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बॉडी और दिमाग डिटॉक्स करा लौटे सिद्धरमैया, कुमारस्वामी की कुर्सी पर खतरा?

सिद्धरमैया ने ट्वीट करके कहा कि 15 दिन के आयुर्वेदिक इलाज और बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन के बाद उनका शरीर और दिमाग राजनीति में सक्रिय होने के लिए पूरी तरह तैयार है

Updated On: Jun 29, 2018 05:09 PM IST

FP Staff

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बॉडी और दिमाग डिटॉक्स करा लौटे सिद्धरमैया, कुमारस्वामी की कुर्सी पर खतरा?

गुरुवार रात कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया बेंगलुरु वापस लौटे. एयरपोर्ट पर उतरने के 15 मिनट बाद सिद्धारमैया ने ट्वीट करके कहा कि 15 दिन के आयुर्वेदिक इलाज और बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन के बाद उनका शरीर और दिमाग राजनीति में सक्रिय होने के लिए पूरी तरह तैयार है.

हालांकि, यह ट्वीट एक साधारण और आम ट्वीट लगता है, लेकिन इसके जरिए सिद्धारमैया ने अपनी पार्टी कांग्रेस और गठबंधन साझीदार जेडीएस दोनों को संदेश दे दिया है कि उनकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए. आने वाले दिनों में वह बड़ी भूमिका निभाएंगे.

प्राकृतिक चिकित्सा के लिए उज्जिर गए थे

कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन समन्वय समिति के अध्यक्ष सिद्धारमैया, राज्य में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन बनने के बाद मैंगलौर के पास उज्जिर में प्राकृतिक चिकित्सा के लिए चले गए थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि वह राजनीति से पूरी तरह दूर हैं. हालांकि, उन्होंने अपने करीबी नेताओं से मुलाकात की और उनकी 'निजी' बातचीत मीडिया में भी लीक हो गई.

सिद्धारमैया कांग्रेस द्वारा उन्हें अनदेखा कर जेडीएस से सीधे बातचीत करने की वजह से पार्टी हाईकमान से नाराज हैं, लीक ऑडियो और वीडियो के माध्यम से उन्होंने अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी. बताया जा रहा है कि इसके बाद कुमारस्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से शिकायत कर सिद्धारमैया पर नियंत्रण रखने की मांग की थी.

पहले ही सरकार गिरने की घोषणा कर चुके हैं सिद्धरमैया

गुरुवार को 'News18' से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा था कि कांग्रेस-जेडीएस के बीच कोई समस्या नहीं है. सरकार अपना कार्यकाल खत्म करेगी, जबकि इससे ठीक एक दिन पहले सिद्धारमैया ने अपने सहयोगियों को कहा था कि यह सरकार लोकसभा चुनाव से ज्यादा नहीं चलेगी.

जेडीएस सुप्रीमो और एक समय पर सिद्धरमैया के गुरु एचडी देवगोड़ा ने गठबंधन में चल रही उठापठक पर गुरुवार को बयान देते हुए कहा था कि कांग्रेस और जेडीएस के बीच कोई समस्या नहीं है, गठबंधन सरकार लंबी चलेगी.

दरअसल, देवगौड़ा के साथ सिद्धारमैया के मनमुटाव राजनीतिक कम और निजी ज्यादा हैं, इसलिए कांग्रेस उनकी नाराजगी को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही है. कर्नाटक के ज्यादातर कांग्रेस नेताओं का मानना है कि गौड़ा के प्रति सिद्धारमैया का गुस्सा गठबंधन के पतन का कारण नहीं बनना चाहिए.

कांग्रेस के नेता हैं नाखुश

एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, 'अगर कर्नाटक में फिर से बीजेपी आती है, तो इसके लिए सिद्धारमैया पूरी तरह से उत्तरदायी होंगे. उन्होंने पिछले पांच सालों में बीजेपी, आरएसएस, हिंदुत्व, मोदी और शाह के खिलाफ इतने बयान दिए हैं, अगर वह वास्तव में धर्मनिरपेक्ष नेता हैं और बीजेपी के खिलाफ हैं, तो उन्हें गठबंधन सरकार का समर्थन कर इसे साबित करना होगा. गौड़ा परिवार के साथ उनके व्यक्तिगत मुद्दे रास्ते में नहीं आने चाहिए, लेकिन नीतीश कुमार की तरह वह भी जनता परिवार की पृष्ठभूमि से हैं. इसलिए वह भी कुछ भी कर सकते हैं.'

सिद्धारमैया के किसी भी कदम के जवाब में देवगौड़ा और कुमारस्वामी ने बीजेपी का विकल्प खुला रखा हुआ है. गुरुवार को बीजेपी एमएलसी और येदियुरप्पा के करीबी लहर सिंह की देवगौड़ा से मुलाकात के बाद इस बात को और अधिक बल मिला है. लहर सिंह ने कहा था कि यह शिष्टाचार मुलाकात थी, जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.

वहीं, कर्नाटक कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी सिद्धारमैया पर लगाम लगाएं. उन्हें बताएं कि उन्होंने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया और राज्य में खुली छूट दी, लेकिन यह वक्त गठबंधन के साथ चलने का है.

(न्यूज18 के लिए डीपी सतीश की रिपोर्ट)

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