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वरुणा सीट पर हो सकती सिद्धारमैया और येदियुरप्पा के बेटों के बीच लड़ाई

वरुणा विधानसभा सीट पर इस बार एक बड़ी और दिलचस्प लड़ाई देखने को मिल सकती है, इस सीट से सिद्धारमैया के बेटे मैदान में उतर रहे हैं, बीजेपी येदियुरप्पा के छोटे बेटे को लड़ाने की सोच रही है

FP Staff Updated On: Mar 30, 2018 04:25 PM IST

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वरुणा सीट पर हो सकती सिद्धारमैया और येदियुरप्पा के बेटों के बीच लड़ाई

पैलेस सिटी कहे जाने वाले शहर, मैसूर के बाहरी इलाके में वरुणा नाम की विधानसभा सीट कर्नाटक में काफी जानी-पहचानी सीट है. इसका श्रेय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को जाता है जो यहां से वर्तमान विधायक हैं.

वरुणा विधानसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. वरुणा से पहले सिद्धारमैया 7 बार 1983 से लेकर 2008 तक चामुंडेश्वरी सीट से विधायक रहे. उसके बाद रणनीतिक कारणों से उन्होंने पड़ोस की सीट वरुणा चुनी. अब उन्होंने इस सीट से अपने बेटे यतींद्र को उम्मीदवार बनाने का फैसला कर लिया है और खुद फिर से चामुंडेश्वरी से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है.

इस सेमी-अर्बन सीट से इस बार एक बड़ी लड़ाई देखने को मिल सकती है. जहा से बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र, सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं.

येदियुरप्पा के छोटे बेटे ठोक सकते हैं ताल

न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, सिद्धारमैया के अपने बेटे को वरुणा से उम्मीदवार बनाने की आधिकारिक घोषणा करने के बाद बीजेपी ने भी इस चुनौती को स्वीकार करने की योजना बना ली है. पार्टी इसके लिए येदियुरप्पा के बेटे को मैदान में उतारने का मन बना रही है. येदियुरप्पा के बड़े बेटे राघवेंद्र शिकारीपुरा से बीजेपी के एमएलए हैं. इससे पहले वो शिमोगा से सांसद थे. अब उनके पिता इस सीट से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं तो राघवेंद्र ने इसे खाली कर दिया है.

पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, राघवेंद्र की नजर इस बार रेनेबेन्नुर सीट पर है. अगर पार्टी ने येदियुरप्पा के छोटे बेटे विजयेंद्र को वरुणा से उम्मीदवार बनाया तो वो पहली बार चुनाव मैदान में उतरेंगे.

सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र एक मेडिकल प्रैक्टिशनर हैं. उनकी राजनीति में कभी दिलचस्पी नहीं रही. 2016 में जब उनके बड़े भाई की बेल्जियम में मृत्यु हो गई तब उन्हें राजनीति में आना पड़ा. इससे पहले सिद्धारमैया के राजनीतिक विरासत का हकदार उनके बड़े बेटे राकेश को माना जाता था.

यतींद्र पिछले दो साल से वरुणा में जमे हुए हैं. वहां के स्थानीय लोगों के साथ-साथ मतदाताओं के लिए भी अब वो अंजान नहीं हैं. वहीं दूसरी तरफ येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र मैसूर की राजनीति के लिए बाहरी व्यक्ति हैं.

(डीपी सतीश की न्यूज18 के लिए रिपोर्ट)

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