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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018: शिकारीपुरा से CM बनने की तैयारी में बीएस येद्दियुरप्पा

येदियुरप्पा के सामने कांग्रेस ने एक निगम सदस्य जीबी मालतेश को उतारा है, जिन्हें लोग गोनी मालतेश भी बुलाते हैं

FP Staff Updated On: Apr 26, 2018 07:20 PM IST

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018: शिकारीपुरा से CM बनने की तैयारी में बीएस येद्दियुरप्पा

शिकारीपुरा विधानसभा सीट कर्नाटक बीजेपी के लिए किसी भी विधानसभा क्षेत्र से अधिक महत्वपूर्ण कही जा सकती है. क्योंकि यहां से बीजेपी की ओर से सीएम पद के उम्मीदवार और राज्य के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा चुनाव मैदान में हैं. यह उनके लिए सबसे सुरक्षित सीट भी मानी जाती है. क्योंकि पिछला सात चुनाव वह यहां से जीत चुके हैं.

वो सबसे पहले साल 1983 में यहां से विधायक चुने गए. इसके बाद 1985, 89, 94, 2004, 08, 13 में यहां से जीत चुके हैं. यही वजह है कि बी.एस येदियुरप्पा शिमोगा की शिकारपुरा सीट की जीत के लिए एकदम आश्वस्त और बेफिक्र हैं.

लोग ये मान रहे थे कि यहां से कांग्रेस येदियुरप्पा के सामने किसी मजबूत उम्मीदवार को उतारेगी. लेकिन जब लिस्ट आई तो सभी लोगों को ताज्जुब हुआ की बीजेपी के स्टार कैंडिडेट येदियुरप्पा के सामने कांग्रेस ने एक निगम सदस्य जीबी मालतेश को उतारा है, जिन्हें लोग गोनी मालतेश भी बुलाते हैं. मालतेश को शिमोगा जिले तक में कोई अच्छे से नहीं जानता और अगर येदियुरप्पा से तुलना की जाए तो वो राजनीति में कुछ नहीं है.

कांग्रेस ने दे दिया है वॉकओवर 

इसके अलावा स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर विनय केसी रजावत चुनावी मैदान में हैं. हाल ही में वह अचानक से चर्चा में आए थे जब हेलीकॉप्टर से नामांकन कराने के लिए पहुंचे थे.

जबकि शिकारपुरा एक लिंगायत बहुल सीट है तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि येदियुरप्पा के सामने किसी मजबूत लिंगायत नेता को ही इस सीट पर उतारा जाएगा. इस सीट के लिए पूर्व विधायक महालिंगप्पा और शांतावीरप्पा गौड़ा के नाम सामने आ रहे थे. महालिंगप्पा ने 1999 में येदियुरप्पा को कांग्रेस टिकट से हराया था, जबकि शांतावीरप्पा गौड़ा येदियुरप्पा के बेटे राघवेन्द्र से 2014 उप-चुनावों में लगभग 6000 वोटों से हारे थे.

दूसरी ओर जेडी(एस) ने कांग्रेस की तुलना में येदियुरप्पा के सामने काफी मजबूत लिंगायत उम्मीदवार एचटी बालिगर को उतारा है. बालिगर शिकारपुरा सीट पर पूरे जोर-शोर से प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं. उनका मानना है कि '1999 में मेरे पिता एस बंगारप्पा ने येदियुरप्पा और ईस्वरप्पा दोनों को हराया था. हमें भरोसा है कि इस बार येदियुरप्पा को जीत के लिए काफी पसीना बहाना पड़ेगा.'

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