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ठोको ताली...सिद्धू नहीं छोड़ेंगे नौकरी कॉमेडी वाली

सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं बल्कि सिद्धू कहते हैं.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Mar 23, 2017 01:19 PM IST

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ठोको ताली...सिद्धू नहीं छोड़ेंगे नौकरी कॉमेडी वाली

सिद्धू क्रिकेट छोड़ सकते हैं, राजनीति छोड़ सकते हैं लेकिन कॉमेडी नहीं छोड़ सकते. सिद्धू ने अपनी पंजाब टीम के 'कैप्टन' को इशारों में बता दिया कि उन्होंने जब अजहरुद्दीन जैसे टीम के कैप्टन की नहीं सुनी फिर आप किस खेत की मूली हैं.

सिद्धू ताली ठोंकने के लिये जाने जाते हैं तो वो टीम छोड़ने के लिये भी. लोग भूल गए होंगे लेकिन सिद्धू को आजतक याद है कि किस तरह वो इंग्लैंड से टीम का दौरा छोड़कर वापस इंडिया आ गए थे. कुछ इसी तरह वो बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आ गए. उन्होंने कहा था कि ‘सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं बल्कि सिद्धू कहते हैं.’ लो जी कर लो बात या फिर ठोक दो ताली.

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वही सिद्धू अब कैप्टन अमरिंदर की नाक में दम किए हुए हैं. कह रहे हैं कि राजनीति के लिए कपिल का कॉमेडी शो कैसे छोड़ दूं? लेकिन उनकी कॉमेडी में एक नियम झोल ला रहा है. ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का. हालांकि पत्नी नवजोत कौर का कहना है कि अगर उनकी कॉमेडी ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ के पेंच में फंस गई तो सिद्धू कपिल शर्मा का शो छोड़ देंगे.

क्या सोचते हैं कैप्टन अमरिंदर? 

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उधर खुद कैप्टन अमरिंदर भी सिद्धू की कॉमेडी पर गंभीर रहे. पहले कैप्टन ने कहा कि वो संविधान विशेषज्ञ से पूछ कर कंफर्म करेंगे कि क्या कोई मंत्री रहते हुए टीवी शो कर सकता है? उन्होंने कहा कि राय लूंगा और सिद्धू से बात करूंगा, बाद में उन्होंने हरी झंडी दे दी.

शायद कैप्टन अमरिंदर भी जानना चाहते होंगे कि क्या कोई मंत्री कॉमेडी कर सकता है?  वहीं सिद्धू ने शो छोड़ने से साफ इनकार करते हुए कहा है कि ये लाभ का पद नहीं है. सिद्धू जानते हैं कि कपिल के शो में वो जिस कुर्सी पर बैठते हैं उसकी असली कमाई तो कपिल ही उड़ा देते हैं. किसी को यकीन नहीं हो तो दोनों का इस साल का इनकम टैक्स रिटर्न चेक कर लिया जाए. इसलिये सिद्धू के शिकायत भरे प्याले से दर्द भी छलक छलक जा रहा है. सिद्धू ने अर्ज किया है कि राजनीति एक तरफ है और रोजगार एक तरफ.

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सिद्धू की सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा, जो राजनीति के पेशे को रोजगार से नहीं जोड़ पा रहा है. सिद्धू को गायत्री प्रजापति की ट्यूशन अटेंड करनी चाहिये या फिर किसी भी राज्य के किसी भी मंत्री को पकड़ सकते हैं. खैर पंजाब में सुखबीर बादल ही उन्हें इतने टिप्स दे देंगे कि वो कपिल के शो की तरफ देखेंगे भी नहीं. कुछ यही कसम सुनील ग्रोवर, चंदन प्रभाकर और अली असगर ने खाई है. खैर वो मामला अलग है लेकिन ये मामला अलग है.

दरअसल सिद्धू की नाराजगी को समझने वाला कोई नहीं है. बीजेपी छोड़ने के बाद कयास थे कि 'आप' उन्हें पंजाब में सीएम के रूप में प्रोजेक्ट करे लेकिन पिच परखने में माहिर सिद्धू जान गए थे कि हवा कांग्रेस के पक्ष में बह रही है. सिद्धू ने कांग्रेस से डील कर ली. इस उम्मीद के साथ कि उन्हें शायद डिप्टी सीएम की कुर्सी मिल जाए. लेकिन मिला क्या? सिद्धू को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई और सामने रख दिया लोकल बॉडी मंत्रालय. क्या इसी डील के लिये उन्होंने बीजेपी के साथ पुराने रिश्तों को तिलांजलि दी?

हालांकि सिद्धू कह रहे हैं कि उनके लिये पंजाब की जनता सर्वोपरि है. वो दिन में पंजाब की जनता की सेवा और रात में कॉमेडी शो करेंगे. (यानी कि 24 घंटे कॉमेडी ही करेंगे).

लेकिन ऐसा हो न सकेगा. पंजाब के पुराने कांग्रेसी नए आए परिंदे के पर काटने में माहिर हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो सिद्धू को शहरी विकास मंत्रालय मिल गया होता. पंजाब के खेत-खलिहान से लेकर शहरों की पक्की सड़क पर ये खबर दौड़ लगा रही है कि सिद्धू शहरी विकास मंत्रालय की मांग पर अड़े हैं. अगर कैप्टन मान गए तो कपिल शर्मा के शो को छोड़ने वालों में एक नाम उनका भी शामिल हो जाएगा.

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