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केजरीवाल ये भी तो बताएं कि 2019 में वो कितनी सीटें जीत रहे हैं ?

केजरीवाल ये जरूर सोचेंगे कि क्या उन्होंने ट्वीट करने में जल्दबाजी कर दी या फिर उनसे गलती हो गई या फिर उन्हें अपने ट्वीट में सिर्फ मुद्दों की बात करनी चाहिए थी

Updated On: Feb 05, 2018 07:23 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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केजरीवाल ये भी तो बताएं कि 2019 में वो कितनी सीटें जीत रहे हैं ?

क्या साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 215 सीटें से कम सीटें मिलेंगी? दरअसल ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी भविष्यवाणी की है. बीजेपी के परफॉर्मेंस पर किसी चुनाव विशेषज्ञ की तरह केजरीवाल ने ऐसा ट्वीट किया है. लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि उनकी आम आदमी पार्टी को लोकसभा चुनाव में कितनी सीटें मिलेंगी. हालांकि इससे पहले वो पंजाब, गोवा और गुजरात के लिए भी भविष्यवाणी कर चुके हैं. लेकिन नतीजों ने हर जगह निराश ही किया है.

जिस पंजाब ने आम आदमी पार्टी को लोकसभा में प्रतिनिधित्व दिया उसी पंजाब में विधानसभा चुनाव की हार ने सारे अनुमानों की जमानत जब्त करा दी थी. कुछ ऐसा ही ट्वीट केजरीवाल ने गुजरात के लिए भी किया था. उन्होंने कहा था कि गुजरात में आम आदमी पार्टी बदलाव की हवा चलाएगी. लेकिन नतीजों के तूफान में आप कहां उड़ गई ये पता नहीं चला.

अब केजरीवाल ये अनुमान लगा रहे हैं कि बीजेपी को 215 सीटों से कम मिलेंगी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘पिछले कुछ दिनों में कई लोगों से मिला, सभी लोगों के इस बात को लेकर सहमति है कि बीजेपी 215 से कम सीटें पा रही है, बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है, युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित है, मिडिल क्लास का बीजेपी से पूरी तरह से मोह भंग हो चुका है.’

INDIA-POLITICS-AAP

ये समझ से परे है कि इस ट्वीट के जरिए वो किसे क्या संदेश दे रहे हैं? एक तरफ वो ये कह रहे हैं कि आज बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है और मिडिल क्लास का बीजेपी से मोह भंग हो चुका है तो वहीं दूसरी तरफ वो बीजेपी को 200 से ज्यादा सीटें भी जिता रहे हैं.

लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा 272 है. ऐसे में अगर अकेले बीजेपी को 215 सीटें मिलती हैं तो भी एनडीए की सरकार बनना तय है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 282 सीटें मिली थीं जबकि एनडीए ने कुल 336 सीटें हासिल की थीं. ऐसा लगता है कि केजरीवाल अभी से अपनी पार्टी की हार मानते हुए ये स्वीकार कर रहे हैं कि साल 2019 में भी मोदी मैजिक फिर से दिखाई देगा.

केजरीवाल एक तरफ आरोप भी लगा रहे हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी की सरकार भी बनवा रहे हैं. वो ये मानते हैं कि इतने सारे मुद्दों के बावजूद 215 से कम सीटें आएंगी यानी ये संदेश भी दे रहे हैं कि लोगों के पास 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है.

NEW DELHI, INDIA- JULY 2: Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal during an interaction program with a gathering of principals and teachers at Delhi Secretariat on July 2, 2015 in New Delhi, India. former president APJ Abdul Kalam called for a review of syllabi in universities and senior secondary schools to make the education system more skill-oriented. (Photo by Sonu Mehta/Hindustan Times via Getty Images)

मोदी सरकार का कार्यकाल मई 2019 में खत्म हो रहा है. ऐसे में मई से पहले लोकसभा चुनाव होने ही हैं. हालांकि लोकसभा में बजट अभिभाषण के वक्त राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक देश एक चुनाव की वकालत की थी. ऐसे में ये भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि समय से पहले लोकसभा चुनाव हो सकते हैं. हालांकि इसकी संभावना बेहद कम है क्योंकि मोदी सरकार चाहेगी कि ज्यादा से ज्यादा वक्त सत्ता में रह कर अधूरे छूट रहे कामों को पूरा किया जाए ताकि वो जमीनी स्तर पर दिखाई भी पड़ें. क्योंकि चुनाव की घोषणा के बाद आचार संहिता के चलते विकास के काम प्रभावित हो जाते हैं.

ऐसे में अगले साल अप्रैल में ही लोकसभा चुनाव की व्यवहारिकता दिखाई देती है और राजनीति भी यही आकलन कर रही है. लेकिन केजरीवाल जिस तरह से बीजेपी को दो सौ सीटें दिलाने की भविष्यवाणी कर रहे हैं उससे बीजेपी की मजबूत स्थिति ही दिखाई देती है. इस बहाने ही सही केजरीवाल की भविष्यवाणी ने बीजेपी को राजस्थान के उपचुनाव में मिली हार को भुलाने का मौका दे दिया है.

आम चुनाव में एक साल का वक्त बाकी है. ऐसे में बीजेपी की कोशिश रहेगी कि वो केजरीवाल के अनुमान से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश करे और उसके सांसद जनता के बीच अभी से जाकर ये भी पता लगाएं कि कमी कहां कहां हो रही है.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों का बीजेपी ब्लूप्रिंट तैयार कर चुकी है. पार्टी अध्यक्ष ने मिशन 350+ का टारगेट रखा है. उत्तर-पूर्वी राज्यों से लेकर दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल तक में बीजेपी की स्थिति में सुधार आता जा रहा है. यूपी, उत्तराखंड और गुजरात में मिली जीत से हौसले बुलंद हैं.

Amit Shah

लेकिन बीजेपी के गिरेबान में झांकने वाली आम आदमी पार्टी की भी लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियों पर सवाल उठता है. पिछले लोकसभा चुनाव में ‘आप’ की लहर ‘मोदी समर्थन’ के सैलाब में खो गई थी. बनारस में मोदी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने चुनाव लड़कर अपनी और पार्टी की ही किरकिरी कराई थी. इस बार केजरीवाल का लोकसभा चुनाव को लेकर क्या मास्टर-प्लान है?

वैसे भी 20 विधायकों के निलंबन के बाद आम आदमी पार्टी के हालात राजनीति में यू-टर्न जैसे हो गए हैं.

अगर उप चुनाव होते हैं तो केजरीवाल अपने विधायकों के समर्थन के लिए कौन से मुद्दे लेकर दिल्ली की जनता के पास जाएंगे?

वहीं दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी के पास कोई चेहरा नहीं दिखाई नहीं देता है. क्या एक बार फिर अरविंद केजरीवाल लोकसभा के समर में उतरने का जज्बा दिखा सकेंगे? जाहिर तौर पर बिल्कुल भी नहीं. पिछली गलतियों की माफी वो दिल्ली की जनता से मांग चुके हैं. इस बार आप विधायकों के लाभ के पद के मामले में वो कोर्ट में सफाई देने की तैयारियों में जुटे हुए हैं. ऐसे में लोकसभा चुनावों को लेकर आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल कोई ठोस प्लान नहीं दिखाई देता है.

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पार्टी के भीतर ढाई साल में इतने एपिसोड हो चुके हैं कि पार्टी क्लाइमेक्स के दौर से गुजर रही है. पुराने वो साथी जिन्होंने आम आदमी पार्टी को खड़ा किया और जो रणनीतिक विशेषज्ञ थे, वो अब बाहर से दर्शक हैं. जो कभी केजरीवाल एंड टीम के कोर ग्रुप में होते थे उन्हें साइड लाइन कर दिया गया है. पार्टी के भीतर ही लोगों में डर दिखाई देता है कि कहीं वो भी ‘कुमार विश्वास’ न बन जाएं.

ऐसे में लोकसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी खुद को कैसे तैयार करेगी ये देखने वाली बात होगी. फिलहाल केजरीवाल ये जरूर सोचेंगे कि क्या उन्होंने ट्वीट करने में जल्दबाजी कर दी या फिर उनसे गलती हो गई या फिर उन्हें अपने ट्वीट में सिर्फ मुद्दों की बात करनी चाहिए थी.

 

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