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कर्नाटक चुनाव: 111 साल के लिंगायत साधु का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे सभी नेता

शिवकुमार स्वामी कर्नाटक में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले महंत हैं. उनके शिष्य 'जीता-जागता भगवान' मानते हैं

FP Staff Updated On: Apr 05, 2018 10:26 AM IST

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कर्नाटक चुनाव: 111 साल के लिंगायत साधु का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे सभी नेता

कर्नाटक चुनाव आते ही बंगलोर से 70 किलोमीटर दूर तुमकुर स्थित सिद्धगंगा मठ सुर्खियों में आ जाता है. कर्नाटक के स्थानीय नेताओं की कौन कहे, राष्ट्रीय पार्टियों के नेता भी यहां हाजिरी लगाना शुरू कर देते हैं. प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष तक, सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक और सिद्धारमैया, येदियुरप्पा, देवेगौड़ा से लेकर कुमारस्वामी तक सभी इस मठ का आशीर्वाद लेते हैं. सिद्धगंगा मठ के महंत ने अभी हाल में अपना 111 जन्मदिन मनाया है. इनका नाम डॉ. शिवकुमार स्वामी है. हालांकि इनकी रुचि किसी पार्टी या पॉलिटिक्स में नहीं है लेकिन इनका कर्नाटक की राजनीति पर व्यापक असर देखा जाता है.

शिवकुमार स्वामी कर्नाटक में सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले महंत हैं जिन्हें उनके शिष्य 'जीता-जागता भगवान' मानते हैं. बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इनके दर पर पहुंचे और आशीर्वाद लिया. साथ में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कई कांग्रेस नेता भी थे. इससे पहले अमित शाह और कुमारस्वामी भी पहुंच चुके हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी महंत शिवकुमार स्वामी का आशीर्वाद ले चुके हैं. सिद्धगंगा मठ का सियासी प्रभाव ऐसा है कि शायद की कोई नेता यहां आने से रहा हो. 600 साल पुराने इस मठ का मैसूर इलाके में काफी ज्यादा प्रभाव है. 1 अप्रैल 1907 के पैदा हुए शिवकुमार स्वामी 1930 में लिंगायत साधु बने.

मठ के स्वामी काफी शिक्षित हैं. लगभग 50 साल पहले इन्होंने गरीब बच्चों के लिए मठ में बोर्डिंग स्कूल की शुरुआत की. मठ के गुरुकुल में 5-15 साल के फिलहाल 8500 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. श्रद्धालु मठ में अपना योगदान या तो चंदे के रूप में या सामान देकर करते हैं. यह मठ मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज भी चलाता है.

अन्य लिंगायत साधुओं से अलग स्वामी ने अपने को राजनीति से दूर ही रखा है. येदियुरप्पा जब मुख्यमंत्री थे, तब वे हर हफ्ते मठ का दौरा करते थे और महंत से निर्देश लेते थे लेकिन डॉ. शिवकुमार स्वामी ने उनका पक्ष नहीं लिया.

अभी हाल में जब लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की बात हुई तो महंत ने अपने को इससे अलग रखा. उन्होंने इस मुद्दे पर अपना स्टैंड रखने से मना कर दिया. हालांकि उनके शिष्य साधु ने सिद्धारमैया के कदम की तारीफ की. मठ के कर्मचारियों की मानें तो शिवकुमार स्वामी की दिमागी हालत अभी बिल्कुल दुरुस्त है और वे चश्मा लगाए वे अखबार पढ़ते हैं.

स्वामी लिंगायत धर्म से ताल्लुक रखते हैं फिर भी उनके पास हिंदुओं का तांता लगा रहता है क्योंकि लोग उन्हें जाति, धर्म और कर्म से परे मानते हैं. कर्नाटक सरकार ने उन्हें अपना सबसे बड़ा सम्मान कर्नाटक रत्न से नवाजा है. सिद्धारमैया सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि शिवकुमार स्वामी को देश का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा जाए.

(न्यूज18 के लिए डीपी सतीश की रिपोर्ट)

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