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कर्नाटक चुनाव: दलितों को लेकर सियासत तेज, बातें ज्यादा काम कम

कांग्रेस और बीजेपी दलितों की हमदर्द बनने के बजाय एक दूसरे को एटी दलित ठहराने की कोशिश कर रही है

Updated On: May 07, 2018 11:05 PM IST

Amitesh Amitesh

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कर्नाटक चुनाव: दलितों को लेकर सियासत तेज, बातें ज्यादा काम कम
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीटर एकाउंट से ट्वीट किया गया एक वीडियो इन दिनों चर्चा के केंद्र में है. इस वीडियों में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान देश भर में दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं का जिक्र है. देश के अलग-अलग हिस्सों में घटित कुछ घटनाओं का एक वीडियो बनाकर राहुल गांधी ने अपने ट्वीटर एकाउंट से ट्वीट कर दिया है.

लेकिन, इसकी टाइमिंग ऐसी है कि इसपर सियासत तो होनी ही होनी है. इस वक्त कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर है. दलितों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार बीजेपी पर निशाना साध रही है. इस वीडियो में भी शुरुआत बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार वी एस येदियुरप्पा के ही वीडियो से है, जिनमें उन्हें तथाकथित तौर पर एक दलित के घर भोजन करते दिखाया गया है.

क्या है वीडियो में 

इस वीडियो में दावा किया गया है कि येदियुरप्पा भले ही दलित के घर भोजन करने के लिए गए थे, लेकिन, उन्होंने खाना बाहर के किसी रेस्टोरेंट से मंगाकर खाया था. बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के  उम्मीदवार के इस दलित प्रेम को निशाना बनाकर इसे महज एक दिखावा बताया गया है.

इस वीडियो में दूसरा नाम कर्नाटक से ही लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के उस बयान का जिक्र है जिसमें उन्होंने बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के  बनाए भारतीय संविधान को लेकर बनाया था. उस वक्त भी इस बयान पर काफी बवाल हुआ था. अब बाबा साहब के अनादर का आरोप लगाकर कांग्रेस की तरफ से इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरा जा रहा है.

इसके अलावा हाल ही में मध्यप्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा में दलित उम्मीदवार के सीने पर SC लिखने के मामले को लेकर भी बवाल हुआ था. इस वीडियो में इसका भी जिक्र किया गया है.

पूरे वीडियो में संघ प्रमुख मोहन भागवत और संघ नेता मनमोहन वैद्द के कुछ बयानों को लेकर भी पूरे संघ परिवार को एंटी दलित ठहराने की कोशिश की गई है. इस वीडियो के भीतर दावा किया गया है कि मनमोहन वैद्द ने आरक्षण खत्म करने की बात की थी, जबकि मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी.

इसके अलावा भी दलितों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए उत्पीड़न की एक-एक घटना का संकलन कर उसको कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से पोस्ट किया गया है.

क्या है कांग्रेस की रणनीति?

कांग्रेस की रणनीति कर्नाटक चुनाव में बीजेपी को दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर घेरने की है. एससी-एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद भी राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा था. राहुल का आरोप था कि सरकार ने उस तरह से मजबूती से अपना पक्ष नहीं रखा जैसा करना चाहिए था. इस वीडियो में इस बात को भी उठाया गया है.

राहुल गांधी और उनकी टीम की तरफ से देश भर में मोदी सरकार को एंटी दलित ठहराने की कोशिश हो रही है. यह कांग्रेस की रणनीति है जिसके तहत वो अपने तरकश के हर तीर निकालने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस को लगता है कि देश भर में दलित और मुस्लिम अगर उसके साथ आ जाएं तो बीजेपी को परेशानी हो सकती है.

पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुत बड़ी तादाद में दलित और आदिवासी तबके ने वोट दिया था. दलित समुदाय के समर्थन का ही नतीजा है कि यूपी से मायावती के नेतृत्व में बीएसपी का लोकसभा चुनाव में खाता तक नहीं खुल पाया था. विधानसभा चुनाव में महज 19 सीटों पर बीएसपी सिमट गई थी.

लेकिन, पिछले चार सालों की कुछ घटनाओं को संकलित कर एक रणनीति के तहत मोदी सरकार को घेरा जा रहा है. कांग्रेस को उम्मीद है कि उसकी रणनीति कामयाब होगी. लिहाजा राहुल गांधी कर्नाटक सरकार की तारीफ कर रहे हैं.

राहुल गांधी ने एक और ट्वीट के माध्यम से कहा है कि कर्नाटक के एससी-एसटी की आबादी के हिसाब से उनके विकास के लिए राज्य सरकार ने खर्च किया. राहुल ने इसे क्रांतिकारी योजना बताकर सिद्धरमैया सरकार की तारीफ की है.

येदियुरप्पा के दलित प्रेम को दिखावा और सिद्धरमैया के प्लान को क्रांतिकारी प्लान बताकर राहुल गांधी की योजना दलित वोटरों को लुभाने की है.

राहुल गांधी के आरोपों में है दम!

लेकिन, राहुल गांधी के आरोपों से बीजेपी के साथ-साथ संघ परिवार भी असहज है. संघ ने राहुल गांधी के इस तरह के प्रयासों को गलत बताया है. संघ की तरफ से कहा गया है कि ‘ कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार झूठ बोलकर समाज को भ्रमित करने का विफल प्रयास करते दिखते हैं. उनकी तरफ से यह झूठ फैलाया जा रहा है कि मनमोहन वैद्द और मोहन भागवत की तरफ से आरक्षण को खत्म करने की कोशिश हो रही है.

संघ पहले भी राहुल गांधी के उस बयान को खारिज कर चुका है जिसमें उन्होंने संघ परिवार और बीजेपी को एंटी दलित बताया था. अब इस वीडियो के सामने आने के बाद इसपर भी संघ ने कड़ा विरोध जताया है.

दरअसल, संघ परिवार की तरफ से पहले से ही दलितों को साधने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. एक कुंआ, एक श्मशान और एक मंदिर अभियान के तहत समाज की गैर बराबरी को खत्म करने के लिए पूरा प्रयास होता रहा है.इसका फायदा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बीजेपी को भी हुआ है.

लेकिन, मौका चुनाव का है तो राहुल गांधी को लगता है कि संघ और बीजेपी को एंटी दलित साबित कर उसका सियासी फायदा लिया जा सकता है. इस वीडियो के बाद मचे सियासी बवाल का हाल भी कुछ ऐसा ही है. इसे दलितों के हमदर्द बनने की कोशिश के बजाए एक दूसरे को एंटी दलित ठहराने की कोशिश ज्यादा नजर आ रही है.

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