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कर्नाटक चुनाव: क्या बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए एक ही किंगमेकर ?

जनता दल (सेक्युलर) प्रमुख एचडी कुमारस्‍वामी कांग्रेस और बीजेपी दोनों के दलों के लिए चुनौती बने हुए हैं.

Updated On: May 14, 2018 10:47 PM IST

FP Staff

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कर्नाटक चुनाव: क्या बीजेपी-कांग्रेस दोनों के लिए एक ही किंगमेकर ?
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कर्नाटक के प्रभावी राजनीतिक परिवार से ताल्‍लुक, पिता की राजनीतिक विरासत और लगभग एक दशक से ज्‍यादा के राजनीतिक अनुभव को साथ लेकर बढ़ रहे जनता दल (सेक्युलर) प्रमुख एचडी कुमारस्‍वामी कांग्रेस और बीजेपी दोनों के दलों के लिए चुनौती बने हुए हैं. दोनों ही दलों को अकेले सरकार बनाने से रोकने और जनता दल सेक्‍युलर की मदद लेने के लिए मजबूर करने की रणनीति के तहत काम कर रहे कुमारस्‍वामी कर्नाटक विधानसभा चुनावों में काफी ताकतवर दल प्रमुख के रूप में उभर रहे हैं.

कांग्रेस और बीजेपी दो बड़े दलों के साथ मुकाबले में उतरे जेडीएस को कई ऐसे दलों का भी समर्थन प्राप्‍त है जो कुछ हद तक वोट काटने वाले साबित हो सकते थे. यहां तक कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी कर्नाटक चुनावों में उम्‍मीदवार उतारे बगैर जेडीएस को समर्थन देने का ऐलान किया था.

कुमारस्‍वामी ने अभी किसी भी दल के साथ जुड़ने की रणनीति स्‍पष्‍ट नहीं की है. एक प्रकार से अवसरवादी कहे जाने वाले कुमारस्‍वामी के बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्‍य चुनावों के नतीजे आने के बाद वे सत्‍ता के करीब पहुंची पार्टी को समर्थन दे सकते हैं. ध्‍यान रहे कि बिना बहुमत का आंकड़ा छुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को हासिल कर चुके हैं.

कुमारस्वामी की अवसरवादिता के बारे में कहा जाता है कि वर्ष 2006 में कांग्रेस के साथ मतभेद होने पर उन्‍होंने गठबंधन तोड़कर बीजेपी से हाथ मिलाया. तब तय हुआ कि दोनों दल 20-20 महीने की सरकार चलाएंगे. लेकिन सीएम की कुर्सी पर बैठने के बाद कुमारस्‍वामी ने अपना वादा तोड़ दिया और बीजेपी को समर्थन देने से इनकार कर दिया. इसके बाद राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगा.

ऐसे में यह उक्ति भी कुमारस्‍वामी के बारे में चल रही है कि वे किंग बनेंगे या किंगमेकर साबित होंगे. जनता का उमड़ता प्‍यार भी कुमारस्‍वामी की मजबूती दिखा रहा है. हालांकि, ताकत का अंदाजा नतीजे आने के बाद ही साफ होगा.

एच डी देवगौड़ा के राजनीति अनुभव और कुमारस्‍वामी के संगठन को मजबूती देने के कामों के चलते कर्नाटक के मैसूर क्षेत्र में जेडीएस की पकड़ काफी अच्‍छी है. खासतौर पर पुराने मैसूर, हासन, मंड्या, तुमकूरु जिले सहित बंगलुरु के आसपास के क्षेत्रों में कुमारस्वामी की पार्टी को खासा समर्थन मिल रहा है. हाल ही में कुमारस्‍वामी की रैलियों में उमड़ी भीड़ भी इसकी गवाही दे रही थी. इतन ही नहीं कुमारस्‍वामी के नेतृत्‍व में पार्टी इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.

कांग्रेस के सिद्दारमैया की तरह कुमारस्‍वामी भी दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं. वे रामानगर और चन्नपत्ना सीट से मैदान में है. बताया गया कि चन्नपत्ना सीट से उनकी पत्‍नी अनीता चुनाव लड़ने वाली थीं लेकिन पारिवारिक कल‍ह के बाद कुमारस्‍वामी ने ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है. वहीं तय है कि दोनों सीटों से जीतने पर वे चन्नपत्ना सीट को अपनी पत्‍नी के लिए छोड़ देंगे. पिछली बार वर्ष 2013 में उन्हें रामानगर पर 40 हजार वोटों से जीत मिली थी लेकिन उनकी पत्नी अनीता कुमारस्वामी चन्नपत्ना में सपा उम्मीदवार से हार गई थीं.

कांग्रेस के सिद्धारमैया, बीजेपी के येदियुरप्पा और जेडीएस के मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार एचडी कुमारस्वामी में सबसे अधिक संपत्ति कुमारस्वामी के पास है. कुमारस्‍वामी तीनों पार्टियों के नेताओं में सबसे अमीर हैं. जबकि दूसरे स्थान पर सिद्धारमैया और उनका परिवार और तीसरे पर येदियुरप्पा हैं.

( न्यूज़ 18 के लिए प्रिया गौतम की रिपोर्ट )

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