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कर्नाटक चुनाव: क्यों उमड़ रहा है बीजेपी का कन्नड़ प्रेम?

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बीजेपी को इस बात का एहसास हो रहा है कि कन्नड़ लोगों का मुद्दा ही कर्नाटक चुनाव का मुख्य मुद्दा है

FP Staff Updated On: Apr 14, 2018 04:08 PM IST

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कर्नाटक चुनाव: क्यों उमड़ रहा है बीजेपी का कन्नड़ प्रेम?

कर्नाटक में चुनावी रण के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दो दिवसीय मुंबई-कर्नाटक इलाके के दौरे पर हैं. वैसे तो अमित शाह इसके पहले कई बार राज्य का दौरा कर चुके हैं लेकिन, उनका इस बार का दौरा कन्नड़ केंद्रित है. कन्नड़ वोट को लुभाने के लिए शाह क्षेत्र में बड़ी चतुराई से कन्नड़ कार्ड खेल रहे हैं. इसके लिए वह जहां एक ओर कन्नड़ समुदाय के धार्मिक स्मारकों का दौरा कर रहे हैं, वहीं कन्नड़ भाषा में ट्वीट भी कर रहे हैं.

शनिवार को अमित शाह ने कन्नड़ साहित्य के एक मशहूर कविता की कुछ लाइन अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की. ये कविता धारवाड़ के कवि डी आर बेंद्रे की है.

स्थानीय बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने भी कुमारवयस के 'महाभारत' से कुछ लाइनों को ट्वीट करके कन्नड़ और उनके साहित्य के लिए अपना प्यार प्रदर्शित किया. गडगुग्ना नाराणप्पा को कुमारवीयास के रूप में जाना जाता है. उन्होंने कन्नड़ संस्करण में 'महाभारत' लिखा. कन्नड़ में लिखे महाभारत को 'कर्णता भारथ कथामंजरी' के नाम से भी जाना जाता है.

अमित शाह शुक्रवार से राज्य के दौरे पर हैं. इस बीच वह कुमारवयस के जन्मस्थान, डी आर बेंद्रे के घर, स्वतंत्रता सेनानियों संगोलि रयन्न और किटूर रानी चेन्नामा के स्मारक गए.

बीजेपी ने बदली रणनीति

राज्य में भगवा पार्टी बीजेपी का कन्नड़ केंद्रित चुनाव प्रचार राजनीतिक और साहित्यिक बहस का विषय भी बनता जा रहा है. कुछ लोग तर्क देते हैं कि पार्टी कन्नड़ के वास्तविक मुद्दों को नहीं उठा रही. बस ये आरोप लगा रही है कि सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने कन्नड़ लोगों के लिए कुछ नहीं किया. कांग्रेस बस भाषाई आधार पर राज्य और देश को बांटना चाहती है.

पिछले साल जब जुलाई और अगस्त में जब लोगों ने केंद्र द्वारा हिंदी के विरोध में सार्वजनिक प्रदर्शन किया, तो बीजेपी ने इसके लिए कड़ी आपत्ति जाहिर की थी. इसके कुछ नेताओं और सोशल मीडिया संचालकों ने उन लोगों पर हमला भी शुरू किया, जो बेंगलुरु मेट्रो से हिंदी सिग्नल को हटाने की मांग कर रहे थे.

तब बीजेपी ने सिद्धारमैया सरकार के कन्नड़ ध्वज का विरोध भी किया था. हालांकि, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बीजेपी को इस बात का एहसास हो रहा है कि कन्नड़ लोगों का मुद्दा ही कर्नाटक चुनाव का मुख्य मुद्दा है. इसे नजरअंदाज करना या इसके खिलाफ काम करने से आखिर में बीजेपी को नुकसान ही होगा.

(न्यूज18 के लिए डीपी सतीश की रिपोर्ट)

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