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क्या कर्नाटक में राहुल के ‘प्रोग्रेसिव’ प्रयोग से कांग्रेस कर पाएगी सत्ता में वापसी!

कांग्रेस को लग रहा है कि लिंगायत वोट में अगर सेंध लग जाती है तो बीजेपी को मात देने में आसानी होगी इसलिए राहुल गांधी के पहले चरण में ही दो ऐसी जगह जा रहे हैं जो लिंगायत मत के आस्था का केंद्र है

Updated On: Feb 09, 2018 09:45 PM IST

Syed Mojiz Imam
स्वतंत्र पत्रकार

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क्या कर्नाटक में राहुल के ‘प्रोग्रेसिव’ प्रयोग से कांग्रेस कर पाएगी सत्ता में वापसी!

गुजरात चुनाव से उत्साहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर्नाटक में चुनाव प्रचार का आगाज कर रहें हैं. राहुल गांधी बीजेपी के कोर वोट लिंगायत को कांग्रेस के पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं. कर्नाटक में पहले चरण का प्रचार अभियान ऐसी जगहों में रहेगा जहां लिंगायत की आबादी सबसे ज्यादा है. ये इलाका हैदराबाद-कर्नाटक का इलाका बोला जाता है.

गुजरात में राहुल गांधी ने मंदिर पर फोकस किया था. लेकिन कर्नाटक में इसके बरक्स वे दूसरे धर्मों के स्थल पर भी जाएगें. राहुल गांधी तीन दिन की यात्रा में तीन बड़े मंदिरों में जाएंगे. राहुल के प्रोग्राम के मुताबिक वे एक दरगाह का भी दर्शन करेंगे.

इस चरण में हुलीगम्मा मंदिर का दर्शन राहुल गांधी करेंगे. जिसके बारे में मान्यता है कि यहां पर तुगंभद्रा नदी के किनारे देवी दुर्गा का अवतार हुआ था. इसके अलावा उनका कोप्पल जिले के गवि सिद्देश्वरा मठ जाने का प्रोग्राम है.

800 साल पुराना ये मठ लिंगायत मत के लिए पवित्र स्थान है. इसके अलावा राहुल गांधी बीदर जिले के अभिनव मनटप्पा भी जाएगें. ये स्थान भी लिंगायत मत के लिए महत्वपूर्ण स्थान है.

राहुल गांधी बंदा नवाज़ के दरगाह पर जाएगें. यहां पर हर धर्म के मानने वालों की आस्था है. बंदा नवाज़ गैसुदराज़ का ताल्लुक दिल्ली से है. वे ख्वाजा चिराग देहलवी के शिष्य थे.

राहुल गांधी कर्नाटक से प्रोग्रेसिव इमेज बनाने की कोशिश में हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ‘ये साफ्ट हिंदुत्व नहीं है बल्कि समावेशी (इंक्लूसिव) हिंदुत्व हैं. यही कांग्रेस मानती रही है.’

कांग्रेस का फोकस लिंगायत

बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदुरप्पा लिंगायत मत से आते हैं. पहले भी येदुरप्पा बीजेपी को कर्नाटक की सत्ता दिला चुके हैं. राज्य में लिंगायत की आबादी तकरीबन 18 फीसदी है. जो एकमुश्त बीजेपी के पास है. इस वोट में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर लगा रखा है.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi meets party workers at AICC Headquarters, in New Delhi on Wednesday. PTI Photo (PTI2_7_2018_000250B)

लिंगायत मत के मानने वालों का वीर शिवा में आस्था है. इसके संस्थापक बासवराजा देवारू जिन्हे बासवन्ना भी कहा जाता हैं. बासवराजा देवारू की महत्ता का अंदाजा इस चुनाव में इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बोलते हुए बासवराजा की कुछ पंक्तियां कही. कांग्रेस को लग रहा है कि लिंगायत वोट में अगर सेंध लग जाती है तो बीजेपी को मात देने में आसानी होगी. इसलिए राहुल गांधी के पहले चरण में ही दो ऐसी जगह जा रहे हैं जो लिंगायत मत के आस्था का केंद्र है. इसके अलावा हिंदू वोट को साधने के लिए राहुल गांधी श्रृंगेरी मठ भी जाएंगे.

श्रृंगेरी मठ का इतिहास

राहुल गांधी अभी उत्तर कर्नाटक की यात्रा पर है लेकिन प्रचार के अगले चरण में श्रृंगेरी मठ (श्री शारदा पीठम) जाने की योजना है. यह मठ आदि शंकराचार्य से जुड़ा हुआ है. जिसकी स्थापना 8 वीं शताब्दी में की गई थी. इस जगह का इतिहास में अपना महत्व है.

राम पुनियानी के मुताबिक 1791 में मराठा और टीपू सुल्तान के बीच जंग हुई जो बेनतीजा खत्म हो गई...लौटती मराठा सेना ने इस जगह को तबाह और बर्बाद कर दिया. जिसके बाद शंकराचार्य ने टीपू सुल्तान की मदद से इसका दोबारा निर्माण कराया. जिसके सिलसिले में 18 बार दोनों के बीच खत का आदान प्रदान हुआ है. इस जगह से राहुल गांधी बीजेपी के हिंदुत्व के कार्ड का जवाब देंगे. खासकर टीपू सुल्तान के मुद्दे पर जिसके खिलाफ बीजेपी ने अभियान चला रखा है.

बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड का कर्नाटक के अस्मिता के सवाल से जवाब

चिकमंगलूर में ही बाबा बुदनगिरी में दाता हयात कलंदर की मजार है. जहां सभी धर्मों के लोग जाया करते है. इसको लेकर भी बीजेपी का एतराज है. इस दरगाह के बारे में ये दावा है कि ये हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ स्थान है. कांग्रेस बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड का काट ढूंढ रही है.

कांग्रेस के नेता बी के हरिप्रसाद का कहना है कि ‘बीजेपी का हिंदुत्व कार्ड कर्नाटक में नहीं चलेगा क्योंकि कर्नाटक के लोग बीजेपी का पुराना शासन देख चुके है. जिसमें प्रमोद मुताल्लिक जैसे लोगों ने लोगों को परेशान कर रखा था.'

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कांग्रेस का मानना है कि बीजेपी के हिंदुत्व का जवाब कर्नाटक अस्मिता का कार्ड है. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि बीजेपी कर्नाटक को नीचा दिखाने की कोशिश कर रही है. जिसे कांग्रेस जोर-शोर से उठा रहा है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने महादयी नदी के पानी का मसला उठाया है. ये नदी गोवा और कर्नाटक के बीच बहती है. गोवा में बीजेपी की सरकार है. दोनों प्रदेशों के बीच पानी को लेकर तकरार है. इस मुद्दे पर प्रदेश में दो बार बंद बुलाया जा चुका है. वही महाराष्ट्र से सीमा विवाद चल रहा है. बेलगाम कर्नाटक का हिस्सा है लेकिन मराठी भाषी लोगों की संख्या अधिक है. महाराष्ट्र में भी बीजेपी की सरकार है.

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कर्नाटक में जातीय समीकरण पर राजनीति

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का फार्मूला बैकवर्ड दलित मुस्लिम और ईसाई गठजोड़ पर टिका है. कांग्रेस को लग रहा है कि ये एकमुश्त वोट उनके पास आना है. मुख्यमंत्री खुद पिछड़ी जाति से है लेकिन कर्नाटक की सत्ता में लिंगायत और वोकालिग्गा की अहम भूमिका है. इसलिए राहुल गांधी लिंगायत से जुडें मठों और मंदिरों में जा रहे है. लेकिन कांग्रेस ने लिंगायत वोट तोड़ने के लिए एक और हथियार अजमा रही है. कांग्रेस लिंगायत मत को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की वकालत कर रही है. जिसको लेकर लिंगायत के कई संगठन मांग कर रहे हैं.

विकास और सोशल वेलफेयर का मुद्दा

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस सप्ताह की कर्नाटक से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा की है.बीजेपी को भी लग रहा है कि प्रदेश कांग्रेस को हराने के लिए अपनी योजनाओं का भी बखान करना पड़ेगा. कांग्रेस ने गरीबों के लिए इंदिरा कैंटीन जैसी योजनाए शुरू की है. जिसमें गरीब लोगों के भरपेट भोजन मिल रहा है. इसके अलावा शिक्षा भाग्य, शीरा भाग्य और अन्न भाग्य योजना चला रही है. हालांकि बीजेपी इन योजनाओं के जमीन पर ना होने का आरोप राज्य सरकार पर चला रही है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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