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कारगिल घुसपैठ खुफिया एजेंसियों की असफलता का परिणाम थी: पुरी

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय का पूरा श्रेय नौजवान अफसरों को जाता है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए बड़ी बहादुरी से जंग लड़ी और देश को इतनी बड़ी जीत दिलाई

Updated On: Jan 13, 2019 10:31 PM IST

FP Staff

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कारगिल घुसपैठ खुफिया एजेंसियों की असफलता का परिणाम थी: पुरी

साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध की विजय का मुख्य श्रेय नौजवान अफसरों को देते हुए सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी ने रविवार को कहा कि कारगिल में हुई पाकिस्तानी घुसपैठ सैन्य खुफिया सहित भारत की सभी खुफिया एजेंसियों की असफलता का परिणाम थी. पुरी ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के भारत भवन में आयोजित ‘भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल’ के दौरान हुई चर्चा में यह बयान दिया.

कारगिल युद्ध के दौरान द्रास-मसको सेक्टर से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खाली कराने का जिम्मा सेना के जिस 8 माउंटेन डिविजन को सौंपा गया था. पुरी उसके प्रमुख थे. पाकिस्तानी घुसपैठ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘वह मई (1999) का पहला हफ्ता था. जब 3 इन्फैन्टरी डिविजन को सूचना मिली कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पार की है और भारतीय इलाके में बटालिक सेक्टर में घुस आए हैं. बाद में पता चला कि घुसपैठ बहुत बड़े इलाके में हुई है.’

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उन्होंने कहा कि इसके पीछे पाकिस्तान का मकसद कश्मीर विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाना, कारगिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा को बदलना, सियाचिन को अलग-थलग करने के लिए श्रीनगर से लेह तक रोड को रोकना और कारगिल के खाली बेस पर कब्ज़ा कर वहां उग्रवादियों के लिए नया बेस बनाना था. ताकि हिमाचल प्रदेश में प्रवेश किया जा सके.

नौजवान अफसरों को जाता है कारगिल विजय का पूरा श्रेय

पुरी ने कहा कि उन्हें नियंत्रण रेखा को बहाल करने और द्रास-मसको सेक्टर में 1-डी राष्ट्रीय राजमार्ग साफ कराने का जिम्मा दिया गया था. उन्होंने कहा कि कारगिल विजय का पूरा श्रेय नौजवान अफसरों को जाता है. जिन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए बड़ी बहादुरी से जंग लड़ी और देश को इतनी बड़ी जीत दिलाई.

भारतीय सेना की रेजिमेंटों का जिक्र करते हुए पुरी ने कहा कि एक रेजिमेंट में 900 सैनिक होते हैं. एक सैनिक सबसे पहले अपने रेजिमेंट के प्रति प्रतिबद्ध होता है और बाद में देश के लिए. उन्होंने कहा कि 40 साल तक सेना में रहने के बाद वह यही कहेंगे कि रेजिमेंट की इस प्रथा को छेड़ने के बारे में नहीं सोचना चाहिए.

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