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कर्नाटक चुनाव: बेरोजगारी के सवाल पर कांग्रेस को घेरने की मोदी-नीति कितनी कारगर?

बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उल्टा कांग्रेस पार्टी से ही सवाल खड़ा किया है.

Updated On: May 07, 2018 03:53 PM IST

Amitesh Amitesh

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कर्नाटक चुनाव: बेरोजगारी के सवाल पर कांग्रेस को घेरने की मोदी-नीति कितनी कारगर?

बेरोजगारी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उल्टा कांग्रेस पार्टी से ही सवाल खड़ा किया है. मोदी ने कहा कांग्रेस पार्टी के पास अपने कार्यकाल के बारे में बताने के लिए कुछ नहीं है. 60 साल तक सत्ता में रहने वाली पार्टी को काम के बारे में बोलने के लिए कुछ नहीं है. क्या चार साल में बेरोजगारी पैदा हुई है. मोदी ने नमो ऐप के माध्यम से कर्नाटक में बीजेपी के युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं से बात करते हुए यह बातें कहीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बाकी नेताओं की तरफ से देश भर में बेरोजगारी का मुद्दा और मोदी सरकार के अपने वादे पर खरा नहीं उतरने का आरोप लगाया जा रहा है. लेकिन, प्रधानमंत्री इसे कांग्रेस की विरासत का प्रतीक बताने की कोशिश कर रहे हैं. मोदी हर मंच से हर जगह बार-बार अपनी सरकार की तरफ से शुरू की गई तमाम योजनाओं का जिक्र करते रहे हैं, जिससे देश भर में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार का सृजन होता है.

एक बार फिर कर्नाटक में बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं से आक्रामकता के साथ जनता के बीच जाकर अपनी सरकार की उपलब्धियों को रखने और रोजगार के मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों का करारा जवाब देने का मंत्र मोदी ने दिया. उन्होंने कहा कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के साथ-साथ पर्सनल स्तर पर भी रोजगार के बड़े अवसर मिले हैं. खास तौर से मुद्रा योजना के माध्यम से 12 करोड़ से ज्यादा लोगों ने अबतक इसका फायदा उठाकर अपना रोजगार शुरू किया है. इन 12 करोड़ से ज्यादा लोगों को बिना किसी बैंक गारंटी के लोन मुहैया कराया गया है.

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि हर एक व्यक्ति जिसने मुद्रा योजना के तहत अपना काम शुरू किया है, उसके साथ एक या दो लोगों को भी रोजगार मिला है. इस तरह रोजगार का आंकड़ा 12 करोड़ के दोगुने या तिगुने के बराबर हो जाता है.

सरकारी और प्राइवेट नौकरियों के साथ-साथ स्वरोजगार के तहत मिलने वाले रोजगार को भी प्रधानमंत्री लगातार अपनी सरकार की बेरोजगारी दूर करने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम मानते हैं. ईपीएफओ से इनरॉलमेंट कराने वाले लोगों की संख्या में हो रही बढ़ोत्तरी को भी नए रोजगार मिलने से जोड़कर मोदी यह बेहतर रोजगार का दावा कर रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

लेकिन, वो कांग्रेस समेत विपक्ष के हमले को उसी के दावे से कुंद करने की कोशिश भी कर रहे हैं. कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की तरफ से 50 लाख और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार की तरफ से 60 लाख रोजगार देने का दावा किया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी का कहना है जब कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में पिछले चार-पांच सालों में इतने रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं तो क्या केंद्र में रोजगार के अवसर नहीं हैं.

विपक्ष के आंकड़े से ही उन्हीं को जवाब देने की मोदी की कोशिश उनकी रणनीति को दिखा रही है.यह मोदी का स्टाइल है जिसमें वो रक्षात्मक होने के बजाए आक्रामक होकर विपक्ष के दावे की हवा निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

बीजेपी युवा मोर्चा के एक कार्यकर्ता ने चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया. उन्होंने युवा मोर्चा के सभी कार्यकर्ताओं को लोकतांत्रिक तरीके से अपना काम करने को कहा. कर्नाटक से लेकर केरल तक या फिर त्रिपुरा तक हर जगह हुई राजनीतिक हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री ने विरोधियों पर निशाना भी साधा. लेकिन, अपनी पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को बिना हिंसा के आक्रामकता के साथ अपने काम को अंजाम देने की नसीहत भी दी.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में विधानसभा चुनाव प्रचार में धुंआधार प्रचार करना शुरू कर दिया है. इस दौरान नमो ऐप के माध्यम से भी वो लगातार अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को जरूरी टिप्स दे रहे हैं. सबसे पहले पार्टी के सभी विधानसभा उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को उन्होंने टिप्स दिया. उसके बाद किसान मोर्चा, महिला मोर्चा औऱ युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ भी उन्होंने संवाद कर चुनाव में उठाए जा रहे मुद्दों और चुनाव में बेहतर रणनीति को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं से जी-जान से जुटने की नसीहत दी है.

लेकिन, एक बार फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पॉलिटिकल पंडितों को गलत साबित करने में लगे हैं. हमेशा की तरह फिर से उनका दावा है कि पॉलिटिकल पंडितों का अनुमान फिर फेल होगा, हंग एसेंबली के बजाए बीजेपी के पक्ष में जनादेश मिलेगा. ऐसा कर मोदी अपने कार्यकर्ताओं में उर्जा का संचार करने की कोशिश भी कर रहे हैं और उनमें जीत का जज्बा और भरोसा पैदा करने की कोशिश भी कर रहे हैं.

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