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भावांतर योजना से क्या उपचुनाव की नैया पार लगा पाएंगे शिवराज?

चुनावों से पहले एमपी के कुछ इलाकों में भारी बारिश और ओलावृष्टि की आड़ में सीएम शिवराज सिंह चौहान को किसानों को मुआवजा देने का भी मौका मिल गया है

Updated On: Feb 13, 2018 03:05 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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भावांतर योजना से क्या उपचुनाव की नैया पार लगा पाएंगे शिवराज?

मध्य प्रदेश के भोपाल और दूसरे कुछ जिलों में रविवार को तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि हुई. भोपाल में एक दिन बाद होने वाले किसान महासम्मेलन से ठीक पहले ओलावृष्टि और तूफान ने निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को राहत पहुंचाई है.

इस प्राकृतिक आपदा से चौहान को परेशान किसानों के साथ फिर से जुड़ने का मौका मिला है. साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी हुई है. इसके साथ ही उन्हें चुनावों से पहले प्राकृतिक आपदा की आड़ में किसानों को मुआवजा देने का भी मौका मिल गया है.

रविवार को तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, बैतूल, सतना, नरसिंहपुर समेत कुछ अन्य जिलों को अपनी जद में ले लिया. इससे रबी की फसल को नुकसान पहुंचा और चार लोगों की मौत हो गई.

बीमा क्लेम की राशि देने की घोषणा

चौहान ने तत्काल इस मौके को पकड़ा और इसका इस्तेमाल किसानों की समस्याओं को हल करने के जरिए के तौर पर किया. चौहान ने भोपाल में भेल के जमूरी मैदान में किसान महासम्मेलन में कहा, ‘संकट की घड़ी में नेता की पहचान होती है. मैं रोने वाला सीएम नहीं हूं. ओलावृष्टि और तूफान की चिंता मत कीजिए. मैं आपके साथ हूं और भरोसा दिलाता हूं कि किसान भाइयों को बीमा क्लेम के तौर पर राहत राशि मिलेगी.’

मध्यप्रदेश की कोलारस और मुंगावली असेंबली सीटों पर आने वाले उपचुनावों से पहले किसानों का गुस्सा कम करने और उनकी शिकायतों को दूर करने की यह एक कोशिश थी. इसके लिए राज्य सरकार ने किसानों की महारैली आयोजित की थी.

जून 2017 में राज्य में किसानों का हिंसक प्रदर्शन हुआ. मंदसौर जिला इस बड़े पैमाने पर हुई हिंसा का केंद्र बना. आज भी सरकार के तमाम वादों के बावजूद कोलारस और मुंगावली में किसानों में काफी गुस्सा नजर आ रहा है.

किसानों के लिए परिवर्तनकारी स्कीम

राज्य सरकार की भावांतर योजना, जिसे आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना कहा जाता है, को किसानों के लिए बड़ी परिवर्तनकारी स्कीम बताते हुए मुख्यमंत्री ने रैली में ही किसानों के बीच इसे लेकर रायशुमारी करा ली और ऐलान कर दिया कि भावांतर योजना जारी रहेगी. इस योजना के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और फसल के बाजार मूल्य का अंतर किसानों को चुकाने का वादा किया गया है.

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उन्होंने जोर दिया, ‘मुझे प्रधानमंत्री जी का आशीर्वाद हासिल है और कई राज्यों की टीमें भावांतर योजना की स्टडी करने के लिए यहां आ चुकी हैं.’ भावांतर योजना के अलावा सीएम ने अपने अगले ऐलान में काफी भावनाएं भी शामिल कीं और कहा कि सरकार किसानों के फायदे के लिए एक नया प्लान लाने पर विचार कर रही है.

तालियों की गड़गड़ाहट के बीच चौहान ने ऐलान किया, ‘अगर कोई किसान वेयरहाउस में एक लाख की फसल रखता है तो कोऑपरेटिव बैंक किसान को एडवांस के तौर पर 25,000 रुपये देगा और बाद में किसान अपनी फसल बेचकर बैंक का पैसा लौटा देगा. हालांकि, इस एडवांस पर ब्याज शिवराज चुकाएगा.’

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लेकिन पहले ही हुआ विवाद

लागू होने के बाद से ही भावांतर स्कीम को किसानों, कृषि विशेषज्ञों और राजनीतिक विरोधियों की ओर से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री रहे और नेशनल कमीशन फॉर फार्मर्स के पहले चेयरमैन सोमपाल शास्त्री ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘सरकार का किसानों को किया गया वादा कोरे झूठ जैसा है और इसका आने वाले चुनावों में असर दिखाई देगा. चाहे न्यूनतम समर्थन मूल्य हो या भावांतर योजना के तहत चुकाई जाने वाली रकम हो, इनका आंकलन गड़बड़ी से भरा है.’

सीपीआई(एम) की सेंट्रल कमेटी के सदस्य और ऑल इंडिया किसान सभा के जॉइंट सेक्रेटरी बादल सरोज ने कहा, ‘भावांतर योजना एक बड़ा फ्रॉड है क्योंकि इसमें किसानों को एमएसपी के बराबर अपनी फसल का दाम देने की गारंटी नहीं दी गई है. दूसरा, केवल ऑनलाइन रजिस्टर्ड किसान ही इस स्कीम के लिए योग्य होंगे, जबकि ऐसे किसानों की संख्या केवल 6.4 पर्सेंट है. मध्य प्रदेश सरकार को बजट में वित्त मंत्री के ऐलान को लागू करना चाहिए. इसमें उन्होंने फसल की लागत का 1.5 गुना पैसा बतौर एमएसपी देने का वादा किया है. इन ऐलानों के जरिए शिवराज सरकार उपचुनावों के पहले किसानों को लुभाना चाहती है. लेकिन, ऐसा नहीं होगा क्योंकि किसानों को अब और हल्के में नहीं लिया जा सकेगा.’

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दूसरी ओर, बीजेपी के एक पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को खुद को बचाने की एक सलाह दे डाली. उन्होंने कहा कि अगर किसान हर रोज एक घंटे हनुमान चालीसा का जाप करेंगे तो इससे उन्हें इस तरह की आपदाओं का सामना करने की ताकत मिलेगी.

एमपी में कृषि राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार ने सक्सेना के बयान का समर्थन किया और कहा, ‘इसमें गलत क्या है?’ अगर हनुमान चालीसा का जाप करने से किसानों को मदद मिलती है तो यह आने वाले उपचुनावों में शिवराज सिंह चौहान के लिए भी उतना ही मददगार साबित हो सकता है. अब केवल वक्त ही बताएगा कि कौन सी चीज कितनी असरदार है- हनुमान चालीसा का पाठ या भावांतर योजना.

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