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कर्नाटक चुनाव मोदी बनाम राहुल का चुनाव होता गया, बीजेपी भी यही चाहती थी !

बीजेपी भी यही चाहती थी क्योंकि उसे भरोसा है कि उसके स्टार प्रचारक मोदी के सामने कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल का करिश्मा फीका पड़ जाएगा.

Amitesh Amitesh Updated On: May 09, 2018 06:23 PM IST

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कर्नाटक चुनाव मोदी बनाम राहुल का चुनाव होता गया, बीजेपी भी यही चाहती थी !

कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार खत्म होने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताबड़तोड़ चार रैलियां कीं. बांगरपैट की रैली में मोदी के निशाने पर एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ही रहे. मोदी ने इस मौके पर राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर हमला बोल दिया. मोदी ने तंज भी कसा और उदाहरण ऐसा दिया जो कि राहुल गांधी की दावेदारी को उनके अहम का पर्याय बताने वाला था.

मोदी ने कहा, ‘किसी गांव में जहां पानी की कमी होती है तो और वहां जब सबको पता होता है कि दिन में अगर तीन बजे टैंकर आने वाला होता है, तो उस गांव के भोले-भाले लोग एक कतार में सुबह से ही अपनी बाल्टी लगाकर चले आते हैं. सभी तीन बजे तक का इंतजार करते हैं. लोग इतने ईमानदार होते हैं कि बाल्टी रखकर अपने घर चले जाते हैं. कोई किसी की बाल्टी को छूता भी नहीं है, लेकिन, गांव में कोई एकाध दबंग, सिरफिरा होता है जो कानून-व्यवस्था को नहीं मानता है, लोकतंत्र को नहीं मानता है, नियम को नहीं मानता है. यूं-यूं छाती कर निकल जाता है. खुद ही बाल्टी लाकर तीन बजे सबसे ऊपर रख देता है. सबसे पहले पानी ले लेता है. कल कर्नाटक की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसने घोषित कर दिया कि बाकी जो होगा सो होगा, बाकी गठबंधन के नेताओं का जो होगा सो होगा, चालीस साल से जो नेता पड़े हैं उनका होगा सो होगा, उसने आकर अपनी वाली रख दी कि मैं पीएम बनूंगा.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस कदम को बाल्टी रखने वाले दबंग से तुलना कर राहुल गांधी को लोकतंत्र का मजाक बताने वाला बताया. मोदी की कोशिश राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी को उन राजनीतिक दलों के नेताओं के दावे को कमजोर करने वाला बताया जो अबतक पिछले कई सालों से राजनीति में अपना सबकुछ लगाए हुए हैं.

मोदी का इशारा क्षेत्रीय क्षत्रपों की तरफ था जो अबतक विपक्षी एकता की बात करते हैं. मोदी हटाओ मुहिम के तहत लगे ये नेता सभी विपक्षी दलों की एकता के दम पर बीजेपी को देश भर में मात देने का दावा करते रहे हैं. इसकी एक बानगी यूपी में दिखी थी, जब अखिलेश और माया के मिलन ने यूपी की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हरा दिया था. अब आगे इस तरह की कोशिश देश भर में दोहराने की है.

Akhilesh_Mayawati

कोशिश यूपी में अखिलेश और मायावती को साथ लाने की है तो बिहार में लालू और मांझी के अलावा कुछ और सेक्युलर नेताओं के ब्रिगेड को साथ रखकर कांग्रेस आगे बढ़ना चाहती है. इसी तरह की कोशिश बाकी राज्यों में भी है. इस कवायद में वामपंथी दल भी गैर बीजेपी मोर्चे को लेकर साथ आने पर राजी हो सकते हैं. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से लेकर डीएमके अध्यक्ष करुणानिधि भी पहले से ही यूपीए के साथ रहे हैं. लेकिन, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की छोटे क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कवायद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर भारी पड़ सकती है. ये दोनों नेता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का नेतृत्व स्वीकार करने के मूड में फिलहाल नहीं दिख रहे हैं.

मोदी इसी भावना को और उभारना चाहते हैं. बाल्टी रखने वाले दबंग से राहुल गांधी की तुलना कर मोदी विपक्ष के मजबूत क्षेत्रीय नेताओं की भावना को भड़काना चाहते हैं, जो कि अनुभव और वरिष्ठता में राहुल गांधी से काफी आगे हैं.

मोदी ने इसे सातवें आसमान पर पहुंचा अहंकार बताया है. इसे नामदार का अहंकार बताकर मोदी की कोशिश कांग्रेस के कल्चर और उसके काम करने के तरीके को एक्सपोज करना है. मोदी कांग्रेस के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की पोल खोलकर इसे कांग्रेस के भीतर एक परिवार का दबदबा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो पार्टी के भीतर बिना किसी सलाह-मशविरा के खुद को देश की बागडोर संभालने का दावेदार प्रस्तुत कर रहा है. मोदी एक तीर से दो निशाने साध रहे हैं. विपक्षी नेताओं के स्वाभिमान को जगाने के साथ-साथ कांग्रेस के स्वयंभू कमांडर घोषित करने के तरीके को भी जनता के सामने रख रहे हैं.

नामदार बनाम कामदार बताने का क्या मतलब

पिछले लोकसभा चुनाव के वक्त प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद मोदी के निशाने पर सोनिया और राहुल दोनों थे. मोदी ने अपने-आप को गरीब का बेटा बताते हुए देश भर में सोनिया-राहुल की सरकार यानी मां –बेटे की सरकार बताया था. कोशिश थी कि भ्रष्टाचार के मामले से लेकर सरकार की नाकामियों का सारा ठीकरा सोनिया और राहुल पर फोड़ा जाए.

राहुल गांधी को शहजादा बताकर मोदी ने उनके सामने अपने-आप को गरीब के बेटे के तौर पर पेश किया था. चायवाला के सामने शहजादा का करिश्मा फीका पड़ गया. मोदी की यह रणनीति कारगर हुई थी. अब एक बार फिर से कर्नाटक से मोदी ने राहुल को नया नाम दिया है नामदार.

PM Modi

राहुल को नामदार और अपने-आप को कामगार बताकर मोदी की कोशिश है कि हर हाल में देश की जनता के सामने फिर से सहानुभूति ली जाए. कर्नाटक में जैसे ही राहुल गांधी ने मोदी पर 15 मिनट तक नहीं टिक सकने की बात कही, मोदी ने इसे अपने तरीके से एक नया मोड़ दे दिया.

प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में एक मई को ही अपनी पहली चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी की उस बात का जवाब देते हुए कहा था. कि आपने सही फरमाया है. हम आपके सामने नहीं बैठ सकते, हमारी क्या हैसियत है कि आपके सामने बैठ पाएं. आप नामदार हैं, हम कामदारों की क्या हैसियत.

हालाकि मोदी ने राहुल पर यहां भी व्यंग्य करते हुए चुनौती दी कि इस कर्नाटक चुनाव में ही हिंदी, अंग्रेजी या अपनी माता जी की मातृभाषा में भी किसी भी भाषा में बोल सकें तो 15 मिनट हाथ में बिना कागज लिए बोल दीजिए. गौरतलब है कि एक रैली के दौरान राहुल गांधी विश्वेश्वरैया का नाम लेते वक्त थोड़े उलझ गए थे. मोदी ने उन्हें अपने 15 मिनट के भाषण के दौरान पांच बार विश्वेश्वरैया बोलने को कहकर चुटकी भी ले ली.

यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के कर्नाटक में एकमात्र चुनावी रैली में पहुंचने को लेकर भी मोदी ने सोनिया-राहुल दोनों को निशाने पर लिया. मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेताओं को लगा कि बेटे से कुछ नहीं होगा, अगर मां को ले जाओ तो कुछ हो सकता है. शायद जमानत बच जाए. इसी के बाद अब सोनिया गांधी भी चुनाव प्रचार में आ रही हैं.

अपने धुंआधार चुनाव प्रचार के दौरान मोदी की कोशिश भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कर्नाटक की सिद्धरमैया सरकार को घेरने की थी. लेकिन, मोदी के इन सारे आरोपों का जवाब कांग्रेस की तरफ से भी मिला. कांग्रेस ने भी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पलटवार करते हुए येदियुरप्पा के जेल जाने और रेड्डी बंधुओं के खनन से जुड़े मसलों को उठाकर बीजेपी की पहले वाली येदियुरप्पा सरकार में भ्रष्टाचार के मुद्दे को हवा देने की कोशिश की. इस कोशिश में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया भी थे, जिन्होंने दो रेड्डी और एक येदि की सरकार का जिक्र किया.

लेकिन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से हुआ हमला सबसे ज्यादा तेज था. बीजेपी के घोषणा पत्र को राहुल गांधी ने येदि-रेड्डी का घोषणा पत्र बताकर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी. राहुल गांधी लगातार रोड शो और रैलियों में जाकर लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते रहे. कर्नाटक के दंगल में यूं तो बड़े-बड़े कई स्टार प्रचारक थे. लेकिन, आखिर में पूरा चुनाव प्रचार मोदी-बनाम राहुल ही होता चला गया. बीजेपी भी यही चाहती थी क्योंकि उसे भरोसा है कि उसके स्टार प्रचारक मोदी के सामने कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल का करिश्मा फीका पड़ जाएगा.

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