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कर्नाटक का किंग कौन? बेंगलुरु से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज

एग्जिट पोल और अलग-अलग नेताओं के दावे में कितना दम है उसका पता तो 15 मई को ही चलेगा

Amitesh Amitesh Updated On: May 14, 2018 06:00 PM IST

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कर्नाटक का किंग कौन? बेंगलुरु से दिल्ली तक सियासी हलचल तेज

कर्नाटक में किसकी सरकार बनेगी? इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि एग्जिट पोल के नतीजों के सामने आने के बाद भ्रम की स्थिति और भी ज्यादा बढ़ गई है. अलग-अलग एग्जिट पोल ने अलग-अलग तरह के जनादेश की संभावना जताई है.

एग्जिट पोल में 8 जगहों पर बीजेपी तो 3 जगहों पर कांग्रेस को बढ़त दिखाया गया है. एबीपी-सीवोटर के एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी को 104-116 सीटें मिल सकती हैं. जबकि कांग्रेस को 83-94 सीटें मिल सकती हैं. जेडीएस को 20-29 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. अन्य को 0-7 सीटें आती दिख रही हैं.

न्यूज-नेशन के एग्जिट पोल के मुताबिक, बीजेपी को 99-108, कांग्रेस को 75-84, जेडीएस को 31-40 जबकि अन्य को 3-7 सीटें मिलने की संभावना हैं.

न्यूज एक्स-सीएनएक्स ने अपने एग्जिट पोल में बीजेपी को 102-110, कांग्रेस को72-78, जेडीएस को 35-39 जबकि अन्य को 3-5 सीटें दिया है. रिपब्लिक जन की बात ने बीजेपी को 104 जबकि कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 37 सीटें दी हैं, अन्य को 3 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है.

इसके अलावा इंडिया टुडे के एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है. कांग्रेस को कर्नाटक में 106-118 सीटें मिलने का अनुमान है. बीजेपी को 79-92 सीटें मिल सकती हैं, जेडीएस को 22-30 और अन्य को 1-4 सीटें मिलने की उम्मीद है.

Times Now VMR Survey के मुताबिक, कांग्रेस को 90-103 सीटें मिलेंगी. वहीं बीजेपी को 80-93, जीडीएस 31-39 और अन्य 2-4 सीटें मिलने की उम्मीद जताई है.

पोल ऑफ पोल्स

अगर सभी एग्जिट पोल के नतीजों का औसत भी निकाला जाए तो बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी तो बनकर उभर रही है. लेकिन, वो भी बहुमत से दूर रहेगी. एग्जिट पोल के नतीजे पर भरोसा किया जाए तो कर्नाटक में सत्ता की चाबी जेडीएस के पास रहेगी. एग्जिट पोल के नतीजों को देखकर पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा भी कुछ इस तरह के संकेत दे रहे हैं. उन्हें भी पता है कि अगर चुनाव परिणाम भी इसी तरह के रहे तो फिर कर्नाटक के असल खिलाड़ी बनकर वही उभरेंगे.

कर्नाटक चुनाव के दौरान पीएम मोदी की रैली

कर्नाटक चुनाव के दौरान पीएम मोदी की रैली

चुनाव प्रचार के दौरान मोदी-देवगौड़ा का एक-दूसरे को लेकर दिया गया सम्मान चर्चा का विषय था. दोनों का एक-दूसरे के लिए सॉफ्ट कॉर्नर दिखा था. लेकिन, बीजेपी के साथ जाने की संभावना पर फिलहाल जेडीएस कुछ बोलने से कतरा रही है. जेडीएस की तरफ से आ रहे संकेतों के मुताबिक वो फिलहाल चुनाव परिणाम पर नजर रखना चाहती है.

संभावित गठबंधन को लेकर पहले से ही सियासी दांव चला जा रहा है. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को भी इस बात का अंदेशा है कि अगर कांग्रेस बहुमत से पीछे रह जाती है और त्रिशंकु विधानसभा की नौबत आती है तो फिर उस हालात में जेडीएस को उनके नाम पर आपत्ति हो सकती है. सिद्धरमैया की तरफ से एक दलित नेता के लिए पद छोड़ने की बात कहना उसी रणनीति का संकेत है. सिद्धरमैया का इशारा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ हो सकता है. क्योंकि खड़गे के नाम पर हो सकता है कि एच डी देवगौड़ा और उनके बेटे कुमारस्वामी हामी भर दें.

लेकिन, यह सबकुछ त्रिशंकु विधानसभा की सूरत में ही हो सकता है. हालांकि, कांग्रेस को बहुमत मिलने पर इस बार विधानसभा चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बता चुके मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ही सबसे प्रबल दावेदार होंगे. लेकिन, एग्जिट पोल के नतीजों ने हर तरह की संभावना को फिलहाल जगा दिया है.

कांग्रेस में ही सीएम पद के कई दावेदार

मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिद्धरमैया के दलित मुख्यमंत्री वाले बयान पर कहा है कि अब तो सिर्फ 12 घंटे की बात है. मुख्यमंत्री के मुद्दे पर आलाकमान फैसला करेगा. मौजूदा संकेतों से यही लगता है कि कांग्रेस के भीतर भी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर कई नाम हैं. लेकिन, कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन की संभावना होने पर किसी नए नेता की भी लॉटरी लग सकती है.

इन सभी संभावनाओं के बीच जेडीएस अध्यक्ष कुमारस्वामी के चुनाव खत्म होने के बाद सिंगापुर जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं. हालाकि जेडीएस की तरफ से इसे एक रूटीन चेक-अप बताया जा रहा है.

अगर चुनाव नतीजों में किसी दल को बहुमत नहीं आता है तो निश्चित तौर पर देवगौड़ा और उनके बेटे कुमारस्वामी असली खिलाड़ी के तौर पर नजर आएंगे. लेकिन, इन सभी संभावनाओं से अलग बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येदियुरप्पा ने तो एक कदम आगे बढ़कर अभी से ही शपथ ग्रहण के लिए 17 मई की तारीख का भी ऐलान कर दिया है.

इन सभी नेताओं के दावे में कितना दम है, इसका पता तो 15 मई को पता चल जाएगा. अब देखना है सिद्धरमैया और येदियुरप्पा में से ही कोई बाजी मारता है या फिर कोई नया खिलाड़ी कर्नाटक की राजनीति में उभर कर सामने आता है.

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