातार जनसंपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है. अभी हाल ही में उन्होंने उत्तर बिहार के सारण, सिवान, गोपालगंज के अलावा चंपारण क्षेत्र का दौरा किया है. अपनी संपर्क यात्रा के दौरान उनकी तरफ से लोगों की समस्या भी सुनी जा रही है. इस यात्रा का मूल मकसद नई पार्टी के लिए जमीन तैयार करना माना जा रहा है. लेकिन, उनकी तरफ से शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की समस्याओं को लेकर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है.

जॉर्ज फर्नांडिस को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले अरुण कुमार की कोशिश उनके सिद्धांतों पर ही पार्टी को आगे ले जाने की है. अरुण कुमार समता पार्टी के गठन के वक्त से ही जॉर्ज के साथ रहे हैं. लेकिन, अलग पार्टी बनाने के बावजूद उनकी पहली प्राथमिकता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला एनडीए ही होगा.

कितना बड़ा होगा एनडीए का कुनबा?

राष्ट्रीय समता पार्टी के भी एनडीए के साथ रहने पर एक और पार्टी अब बिहार में एनडीए के घटक के तौर पर सामने आ गई है. बीजेपी के अलावा नीतीश कुमार की जेडीयू, रामविलास पासवान की एलजेपी, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी पहले से ही एनडीए का हिस्सा है. उधर, मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव के संरक्षण में चलने वाली पार्टी जनाधिकार मोर्चा के भी एनडीए में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में आने वाले दिनों में एनडीए में बीजेपी के साथ सहयोगी दलों की कुल संख्या 5 से 6 भी हो सकती है. लेकिन, इस कुनबे के भीतर अंतरविरोध भी कम नहीं है. क्योंकि, कुशवाहा और कुमार में नहीं बनती है, तो दूसरी तरफ, नीतीश कुमार से भी इन दोनों की अदावत पहले से ही रही है. ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सीट बंटवारे के वक्त इतनी सारी पार्टियों को साधना और तालमेल बैठाना आसान नहीं होगा.

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