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SC ने BJP की सरकार बनाने पर नहीं लगाई रोक, समर्थन देने वाले MLA की सूची मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को बुलाने की याचिका पर बुधवार देर तक सुनवाई की

Updated On: May 17, 2018 09:19 AM IST

FP Staff

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SC ने BJP की सरकार बनाने पर नहीं लगाई रोक, समर्थन देने वाले MLA की सूची मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को बुलाने की याचिका पर बुधवार देर तक सुनवाई की. राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले को कांग्रेस ने चुनौती दी थी जिसमें बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का फैसला किया गया था.

कांग्रेस की याचिका पर रात एक बजकर 45 मिनट पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने बहस के बाद कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर कर्नाटक सरकार और येदियुरप्पा को नोटिस भेजा. सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे एक बार फिर मामले पर सुनवाई करेगा. शीर्ष अदालत ने बीजेपी को यह आदेश दिया कि राज्यपाल को भेजा पत्र उसके सामने पेश किया जाए. कोर्ट ने कहा कि मामले पर फैसला करने के लिए बीजेपी का पत्र देखना उसके लिए जरूरी है.

इससे पहले कांग्रेस ने अपनी याचिका में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाए जाने पर रोक लगाने की मांग की. राज्यपाल ने बुधवार देर शाम बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था. येदियुरप्पा को 15 दिन में विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा गया है.

बीजेपी राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में 104 सीटें हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं चुनाव के बाद बने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 116 विधायक हैं. इस गठबंधन ने भी राज्यपाल के पास सरकार बनाने का दावा पेश किया था.

सरकार बनाने के लिए बी एस येदियुरप्पा को राज्यपाल वजुभाई वाला के आमंत्रण पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव मुरलीधर राव ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के बीच सिर्फ ‘बीजेपी को सत्ता से दूर रखने’ की सहमति बनी है.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘यह जनादेश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से पूरी तरह विपरीत है और इसे लोगों की अभिव्यक्ति के छेड़छाड़ के रूप में माना जाना चाहिए जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पवित्र है.’ कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश के बीच बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है.

बहस के दौरान दोनों पक्षों की बात

कर्नाटक में सरकार बनाने के मामले में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) तुषार मेहता, बीजेपी की ओर से पूर्व अटॉर्नी जनरल (एजी) मुकुल रोहतगी और कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए.

रोहतगी ने कोर्ट से कहा, 'कृपया इस याचिका को खारिज करे दें. वे एक उच्च स्तर की संवैधानिक व्यवस्था को काम करने से रोकना चाहते हैं. यह राज्यपाल का काम है कि वह शपथ के लिए बुलाएं. राज्यपाल और राष्ट्रपति किसी भी कोर्ट के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं. ऐसे में कोर्ट को चाहिए कि वह संवैधानिक कामकाज को ना रोके.'

बहस के दौरान अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा, 'यह याचिका दायर करने के बजाय कांग्रेस और जेडीएस को बहुमत परीक्षण का इंतजार करना चाहिए था.'

इसपर जस्टिस सीकरी ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से पूछा, 'जब एक पक्ष 117 विधायकों का समर्थन दिखा रहा है तो 112 विधायकों का समर्थन दूसरे पक्ष को कैसे मिल जाएगा?

मुकुल रोहतगी बोले, 'कर्नाटक में सरकार बनाने को लेकर रात में सुनवाई नहीं होनी चाहिए. अगर वहां शपथ ग्रहण हो जाता है तो आसमान नहीं गिर जाएगा. पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में रात में सुनवाई याकूब मेमन की फांसी के लिए हुई थी.'

इस पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा, 'यह कहना निरर्थक है कि बिना शपथ लिए विधायक दलबदल कानून के तहत बाध्य नहीं हैं. यह विधायकों की खरीद-फरोख्त को आमंत्रित करता है.' जस्टिस बोबडे ने कहा, 'हम नहीं जानते कि बीएस येदियुरप्पा ने किस तरह के बहुमत का दावा किया है. जब तक कि हम विधायकों समर्थन पत्र नहीं देख लेते, इस बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकते'

(इनपुट भाषा और एजेंसियों से)

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