In association with
S M L

विश्वासघात के भंवर में कुमार का ‘विश्वास' क्या फिर रंग लाएगा?

आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और राजस्थान में पार्टी के प्रभारी कुमार विश्वास का आत्मविश्वास एक बार फिर से परवान चढ़ा है. कुमार विश्वास ने एक पोस्टर जारी कर अपना इरादा भी जाहिर कर दिया है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Nov 30, 2017 05:30 PM IST

0
विश्वासघात के भंवर में कुमार का ‘विश्वास' क्या फिर रंग लाएगा?

आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य और राजस्थान में पार्टी के प्रभारी कुमार विश्वास का आत्मविश्वास एक बार फिर से परवान चढ़ा है. कुमार विश्वास ने एक पोस्टर जारी कर अपना इरादा भी जाहिर कर दिया है. लेकिन, दूसरी तरफ कुमार विश्वास के एक कथित ऑडियो क्लीप सामने आने के बाद उनके आत्मविश्वास को झटका भी लगा है.

इस कथित ऑडियो क्लीप और पोस्टर ने पार्टी में एक बार फिर से संग्राम की स्थिति पैदा कर दी है. पार्टी में नेताओं की गोलबंदी का दौर शुरू हो गया है, पर कोई भी नेता इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से परहेज कर रहा है.

गौरतलब है कि बुधवार को ही कुमार विश्वास ने एक पोस्टर ट्वीट किया. इस पोस्टर में 3 दिसंबर को आम आदमी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुखातिब होने की जानकारी दी गई थी.

इसके कुछ ही देर के बाद कुमार विश्वास का एक कथित ऑडियो क्लीप भी सामने आया. 35 सेकेंड के इस ऑडियो क्लीप में कुमार विश्वास ने पार्टी नेताओं पर जमकर भड़ास निकाली है.

(ट्विटर पर ये ऑडियो क्लिप वायरल हो रही है. इसमें बोलने व्यक्ति की आवाज कुमार विश्वास से मिलती-जुलती लग रही है. लेकिन ये कुमार विश्वास की ही आवाज है, इसकी पुष्टी नहीं हुई है.)

समय-समय पर कुमार विश्वास का आत्मविश्वास बढ़ता-घटता रहता है. एक बार फिर से कुमार विश्वास ने जिस पोस्टर को खुद रिट्वीट किया है उसमें वह पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर के सामने खड़े दिख रहे हैं.

कुमार विश्वास के इस पोस्टर के पीछे कुछ और ही कहानी समझ में आ रही है. इस पोस्टर के सामने आने के बाद एक बार फिर से यह तय हो गया है कि आम आदमी पार्टी में अरविंद केजरीवाल को इकलौता चेहरा बनाए जाने को लेकर काफी असंतोष है.

हम आपको बता दें कि कुमार विश्वास के अलावा इस समय पार्टी में ऐसा कोई भी शख्स नहीं है जो अरविंद केजरीवाल को खुले तौर पर चुनौती दे सके. ऐसे में एक बार फिर से पार्टी के भीतर घमासान होने के आसार दिखने लगे हैं.

पोस्टर सामने आने के बाद मीडिया ने जब कुमार विश्वास से सवाल किया कि उन्होंने कार्यक्रम स्थल के लिए पार्टी मुख्यालय को ही क्यों चुना तो उनका कहना था, ‘मैं आप का संस्थापक सदस्य रहा हूं. इसलिए मुझे पार्टी ऑफिस में भी दूसरे नेताओं की तरह बैठक बुलाने का पूरा अधिकार है. क्योंकि मेरे पास दिल्ली में कोई अपना घर नहीं है. पार्टी के दूसरे बड़े-बड़े नेताओं को दिल्ली में अपना घर है और मैं अभी भी गाजियाबाद में ही रह रहा हूं. इसलिए कार्यकार्ताओं से मिलने के लिए इससे अच्छी जगह दूसरी नहीं हो सकती.’

आम आदमी पार्टी इस समय दो खेमे में बंटता दिखाई दे रही है. एक खेमा अरविंद केजरीवाल का है, जिसमें मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे नेता हैं जो खुले तौर पर अरविंद केजरीवाल के साथ हैं.

AAP foundation day

वहीं दूसरा खेमा कुमार विश्वास का है, जिसमें पार्टी का कोई बड़ा नेता फिलहाल सामने तो नहीं आ रहा है लेकिन, अंदर खाने से यही खबर है कि कुमार विश्वास को पार्टी के कई बड़े नेताओं और विधायकों का समर्थन प्राप्त है.

गौरतलब है कि पिछले रविवार को ही कुमार विश्वास ने अपना इरादा जाहिर कर दिया था. दिल्ली के रामलीला मैदान में पार्टी की स्थापना के पांच साल पूरे होने पर कुमार विश्वास ने पार्टी के काम-काज और तौर-तरीकों पर तीखे तंज कसे थे.

कुमार विश्वास ने अपने संबोधन में कहा था, ‘पार्टी आंदोलन से चल कर आई है. अगर किसी आंदोलन को खत्म करना है तो उसका कोई चेहरा बना दीजिए.' रामलीला मैदान के संबोधन में कुमार विश्वास ने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका संबोधन अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा.

कुमार विश्वास ने अपने भाषण में कहा, 'हमलोगों को जाना कहीं और था और हमलोग चले कहीं और आए हैं. पांच साल पहले जहां से हम निकले थे, उससे भटक गए हैं. हमलोगों को सही रास्ता ढूंढना होगा.’

खास बात यह है कि कुमार विश्वास ने पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में अन्ना हजारे को याद कर दूसरे नेताओं को चौंका दिया था. कुमार विश्वास ने कहा, ‘पार्टी के कुछ नेताओं ने अन्ना के बारे में बात नहीं की. हमको ये नहीं भूलना चाहिए कि साल 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में हमलोगों ने भाग लिया था और उसी से निकल कर यहां तक पहुंचे हैं. अन्ना हजारे हमारे उस अभियान के निर्माता थे.’

तस्वीर: अन्ना हजारे के फेसबुक वाल से

तस्वीर: अन्ना हजारे के फेसबुक वाल से

अब सवाल यह है कि क्या अरविंद केजरीवाल की शतरंज के बिसात में कुमार विश्वास पूरी तरह से घिर गए हैं या फिर उन्होंने अपने लिए एक नई बिसात तैयार की है.

खबर यह भी आ रही है कि अन्ना हजारे मार्च में एक बार फिर से आंदोलन की शुरुआत रामलीला मैदान से करने वाले हैं. दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल खेमा ने लगभग यह तय कर लिया है कि अगले साल दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटें पर होने वाले चुनाव में कुमार विश्वास का पत्ता साफ कर दिया जाएगा.

ऐसे में अंदर खाने यह भी चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि क्या कुमार विश्वास अन्ना आंदोलन के जरिए एक बार फिर से जनता का भरोसा जीतने वाले हैं?

फर्स्टपोस्ट हिंदी ने इन सभी मुद्दों पर अन्ना आंदोलन और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक प्रोफेसर आनंद कुमार से बात की तो उनका कहना था, ‘ देखिए आप इसको कई घटनाओं से जोड़ कर देख सकते हैं, पहली, आम आदमी पार्टी के धीरे-धीरे व्यक्तिवादी संगठन बनने में कुमार विश्वास का अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से कम हाथ नहीं है? कुमार विश्वास की अध्यक्षता में ही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकरिणी की बैठक में अनुचित तरीके से प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को निकाला गया था. इनकी मौजूदगी में ही राष्ट्रीय परिषद की बैठक में श्री शांति भूषण जी से लेकर चौधरी रमजान तक का अपमान हुआ था. हम सब को निकलाने का फरमान उन्होंने ही सुनाया.’

प्रो. आनंद कुमार आगे कहते हैं, ‘कुमार विश्वास भी उस षड्यंत्र में शामिल थे. मुठ्ठीभर लोगों ने दिल्ली की एतिहासिक जीत को एक छोटे से गिरोह की पूंजी बना लिया. अब कुमार विश्वास सत्ता की हिस्सेदारी मांग रहे हैं. राज्यसभा की सीट जरूर एक तात्कालिक कारण है. जहां तक अन्ना हजारे और कुमार विश्वास के द्वारा भ्रष्टाचार को लेकर नए जन आंदोलन की संभावना है तो देश की राजनीतिक सुधार की जरूरत है.

जनलोकपाल की भी जरूरत जरूर है. क्योंकि, मनमोहन सिंह के बाद मोदी जी ने भी देश को हताश किया है. मैं जरूर यह आशा करूंगा कि देश के सभी समाजवादी लोग एकजुट होकर इस लोकतंत्र को बचाने के लिए कुछ न कुछ जरूर करेंगे. एक जो आंदोलन अधूरा रह गया है उसको पूरा करने की हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है. सबसे अधिक जिम्मेदारी अन्ना हजारे जी की है.’

आम आदमी पार्टी में समय-समय पर असंतोष उभरते रहते हैं. पहले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण फिर कपिल मिश्रा का मामला इसका जीता जागता प्रमाण है. पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जिसने भी आवाज उठाने की कोशिश की वह आज पार्टी से बाहर है. ऐसे में एक बार फिर से कुमार विश्वास को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है. कुल मिलाकर देखें तो यह पार्टी के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं माने जा रहे हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
गणतंंत्र दिवस पर बेटियां दिखाएंगी कमाल!

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi