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J&K डिप्टी सीएम ने कठुआ गैंगरेप को मामूली बताकर राजनीति में 'बेहूदगी' का नया रिकॉर्ड बना दिया है

अगर इन नेताओं को ऐसे अपराधों को मामूली लगते हैं तो ये अपराधियों को सजा क्या दिलवाएंगे?

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha Updated On: May 01, 2018 03:30 PM IST

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J&K डिप्टी सीएम ने कठुआ गैंगरेप को मामूली बताकर राजनीति में 'बेहूदगी' का नया रिकॉर्ड बना दिया है

Rape = End Of Life = 'NOT A MINOR ONE' THING

अगर आप एक लड़की हैं तो सड़क पर चलते हुए छेड़खानी की एक घटना भी आपके लिए सदमा पहुंचाने वाली हो सकती है और रेप की तो बात भी दिल दहलाने वाली है. लेकिन अगर 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप जैसे भयानक जुर्म को एक डिप्टी सीएम मामूली घटना बता दें तो इससे ज्यादा अमानवीय और असंवेदनशील कुछ नहीं हो सकता.

सोमवार को जम्मू-कश्मीर के बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सत्ता में बीजेपी के कोटे से कविंदर गुप्ता को डिप्टी सीएम बनाया गया. रविवार को डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. कविंदर गुप्ता जम्मू-कश्मीर असेंबली में पिछले तीन सालों से स्पीकर थे अब उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया है. लेकिन पद संभालने के कुछ घंटों बाद ही गुप्ता ने शर्मनाक बयान दे दिया.

आखिर किस चीज को गंभीरता से लेंगे ये नेता?

मीडिया से बातचीत के दौरान कठुआ मामले पर पूछे गए सवाल पर उनका कहना था, 'ये बहुत मामूली मामला है. (a minor one) इसे तूल नहीं दिया जाना चाहिए.' एक बच्ची के साथ इतनी बर्बरता की देश-दुनिया में निंदा हुई, वो केस उपमुख्यमंत्री को मामूली लगता है. जिस केस पर बवाल होने के बाद केंद्र सरकार पॉक्सो एक्ट में संशोधन करने का अध्यादेश ले आई, वो मामला कविंदर गुप्ता को मामूली लगता है.

उपमुख्यमंत्री जी! अगर किसी के साथ रेप करके उसके हाथ-पैर तोड़कर, सिर कुचलकर जंगल में फेंक दिया जाए, तो ये मामूली मामला नहीं होता, न ही इसे होना चाहिए. क्या जब आप ये बात कह रहे थे तो आपने एक बार भी ये सोचा कि आप क्या कह रहे हैं? अगर आपके लिए ये एक मामूली घटना है तो आखिर ऐसा कौन सा पहाड़ टूटेगा, जब आपको लगेगा कि अब तो मामला सीरियस हो गया?

एसआईटी जांच के बावजूद सीबीआई जांच ने शुरू किया बवाल

वैसे कविंदर गुप्ता के इस बयान पर हैरानी नहीं होनी चाहिए, उनका इस मामले में क्या रुख होगा, ये इसी बात से साफ हो जाना चाहिए कि वो आरोपियों के समर्थन में निकली रैली में शामिल हुए थे. ये हास्यास्पद ही है कि उस रैली में शामिल हुए दो अन्य बीजेपी नेताओं को पार्टी से इस्तीफा देना पड़ा लेकिन अब उसी रैली में शामिल हुए कविंदर गुप्ता को डिप्टी सीएम और कठुआ के विधायक राजीव जसरौटिया को कैबिनेट में शामिल किया गया है. ये दोनों मंत्री उस रैली में हिंदू एकता मंच के तहत शामिल हुए थे.

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जनवरी में हुए कठुआ गैंगरेप की एसआईटी जांच कराई गई थी, जिसमें 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसके बाद कुछ हिंदूवादी संगठन और जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन के वकील सीबीआई जांच की मांग करते हुए सड़क पर उतर गए और इस रैली में तिरंगा लहराए गए और जय श्री राम के जयकारे लगाए गए. लेकिन इसी रैली में बीजेपी के नेता भी शामिल हुए, जिनमें कविंदर सिंह भी थे. उनमें से दो मंत्री सरकार में मंत्री थे, इसलिए बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया लेकिन अब उसी रैली में शामिल नेताओं को पद दिए जाने का तुक समझ नहीं आता.

कविंदर गुप्ता भी रैली में शामिल थे

जम्मू कश्मीर में कठुआ रेप पर हुई राजनीति हैरान करने वाली है. पूरा सीक्वेंस राजनीति की गैरसंवेदनशील रवैया सामने रख देता है. अब जरा देखिए हुआ क्या है. कश्मीर की राजनीति में कठुआ रेप पर हुई उठापटक के बाद कैबिनेट में फेरबदल का फैसला लिया गया. कैबिनेट में बदलाव के एक दिन पहले डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद ये खबर आई कि बीजेपी ने उन्हें इसलिए डिमोट किया है क्योंकि कठुआ रेप पर उन्होंने मेहबूबा मुफ्ती के नजरिए का समर्थन किया था. निर्मल सिंह ने सीएम मेहबूबा मुफ्ती के कठुआ रेप में एसआईटी जांच पर भरोसे का समर्थन किया था.

इसके बाद खबर आई कि निर्मल सिंह ने इस्तीफा दे दिया है और विधानसभा स्पीकर कविंदर गुप्ता को डिप्टी सीएम बनाया जा रहा है. इस ऐलान के साथ ही एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें कविंदर गुप्ता हिंदू एकता मंच की उस रैली में दिख रहे थे, जो कठुआ रेप के आरोपियों को बचाने के लिए बुलाई गई थी. यानी जिस रैली में शामिल होने की वजह से बीजेपी के दो मंत्रियों को अपने मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा. उसी रैली में शामिल एक नेता को प्रमोट करके डिप्टी सीएम बना दिया गया. ये अजीबोगरीब विरोधाभासी राजनीति है. और फिर इतना कुछ होने के बाद डिप्टी सीएम पद की शपथ लेते ही कविंदर गुप्ता का कठुआ रेप को मामूली बताना. राजनीतिक फायदे के लिए बयानबाजी करना एक बात है. लेकिन रेप के एक वीभत्स मामले को मामूली बता देना इंसानियत के नाते से शर्मसार करने वाला मामला होना चाहिए.

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अपराधियों को सजा क्या दिलवाएंगे?

समस्या बस बयान में नहीं है. समस्या यहां है कि रेप के आरोपियों के समर्थन में रैली निकाली जा सकती है और फिर राजनीतिक पार्टियों के सदस्य इनमें शामिल हो सकते हैं और उनको संवैधानिक पद भी दिया जा सकता है. आखिर इतनी असंवेदनशीलता दिखाने वाले नेताओं को ये क्यों नहीं समझ आता कि रेप जैसे मामले मामूली नहीं होते. किसी की इज्जत लूटकर, उसकी अस्मिता छीनकर मरने के लिए छोड़ देना मामूली नहीं होता. अगर ये ऐसे अपराधों को मामूली मानते हैं तो अपराधियों को सजा क्या दिलवाएंगे?

किसी भी लड़की को मानसिक या शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का कैसा असर होता है, ये शब्दों में बताना बहुत मुश्किल है. किसी दूसरे की हैवानियत और धोखाधड़ी के नतीजे झेलना आसान नहीं होता. अगर किसी लड़की के साथ रेप हो जाए या उसके ऊपर एसिड फेंक दिया जाए, तो उसे बस दो ही रास्ते दिखाई देते हैं, या तो वो जिंदगी भर किसी हैवान के अपराध के लिए खुद को कोसती रहे और समाज से मुंह चुराती रहे या अपनी जिंदगी खत्म कर ले, तो फिर डिप्टी सीएम कविंदर गुप्ता को समझ लेना चाहिए कि रेप के मामले मामूली नहीं होते. और उनको तूल दिया जाना चाहिए क्योंकि अगर उन्हें तूल नहीं दिया जाएगा तो शायद दोषियों को सजा भी नहीं हो पाएगी और रेप पीड़िताओं की किस्मत कभी नहीं बदल पाएगी.

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