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केरल से कोच फैक्ट्री हटाने के खिलाफ सीएम विजयन ने दिल्ली में किया प्रदर्शन

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोच फैक्टरी खोल सकते हैं लेकिन केरल में नहीं. यह सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे का शासन है

Updated On: Jun 22, 2018 04:49 PM IST

Bhasha

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केरल से कोच फैक्ट्री हटाने के खिलाफ सीएम विजयन ने दिल्ली में किया प्रदर्शन

केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन और राज्य के वामपंथी सांसदों ने पलक्कड़ जिले में रेल कोच फैक्टरी की स्थापना का प्रस्ताव वापस लेने के केंद्र के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को दिल्ली के रेल भवन के बाहर प्रदर्शन किया.

मुख्यमंत्री ने केंद्र पर केरल के लोगों को ‘दंडित’ करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की हुकूमत होने की वजह से केंद्र ने यह फैसला किया है.

विजयन ने कहा कि केरल में फिलहाल जिन कोचों का इस्तेमाल हो रहा है, वे पुराने हो गए हैं. केंद्र ने निर्णय किया है कि पलक्कड़ में कोच फैक्टरी की जरूरत नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि वे हरियाणा में उसे खोलने पर राजी हो गए हैं.

पीयूष गोयल बीजेपी शासित राज्यों में लगाना चाहते हैं कोच फैक्ट्री

उन्होंने बताया कि रेल मंत्री पीयूष गोयल ने हाल में कहा था कि उनके मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश में कोच फैक्टरी के लिए भूमि मांगी है. गोयल ने हाल में कहा था कि केंद्र की केरल में 550 करोड़ रुपये लागत से बनने वाली रेल कोच फैक्टरी के तुरंत निर्माण की कोई योजना नहीं है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोच फैक्टरी खोल सकते हैं लेकिन केरल में नहीं. यह सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे का शासन है जबकि दो अन्य राज्यों में बीजेपी की सरकार है.

लोकतांत्रिक देश में इस तरह काम नहीं होना चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या इस तरह से किसी लोकतांत्रिक देश को काम करना चाहिए? क्या यह केरल के लोगों को सजा देने के समान नहीं है? क्या यह देश के संघीय ढांचे के अनुरूप है? यह दिखाता है कि केंद्र लोकतांत्रिक तौर तरीकों को नहीं मानता है.

प्रदर्शन में वामपंथी सांसदों में पलक्कड़ के सांसद एमबी राजेश, इडुक्की के सांसद जॉइस जॉर्ज, पय्यनूर के सांसद पीके श्रीमति, राज्यसभा सदस्य ई करीम और केके रागेश ने हिस्सा लिया. प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे विजयन ने कहा कि यह मुद्दा बताता है कि केंद्र राज्य के साथ कैसा व्यवहार करता है. उन्होंने मांग की कि गोयल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मामले में दखल देना चाहिए.

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