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राहुल गांधी के पीएम वाले बयान पर बवाल मचाने से पहले तर्क भी तो देखिए

कांग्रेस में परपंरा रही है कि पार्टी अध्यक्ष ही संसदीय दल का नेता होता है. इसलिए अगर 2019 में कांग्रेस बड़ी पार्टी बनती है तो राहुल गांधी उसके नेता होंगे

Syed Mojiz Imam Updated On: May 10, 2018 04:48 PM IST

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राहुल गांधी के पीएम वाले बयान पर बवाल मचाने से पहले तर्क भी तो देखिए

कर्नाटक के चुनाव में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर जवाब दिया- हां, अगर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो वो बन सकते हैं. इसमें इतना बवाल क्यों होना चाहिए? कांग्रेस देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है. इसका नेता ही अगले चुनाव में प्रधानमंत्री बन सकता है. राहुल गांधी को बतौर अध्यक्ष पार्टी ने स्वीकार कर लिया है. कांग्रेस के नेता अहमद पटेल ने राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बताया है. कांग्रेस के सभी नेता राहुल गांधी के समर्थन में खड़े हैं तो सीनियर नेताओं को नजरअंदाज करने का सवाल कहां उठ रहा है?

कांग्रेस में परपंरा रही है कि पार्टी अध्यक्ष ही संसदीय दल का नेता होता है. इसलिए अगर 2019 में कांग्रेस बड़ी पार्टी बनती है तो राहुल गांधी उसके नेता होंगे. ये परंपरा सोनिया गांधी ने तोड़ी है, जिन्होंने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनवाया था, जबकि सोनिया गांधी खुद पार्टी चला रहीं थी. सरकार और संगठन अलग-अलग नेताओं के मार्गदर्शन में काम कर रहे थे.

हालांकि कांग्रेस के सामने चुनौती अलग तरह की है. तमाम विपक्षी दल कांग्रेस के साथ आने से हिचकिचा रहे हैं. दूसरे सब अपनी ताक में हैं. सबको उम्मीद है कि 1996 की तरह ही किसी का भाग्य बदल सकता है. लेकिन कांग्रेस के ज्यादातर नेता मानते हैं कि कांग्रेस की अगुवाई मे ही यूपीए की तरह सरकार बनेगी. राहुल गांधी जिस तरह से राजनीति कर रहे हैं. उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है. इसलिए प्रधानमंत्री को निशाना बना रहे हैं क्योकि पहले तीन साल कांग्रेस ने सोचा कि मोदी को निशाना बनाने में पार्टी को ज्यादा नुकसान होगा इसलिए राहुल गांधी भी बचते रहे हैं. लेकिन अब राहुल गांधी ने रणनीतिक बदलाव किया है. सीधे नरेंद्र मोदी निशाने पर हैं.

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प्रधानमंत्री से सीधा टकराव

कर्नाटक में राहुल गांधी का पीएम पर हमला तीखा हुआ है. राहुल गांधी समझ रहे हैं कि प्रधानमंत्री के पॉलिसी की आलोचना करके ही उनके बराबरी से टक्कर ले सकते हैं. राहुल गांधी ने राफेल डील पर भी सवाल उठाया है कि ये प्रधानमंत्री के निजी दोस्तों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. यही नहीं वो रोहित वेमुला के बहाने दलित अत्याचार का मुद्दा उठा रहे हैं तो रेड्डी ब्रदर्स के नाम पर किसानों के कर्ज पर सवाल उठा रहे हैं. राहुल गांधी का कहना है कि कर्नाटक चुनाव में दूसरे मुद्दे ना मंज़रे आम पर ना आए इसलिए बीजेपी उनके प्रधानमंत्री वाले बयान को तूल दे रही है.

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हालांकि राहुल गांधी कह रहे हैं कि कर्नाटक चुनाव उनके पीएम बनने के बारे में नहीं है. शायद वो भी समझ रहे है कि गलत समय पर गलत बोल दिया है. लेकिन इन्हीं राहुल गांधी पर आरोप था कि वो जिम्मेदारी लेने से भाग रहे हैं. यूपीए के 10 साल के शासन में राहुल गांधी ने कोई सरकारी पद नहीं लिया था. मनमोहन सिंह ने कई बार पेशकश भी की. लेकिन राहुल गांधी तैयार नहीं हुए. राहुल गांधी ने कई बयान में कहा कि सत्ता ज़हर की तरह है. हालांकि एक बार इंटरव्यू में ये ज़रूर कहा था कि वो चाहते तो प्रधानमंत्री पहले बन सकते थे, जिसको लेकर राहुल गांधी को काफी किरकरी हुई थी.

अब राहुल गांधी बीजेपी के मुकाबले अपने आप को खड़ा कर रहे हैं तो भी बीजेपी को नागवार लग रहा है. कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि बीजेपी को लग रहा है कि राहुल की साफ छवि और बेबाक अंदाज़ उनके लिए मुश्किल पैदा कर सकता है. हालांकि राहुल गांधी ने जो तीखापन अख्तियार किया है, उसका नतीजा देखने को जल्दी ही मिलेगा. राहुल गांधी ने कर्नाटक में बीजेपी के सोनिया गांधी पर हमले का भी बखूबी जवाब दिया है.

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सोनिया को बताया ज्यादा इंडियन

बीजेपी ने सोनिया गांधी की कर्नाटक की रैली पर कटाक्ष किया था. सोनिया गांधी के इटैलियन मूल को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ माहौल खड़ा करने की कोशिश की है. राहुल गांधी ने सोनिया गांधी का बचाव किया है. राहुल गांधी ने कहा कि 'मेरी मां किसी अन्य भारतीय के मुकाबले ज्यादा भारतीय हैं. मेरी मां ने इस देश के लिए कुर्बानियां दी हैं. इस देश के लिए मुश्किलें सही हैं.' ज़ाहिर है कि इसके ज़रिए राहुल गांधी सहानुभूति भी बटोरना चाहते हैं. राहुल गांधी ने सोनिया गांधी के बचाव में आगे कहा कि कि सोनिया ने जीवन का बड़ा हिस्सा भारत में बिताया है. बीजेपी पर राहुल गांधी ने निजी हमला करने का आरोप लगाया है.

विपक्षी एकता को तोड़ने के लिए है प्रधानमंत्री का बयान

कांग्रेस के नेता की दावेदारी के बाद प्रधानमंत्री ने सीनियर नेताओं का मुद्दा उठा दिया है. विपक्ष में कई नेता प्रधानमंत्री बनने के लिए राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं. उनमें शरद पवार प्रमुख नेता हैं, जो सोनिया गांधी के विरोध में कांग्रेस से बाहर निकले थे. लेकिन बाद में यूपीए सरकार में शामिल भी हुए. ममता बनर्जी भी पुरानी कांग्रेस की नेता हैं. लेकिन ममता लगातार नया मोर्चा खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं. मुलायम-मायावती एक हो गए हैं. दोनों ही नेता प्रधानमंत्री बनने का सपना संजोए हैं. ये सब नहीं चाहेंगे कि वो राहुल गांधी की अगुवाई में काम करें. इसलिए पीएम ने बड़ा राजनीतिक पैगाम देने की कोशिश की है. हालांकि इन सब दलों की कमज़ोरी की वजह बीजेपी है, बीजेपी की लगातार जीत की वजह से सब दल एकजुट होने पर मजबूर हो रहे हैं. इसलिए सभी दलों के भविष्य का भी सवाल है. मजबूरी में ही सही राहुल गांधी को बतौर नेता मानना पड़ सकता है.

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1991-1996 की गलती नहीं दोहराएगी कांग्रेस

कांग्रेस 1991 चंद्रशेखर को समर्थन करने वाली गलती नहीं करेगी. ना ही 1996 में देवगौड़ा और बाद में इंद्र कुमार गुजराल को समर्थन करने जैसी कोई सोच है. उस वक्त राजनीतिक हालात अलग थे. कांग्रेस को लग रहा था कि अगले चुनाव में वहीं बहुमत प्राप्त कर सकते हैं. दूसरे गठबंधन की सरकार चलाने में कांग्रेस को अनुभव नहीं था लेकिन 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस ने गठबंधन सरकार चलाने का हुनर सीख लिया है. 2004 में यूपीए सरकार को लेफ्ट ने बाहर से समर्थन दिया था. 2008 में अलग हो गए. लेकिन माया मुलायम इस सरकार को 2014 तक समर्थन करते रहे हैं.

सोनिया गांधी ने तोड़ी परंपरा

कांग्रेस में परंपरा है कि पार्टी का अध्यक्ष ही प्रधानमंत्री बनता है. राजीव गांधी भी प्रधानमंत्री बनने के बाद पार्टी अध्यक्ष बने थे. नरसिंहाराव भी प्रधानमंत्री बनने के बाद 1992 में तिरुपति अधिवेशन में पार्टी के अध्यक्ष बने थे. मनमोहन सिंह ऐसे प्रधानमंत्री थे जो पार्टी के अध्यक्ष नहीं थे. इस दौरान सोनिया गांधी ने पार्टी का कामकाज संभाला और कांग्रेस संसदीय दल और यूपीए की चेयरपर्सन बनी रहीं. 2004 में यूपीए की सरकार बनने जा रही थी. लेकिन सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को तूल दिया जा रहा था लेकिन उस वक्त सोनिया ने मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाकर विपक्ष की रणनीति ध्वस्त कर दी थी. इससे पहले 1999 में मुलायम सिंह ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को समर्थन देने से इनकार कर दिया था.

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