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राजस्थान: विश्वास को राज्यसभा के बजाए लोकसभा के रण में कौन ढकेलना चाहता है?

अब देखना है कि कुमार विश्वास राजनीति की इस पाठशाला में अपनी कविता अजमेर में सुनाएंगे या फिर राज्यसभा में या फिर गांव-गांव और शहर-शहर के उसी पुराने अंदाज में.

Updated On: Dec 26, 2017 05:11 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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राजस्थान: विश्वास को राज्यसभा के बजाए लोकसभा के रण में कौन ढकेलना चाहता है?

आम आदमी पार्टी के भीतर की कलह समय-समय पर और रुक-रुक कर बरसाती बुखार की तरह बाहर आती-जाती रहती है. एक बार फिर से पार्टी के कुछ नेताओं का तापमान दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के चुनाव को लेकर बढ़ गया है. अगले महीने दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में पार्टी के कई नेताओं की दावेदारी ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

पिछले काफी समय से यह बात सामने आ रही है कि पार्टी ने राज्यसभा के लिए तीन नामों में से दो पर तो लगभग सहमति बना ली है. पर, एक नाम पर अभी भी पेच फंसा हुआ है.

लेकिन, इधर कुछ दिनों से पार्टी के कुछ नेताओं की तरफ से एक नया नाम का सामने ले आना कुमार विश्वास की मुश्किलों और बढ़ा दिया है. ये नाम और किसी का नहीं है बल्कि पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल का है.

माना यह जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेताओं के द्वारा सुनीता केजरीवाल के नाम पर जबरदस्त तरीके से लामबंदी शुरू की जा चुकी है. पार्टी के इन नेताओं का कहना है कि अगर अरविंद केजरीवाल राज्यसभा जाने के लिए अपना मन बदलते हैं तो सुनीता केजरीवाल को राज्यसभा भेजें.

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पार्टी के एक नेता ने फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा, ‘कुछ बड़े नेताओं की इस बात को लेकर लगातार बैठकें हो रही हैं. बैठक में जिन नामों की चर्चा चल रही हैं, उनमें सुनीता केजरीवाल भी एक हैं. दो सीटों के नाम पर अभी तक आप नेता संजय सिंह और आशुतोष का नाम सबसे ऊपर चल रहा है.’

पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर अब कहा जा सकता है कि संजय सिंह और पत्रकार से नेता बने आशुतोष का राज्यसभा का टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है. लेकिन, पार्टी के एक नेता जिन पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, उनका टिकट अभी तक फाइनल नहीं हो पा रहा है. पार्टी का एक खेमा जो कुमार विश्वास के विरोधी गुट से संबंध रखता है, उसका मानना है कि कुमार विश्वास राजस्थान में पार्टी के प्रभारी हैं, इसलिए अजमेर लोकसभा सीट उपचुनाव में उनकी ही दावेदारी मजबूत बनती है.

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ऐसा कह कर उन नेताओं ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है. अगर कुमार विश्वास जीतते हैं तो वह लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे और दिल्ली के रोज-रोज के झमेले से आप को मुक्ति मिलेगी और अगर हारते हैं तो राज्यसभा सीट के लिए खुद ही उनकी दावेदारी कमजोर हो जाएगी. लेकिन, ये सब सिर्फ अभी हवा-हवाई ही है. क्योंकि अभी तक अजमेर सीट के उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग की तरफ से कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है.

आप के सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसमें खुद कुमार विश्वास भी नहीं चाहते हैं कि वह पार्टी के कुछ नेताओं के द्वारा बुने जाल में फंस कर अजमेर लोकसभा सीट का उपचुनाव लड़ जाएं. कुमार विश्वास बेशक पार्टी के राजस्थान प्रभारी हैं पर पार्टी की राजस्थान में जमीन का हिसाब-किताब कहां तक है, उसका उनको कोई अता-पता नहीं है. वह ऐसी जमीन पर फसल लगाने का रिस्क नहीं ले सकते हैं, जहां पर फसल लहलहाने की कोई गारंटी ही नहीं हो.

कुमार विश्वास को घेरने के लिए पार्टी के ही एक खेमे ने राजस्थान इकाई के कुछ नेताओं को दिल्ली बुलाकर दबाव की राजनीति की शुरुआत कर दी है. राजस्थान से आए इन नेताओं के द्वारा कुमार विश्वास को अजमेर लोकसभा उपचुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार बनाने की मांग जोर-शोर से की जा रही है. ताज्जुब की बात यह है कि यह मांग ऐसे समय में की जा रही है जब खुद कुमार विश्वास के द्वारा राज्यसभा के लिए अपनी उम्मीदवारी का ऐलान पिछले कई मौकों पर किया जा चुका है.

गौरतलब है कि बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री सांवर लाल जाट के निधन के बाद अजमेर सीट का उपचुनाव होने वाला है. सबसे बड़ी बात यह है कि अभी तक चुनाव आयोग ने अजमेर सीट के उपचुनाव के लिए कोई तारीख तय नहीं की है और कुमार विश्वास की आम आदमी पार्टी में उम्मीदवारी की बात भी शुरू हो गई है.

कुमार विश्वास के करीबी आप के एक नेता फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए पार्टी के भीतर कुमार के खिलाफ गहरी साजिश रची जा रही है. राजस्थान के कुछ नेताओं को दिल्ली बुलाकर जानबूझ कर तमाशा करवाया जा रहा है. यह सब इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उन्हें राज्यसभा का उम्मीदवार न बनाने का बहाना मिल जाए. एक ऐसे नेता को मोहरा बना कर यह सब करवाया जा रहा है, जिसे हाल ही में पार्टी में दोबारा शामिल किया गया है.’

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कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी में एक बार फिर से बवाल कटने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं. राजस्थान इकाई के कई नेताओं का दिल्ली में लगातार डेरा डालना और पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के सदस्यों से मिलने का वक्त मांगना इस ओर इशारा कर रहा है. पीएसी को ही यह निर्णय करने का अधिकार है कि किसको चुनाव लड़ाया जाए. लेकिन, ताजा घटनाक्रमों में राज्यसभा सीट पर कुमार विश्वास की दावेदारी को खत्म करने या कमजोर करने की कोशिश के तौर पर इन घटनाक्रमों को जोड़ कर देखा जा रहा है.

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राजस्थान से आए कुछ नेताओं का कहना है, ‘हम चाहते हैं कि कुमार विश्वास राजस्थान से चुनाव लड़ें. क्योंकि कुमार विश्वास की ससुराल भी राजस्थान में है और वह राजस्थान में काफी लोकप्रिय भी हैं. उन्होंने पूरे राज्य में अपनी कविता के जरिए गहरी छाप छोड़ी है. अब वह अजमेर सीट जीत कर राजस्थान की राजनीति में भी गहरी छाप छोड़ेंगे.

कुल मिलाकर अब यह तय हो गया है कि आप के ही कुछ नेताओं ने कुमार विश्वास को राजनीति की कविता का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया है. अब देखना है कि कुमार विश्वास राजनीति की इस पाठशाला में अपनी कविता अजमेर में सुनाएंगे या फिर राज्यसभा में या फिर गांव-गांव और शहर-शहर के उसी पुराने अंदाज में.

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