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कर्नाटक चुनाव देश का पहला 'वॉट्सऐप इलेक्शन': विदेशी मीडिया

वॉट्सऐप का कहना है कि पिछले कुछ वक्त से राजनीतिक पार्टियां वॉट्सऐप के जरिए लोगों को ऑर्गनाइज करने की कोशिश कर रही हैं

FP Staff Updated On: May 15, 2018 05:27 PM IST

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कर्नाटक चुनाव देश का पहला 'वॉट्सऐप इलेक्शन': विदेशी मीडिया

फेक न्यूज को लेकर अकसर सुर्खियों में रहने वाला वॉट्सऐप फिर चर्चा में हैं. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वॉट्सऐप की भूमिका पर विदेशी मीडिया ने इस चुनाव को देश का पहला वॉट्सऐप इलेक्शन कहा है.

एनडीटीवी पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि अब आप बहस और रैलियों को भूल जाइए, भारत में अब चुनाव वॉटस्ऐप पर लड़ा और जीता जा रहा है. कर्नाटक में चुनाव के दौरान दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने दावा किया था कि उनकी पहुंच 20 हजार वॉट्सऐप ग्रुप्स तक है और वो मिनटों में लाखों समर्थकों तक अपना संदेश पहुंचा सकते हैं.

और देखा जाए तो वॉट्सऐप का इस्तेमाल बड़े स्तर पर सांप्रदायिक शांति को भड़काने, नेताओं का बयान तोड़ने मरोड़ने, मजाक उड़ाने और चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने में हो ही रहा है. श्रीलंका और म्यांमार में भड़काऊ वॉट्सऐप मैसेज के चलते दंगे भी हुए हैं.

भारत वॉट्सऐप का बड़ा बाजार है. यहां करीब 20 करोड़ लोग वॉट्सऐप इस्तेमाल करते हैं. यहां टेक्नोलॉजी को लेकर अशिक्षा और डिजिटल दुनिया तक नई-नई पहुंच ने वॉट्सऐप के भड़काऊ इस्तेमाल को बढ़ाया है. यहां शुरू से ही भड़काऊ सूचनाओं का आदान-प्रदान किए जाते रहे हैं.

सोशल मीडिया के जरिए एक अपार सफलता हासिल कर देश के प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी खुद भी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. उनकी पार्टी बीजेपी के कई ग्रासरूट वॉट्सऐप वॉरियर्स हैं और पार्टी की हजारों समर्थकों तक पहुंच है. कभी बीजेपी के समर्थक कांग्रेस पार्टी के विरोध में फेक न्यूज फैलाते हैं तो कांग्रेस के सर्मथक बीजेपी के विरोध में वही काम करते हैं.

डेटा चोरी के मसले में फंसा फेसबुक अब वॉट्सऐप को इन विवादों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है. वॉट्सऐप का कहना है कि पिछले कुछ वक्त से राजनीतिक पार्टियां वॉट्सऐप के जरिए लोगों को ऑर्गनाइज करने की कोशिश कर रही हैं. कर्नाटक चुनाव से कंपनी को इस बात का अंदाजा मिला है कि चीजें कैसे काम करती हैं. कैसे क्या हो रहा है. इससे अगले साल लोकसभा चुनावों के मद्देनजर भी हमें स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी.

कंपनी का कहना है कि अगर सुरक्षा की बात है तो कंपनी वॉट्सऐप और फेसबुक दोनों ही जगहों पर यूजर्स को ब्लॉक भी कर सकती है. चूंकि वॉट्सऐप एक्जीक्यूटिव कंटेंट स्कैन नहीं कर सकते लेकिन वो फेसबुक से जुड़े वॉट्सऐप नंबरों, और प्रोफाइल फोटो को जरिए अवांछित हरकतों की पहचान कर सकती हैं. और वो भविष्य में ऐसा करने की मंशा भी रखते हैं.

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