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करतारपुर कॉरिडोर: भारत की पाकिस्तान को खरी-खरी, बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, 'पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर पर सकारात्मक रूख दिखाने का यह मतलब नहीं कि इसे लेकर द्विपक्षीय बातचीत शुरू होगी. आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते'

Updated On: Nov 28, 2018 02:32 PM IST

FP Staff

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करतारपुर कॉरिडोर: भारत की पाकिस्तान को खरी-खरी, बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते

करतारपुर कॉरिडोर मुद्दे पर सकारात्मक रूख दिखाने के बाद भी भारत ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता को लेकर अपने रूख में कोई परिवर्तन नहीं किया है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने फिर दोहराया कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते.

सुषमा ने बुधवार को कहा, 'भारत पिछले कई वर्षों से करतारपुर कॉरिडोर निर्माण के लिए कह रहा था, लेकिन पाकिस्तान ने अब जाकर इस पर सकारात्मक रूख (पॉजीटिव रिस्पांस) दिखाया है. मगर इसका यह मतलब नहीं कि इसे लेकर द्विपक्षीय बातचीत शुरू होगी. आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते.'

पंजाब सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू में शामिल होने के लिए पाकिस्तान में हैं. वो मंगलवार को वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में दाखिल हुए थे. आज यानी बुधवार को पाकिस्तानी पीएम इमरान खान यहां नरोवल जिले में करतारपुर कॉरिडोर बनाने की नींव रखेंगे.

केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर, हरदीप सिंह पुरी भी गए हैं पाकिस्तान

सिद्धू के अलावा इसमें शामिल होने के लिए केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी भी पाकिस्तान गए हैं. बुधवार को रवाना होने से पहले पुरी ने करतार कॉरिडोर निर्माण में सहयोग के लिए पाकिस्तान सरकार का आभार जताया.

पाकिस्तान ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी न्योता भेजा था. मगर दोनों ने विभिन्न कारणों से इसमें शरीक होने से असमर्थता जताई थी.

26 नवंबर को उपराष्ट्रपति ने भारतीय पंजाब में रखी थी आधारशिला

बता दें कि सोमवार को पंजाब के गुरदासपुर में उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भारत की तरफ से करतारपुर कॉरिडोर बनाने के लिए नींव रखी थी.

केंद्र सरकार ने 22 नवंबर को अगले साल होने वाले गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर कॉरिडोर निर्माण का फैसला किया था. भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी उसी दिन यह घोषणा की थी कि प्रधानमंत्री इमरान खान 28 नवंबर को अपने क्षेत्र में इस कॉरिडोर के बनने की आधारशिला रखेंगे.

सिखों के पहले धर्म गुरु नानक देव ने अपने जीवन के 18 वर्ष करतारपुर साहिब में बिताए थे

सिखों के पहले धर्म गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष करतारपुर साहिब में बिताए थे

करतारपुर साहिब की अहमियत

करतारपुर साहिब वो जगह है, जहां 1539 ईं. में सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव के निधन के बाद पवित्र गुरुद्वारे का निर्माण करवाया गया था. इस जगह की अहमियत इसलिए है क्योंकि यहां गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 साल बिताए थे.

पाकिस्तान ने गुरु नानक की 549वीं जयंती के अवसर पर नवंबर में 3800 सिख श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया था. करतारपुर कॉरिडोर बन जाने से लाखों सिख श्रद्धालु पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर में मत्था टेक सकेंगे.

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