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केजरीवाल Vs अंशु प्रकाश: क्या दिल्ली में जो हो रहा है वो लोकतंत्र के लिए ठीक है?

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस का नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या वाकई में दिल्ली के सीएम की औकात एक पुलिस कमिश्नर से भी कम है?

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: May 16, 2018 10:30 PM IST

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केजरीवाल Vs अंशु प्रकाश: क्या दिल्ली में जो हो रहा है वो लोकतंत्र के लिए ठीक है?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही हैं. दिल्ली पुलिस ने चीफ सेक्रेटरी अंशु प्रकाश के साथ मारपीट और बदसलूकी मामले में अरविंद केजरीवाल से 18 मई को पूछताछ के लिए बुलाया है. दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कहा है कि अरविंद केजरीवाल को इस संबंध में नोटिस भेजा गया है. दिल्ली पुलिस के आलाधिकारी शुक्रवार सुबह 11 बजे दिल्ली पुलिस मुख्यालय में सीएम अरविंद केजरीवाल से पूछताछ करेंगे.

बता दें कि दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि 19 फरवरी की आधी रात को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में आप के दो विधायकों ने कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की थी. दिल्ली के राजनीतिक इतिहास में शायद पहली बार किसी सीएम को दिल्ली पुलिस ने तलब किया है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को दिल्ली पुलिस का नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या वाकई में दिल्ली के सीएम की औकात एक पुलिस कमिश्नर से भी कम है?

इस घटना के सामने आने के बाद देशभर के आईएएस एसोसिएशनों ने अंशु प्रकाश के साथ हुई बदसलूकी को लेकर अरविंद केजरीवाल की आलोचना की थी. आईएएस अफसरों के एसोसिएशनों का साफ कहना था कि उन्हें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के लिखित माफीनामे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है, लेकिन अरविंद केजरीवाल ने इस मसले पर माफीनामा लिखने से साफ इंकार कर दिया था.

आप विधायकों के द्वारा मुख्य सचिव के साथ मारपीट मामले में तब नया मोड़ आया था, जब सीएम के एडवाइजर वीके जैन अचानक ही सरकारी गवाह बन गए. वीके जैन इस घटना के प्रमुख गवाह बताए जाते हैं. घटना के वक्त वीके जैन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार थे. वीके जैन यूटी कैडर के एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं. दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल और वीके जैन को आमने-सामने बैठा कर दिल्ली पुलिस पूछताछ करेगी.

arvind kejriwal

दिलचस्प बात यह है कि वीके जैन मुख्य तौर पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की सभी फाइलें देखने के साथ उनकी मीटिंग और अधिकारियों के साथ समन्वय का काम करते थे. इसके अलावा वीके जैन दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेशन का काम भी करते थे.

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों प्रकाश जरवाल और अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार भी किया था. दोनों विधायक इस समय जमानत पर बाहर हैं. दिल्ली पुलिस अरविंद केजरीवाल से पहले उनके निजी सचिव बिभव कुमार से भी इस बारे में पूछताछ कर चुकी है. दिल्ली पुलिस अब तक आप के 11 विधायकों से भी पूछताछ कर चुकी है.

आपको बता दें कि इस घटना के बाद कर्मचारियों के संयुक्त फोरम ने भी दिल्ली के एलजी अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस से अपील की थी कि इस कथित हाथापाई मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर भी कार्रवाई की जाए.

इस घटना के कुछ ही दिनों बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष ने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर से मुलाकात की थी. आप के इन नेताओं ने पुलिस आयुक्त को एक पत्र सौंपा था, जिसमें दिल्ली सचिवालय में दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन, डीडीसी के वायस चेयरमैन आशीष खेतान और उनके कुछ सहयोगियों पर हुए हमले के मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी.

आम आदमी पार्टी का इस घटना के बाद लगातार यह कह रही थी कि मुख्य सचिव द्वारा आम आदमी पार्टी के विधायकों के खिलाफ की गई एक ऐसी शिकायत पर पुलिस जरूरत से ज्यादा सक्रिय होकर कार्रवाई कर रही है. आम आदमी पार्टी का साफ कहना था कि इस घटना का कोई सबूत मौजूद नहीं है. हमारे विधायकों को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया और मुख्यमंत्री के घर पर पुलिस ने छापेमारी तक कर दी. वहीं दूसरी तरफ दिल्ली सचिवालय में दिल्ली सरकार के मंत्री और दूसरे लोगों पर हुए हमले में सारे सबूत होने के बावजूद भी दिल्ली पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, ऐसा करना पुलिस की दो तरह की न्याय प्रणाली की तरफ इशारा करता है.

anshu prakash

इस घटना के सामने आने के बाद कम ही मौके पर मुख्य सचिव और सीएम का आमना-सामना हुआ है. मार्च महीने में ही दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विधानसभा के बजट सत्र की तारीखों को अंतिम रूप देने के लिए हुई बैठक में भाग लिया था. थप्पड़कांड के बाद दोनों की यह पहली मुलाकात थी. कैबिनेट की इस बैठक में दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र 16 मार्च से 28 मार्च तक किए जाने का फैसला लिया गया था.

कैबिनेट की इस बैठक में अरविंद केजरीवाल और अंशु प्रकाश पास-पास रहते हुए भी दूर-दूर नजर आए थे. दोनों के बीच सिर्फ कैबिनेट मीटिंग से संबंधित मसले पर ही चर्चा हुई थी. बैठक से ठीक पहले मुख्य सचिव ने अपनी सुरक्षा को लेकर अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखा था, जिसके बाद बैठक स्थल के पास दिल्ली पुलिस की तैनाती की गई थी.

कुलमिलाकर पिछले काफी दिनों के बाद कई नाटकीय घटनाक्रम के बाद अब अरविंद केजरीवाल से दिल्ली पुलिस पूछताछ करने वाली है. किसी राज्य की या किसी केंद्रशासित प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की भी एक अलग गरिमा होती है. जनता द्वारा चुने गए नेता को भी चाहिए कि वह पद की गरिमा को बनाए रखे और पुलिस को भी चाहिए कि वह संविधान के द्वारा बनाए गए मुख्यमंत्री पद की इज्जत करे, लेकिन देश की राजधानी में दिल्ली में जो कुछ हो रहा है वह वाकई में लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं कह सकते?

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