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जेडीएस प्रमुख कुमारास्वामी के जीत की राह आसान क्यों मानी जा रही है?

चामुंडेश्वरी और बादामी सीट में सिद्धारमैया की चुनावी जंग जहां कठिन मानी जा रही है, वहीं इसके विपरीत रामानगर और चन्नपत्ना से चुनाव लड़ रहे एचडी कुमारस्वामी की जीत आसान मानी जा रही है

FP Staff Updated On: May 08, 2018 02:32 PM IST

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जेडीएस प्रमुख कुमारास्वामी के जीत की राह आसान क्यों मानी जा रही है?

कर्नाटक में शनिवार को वोटिंग होनी है. चुनाव प्रचार के लिए बीजेपी और कांग्रेस पसीना बहा रही है. चामुंडेश्वरी और बादामी सीट में सिद्धारमैया की चुनावी जंग जहां कठिन मानी जा रही है, वहीं इसके विपरीत रामानगर और चन्नपत्ना से चुनाव लड़ रहे एचडी कुमारस्वामी की जीत आसान मानी जा रही है. ये दोनों सीटें बेंगलुरु से सटे और नव निर्मित जिले रामानगर के तहत आती हैं. कुमारस्वामी ने 2004 से तीन बार रामानगर से जीता है, लेकिन इस बार वो चन्नपत्ना से भी चुनाव लड़ रहे हैं.

अपने नए निर्वाचन क्षेत्र में कुमारस्वामी की लड़ाई मौजूदा बीजेपी विधायक सीपी योगेश्वर और परिवहन मंत्री एचएम रेवन्ना के खिलाफ है. योगेश्वर ने 2013 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था. बाद में उन्होंने कांग्रेस ज्वॉइन कर लिया. कुछ महीनों पहले वह बीजेपी में शामिल हो गए और दोबारा नॉमिनेट हुए. वहीं, विधान परिषद सदस्य एचएम रेवन्ना कांग्रेस के लास्ट मिनट च्वॉइस थे.

फिल्में छोड़कर सियासी पारी शुरू करने वाले योगेश्वर और कुमारस्वामी के बीच प्यार और नफरत का रिश्ता जगजाहिर है. पार्टी के अंदरुनी सूत्रों का दावा है कि कुमारस्वामी पहले चन्नपत्ना से चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे. वो ये सीट अपनी पत्नी अनिता कुमारस्वामी के लिए सुरक्षित रखना चाहते थे. लेकिन, पारिवारिक कारणों से अनिता इस बार का चुनाव नहीं लड़ रही हैं.

इस वजह से दो सीटों पर लड़े कुमारास्वामी

कर्नाटक में 'कुमार अन्ना' के नाम से चर्चित कुमारस्वामी की दिली इच्छा थी कि उनकी पत्नी अनिता अक्का चन्नपत्ना से चुनाव लड़े. लेकिन, उनके भतीजे प्रज्जवल रेवन्ना भी ये चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन, कुमारस्वामी ने इसका विरोध किया था. इसपर पारिवारिक विवाद होने लगा, नतीजतन कुमारस्वामी अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में नहीं उतार सके. जेडीएस कार्यकर्ता के मुताबिक, कुमारस्वामी दोनों सीटों पर अपनी जीत पक्की मान रहे हैं. चुनाव के बाद वो रामानगर सीट अपने पास रखेंगे और चिन्नपत्ना सीट अपनी पत्नी के लिए छोड़ देंगे.

इसके लिए कुमारस्वामी को मौका नहीं छोड़ना चाहते. वो अपनी नई सीट चिन्नपत्ना में लगातार प्रचार कर रहे हैं. वहीं, जेडीएस के कार्यकर्ता भी यहां जोश-शोर से प्रचार में जुटे हैं.

बीजेपी की यहां कोई मौजूदगी नहीं है और सीट बचाने के लिए पार्टी सिर्फ योगेश्वर पर निर्भर है. News18 से बातचीत में उन्होंने बताया, 'कुमारस्वामी अगर जीत भी गए तो वे ये सीट छोड़ देंगे. यहां उप-चुनाव होंगे. ये पैसे और वक्त की बर्बादी है. मैं यहां सबसे मजबूत हूं और मैं ही जीतूंगा. लोग बेवकूफ नहीं हैं कि उन्हें वोट देंगे.'

कांग्रेस ने लगाया बीजेपी और जेडीएस के बीच गुप्त समझौते का आरोप

कांग्रेस के एचएम रेवन्ना कुरुबा जाति के हैं और इस विधानसभा क्षेत्र के लिए नए हैं. कुमारस्वामी और योगीश्वर दोनों ही वोक्कालिगा हैं, जिनकी चन्नपत्ना में 50% से ज्यादा आबादी है. जेडी (एस) प्रवक्ता गंगाधरमूर्ति के मुताबिक, इस चुनाव में रेवन्ना के जीतने का कोई चांस नहीं है. यहां असली लड़ाई कुमारस्वामी और योगीश्वर के बीच है.

वहीं दूसरी तरफ रामानगर में कुमारस्वामी के सामने बीजेपी या कांग्रेस की तरफ से कोई मुश्किल मुकाबला नहीं है. कांग्रेस ने यहां एक स्थानीय मुस्लिम कैंडिडेट इकबाल हुसैन को उतारा है, जो माइनॉरिटी वोट पर निर्भर हैं.

इकबाल हुसैन ने बताया, 'रामानगरमें 50,000 से ज्यादा मुस्लिम हैं. अगर मुस्लिम, ओबीसी, एससी/एसटी मिलकर कांग्रेस को समर्थन दे दें तो कुमारस्वामी को हराया जा सकता है. सभी वोक्कालिगा सिर्फ गौड़ा परिवार को वोट नहीं देते. हम उनसे वोट छीनने की भरसक कोशिश कर रहे हैं.'

स्टेट कांग्रेस कैंपेन कमिटी के जनरल सेक्रेटरी मिलिंद धर्मसेना ने बताया, 'बीजेपी की तरफ से तेजस्विनी गौड़ा इस सीट के लिए मजबूत प्रतियोगी थीं. वे कुमारस्वामी को अच्छा मुकाबला देती. उनको टिकट न देता साबित करता है कि गौड़ा और मोदी के बीच कोई सीक्रेट डील हुई है.'

हालांकि, जेडी (एस) प्रमुख ने चुनाव पूर्व गठबंधन के आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने News18 से बताया, 'सभी धर्म और जाति के लोग मुझसे प्यार करते हैं. मुझे ज्यादा प्रचार की ज़रूरत नहीं है. मैं रामानगर और चन्नपत्ना से जीतूंगा. गठबंधन की बात करें तो मैं न बीजेपी के साथ हूं और न कांग्रेस के साथ.'

(न्यूज18 के लिए डीपी सतीश की रिपोर्ट) 

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