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किसान क्रांति यात्रा: दिल्ली में घुसने के सारे रास्ते सील, भारी पुलिस बल तैनात

मंगलवार सुबह से यूपी गेट पर दिल्ली में घुसने के सारे रास्ते सील कर दिए गए हैं. पुलिस के अलावा पैरामिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया गया है

Updated On: Oct 02, 2018 09:04 AM IST

FP Staff

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किसान क्रांति यात्रा: दिल्ली में घुसने के सारे रास्ते सील, भारी पुलिस बल तैनात

दिल्ली और यूपी पुलिस ने किसान क्रांति यात्रा को रोकने की पूरी तैयारी कर ली है. हरिद्वार से शुरू हुई इस क्रांति यात्रा को रोकने के लिए मंगलवार सुबह से यूपी गेट पर दिल्ली में घुसने के सारे रास्ते सील कर दिए गए हैं. पुलिस के अलावा पैरामिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया गया है.

नोएडा और गाजियाबाद का भी यही हाल है. सोमवार रात को सीएम योगी आदित्यनाथ से हुई किसानों की बातचीत सफल न हो सकी. दरअसल भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले हजारों किसान अपनी मांगों के साथ 2 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेंगे.

किसानों की मांग है कि साल 2014 में मोदी सरकार बनने से पहले बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में जो वादे किए थे, उन वादों को पूरा करे. बीते 23 सितंबर को ही उत्तराखंड के हरिद्वार से भारतीय किसान यूनियन ने किसान क्रांति यात्रा की शुरुआत की थी. यह किसान क्रांति यात्रा सोमवार को गाजियाबाद पहुंची थी और मंगलवार को इसे दिल्ली पहुंचना है.

किसान अपनी 9 सूत्री मांगों को लेकर दिल्ली कूच पर अडिग हैं. किसानों की प्रमुख मांगों में स्वामीनाथन कमेटी के फॉर्मूले के आधार पर किसानों की आय सी-2 लागत में कम से कम 50 प्रतिशत जोड़ कर दिया जाए साथ ही सभी फसलों की शत-प्रतिशत खरीद की गारंटी दी जाए.

पिछले 10 सालों में आत्महत्या करने वाले लगभग 3 लाख किसानों के परिवार को मुआवजा के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए. किसानों को सभी प्रकार के कर्ज से पूरी तरह माफ कर दिया जाए. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव किया जाए.

इस योजना में किसानों को लाभ मिलने के बजाए बीमा कंपनियों को लाभ मिल रहा है. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए. दिल्ली-एनसीआर में दस साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टरों पर रोक हटा दी जाए.

किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बिना ब्याज लोन दिया जाए. महिला किसानों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना अलग से बनाई जाए. चीनी का न्यूनतम मूल्य 40 रुपए प्रति किलो किया जाए और 7 से 10 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान सुनश्चित किया जाए. आवारा पशुओं से किसानों के फसल को बचाने का इंतजाम किया जाए.

किसानों का साफ कहना है कि सरकार उनकी बातों को नहीं सुन रही है. किसान क्रांति यात्रा की अगुवाई करने वाले राकेश टिकैत ने फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा था, 'केंद्र सरकार और राज्य सरकारें भी किसानों को कमजोर और लाचार न समझें.'

'बीजेपी ने किसानों के लिए जो घोषणापत्र जारी किया था उसको आज तक लागू नहीं किया है. केंद्र सरकार की नीतियों के कारण ही देश के लाखों किसान आत्महत्या कर रहे हैं. अगर हमारी 9 जो प्रमुख मांगे हैं वह नहीं मानी गई तो देश में बड़ा किसान आंदोलन होगा जो आजतक नहीं हुआ है.'

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