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'आप' ने रचा व्हिप का चक्रव्यूह, झुकेंगे या कुर्बान होंगे कपिल?

व्हिप का उल्लंघन करने पर सदस्यता खत्म होने का प्रावधान है

Amitesh Amitesh Updated On: May 09, 2017 02:14 PM IST

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'आप' ने रचा व्हिप का चक्रव्यूह, झुकेंगे या कुर्बान होंगे कपिल?

दिल्ली विधानसभा के सत्र में विपक्ष के बजाए आम आदमी पार्टी को अपनों के ही वार से दो-चार होना पड़ रहा है. केजरीवाल को उनकी ही भाषा में जवाब देने पर तुले उनकी पार्टी से निलंबित विधायक कपिल मिश्रा से उनकी तनातनी के बीच सत्र शुरू हो रहा है.

सत्र की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी है. आप के भीतर के कलह की चर्चा बाकी हर मुद्दे पर भारी पड़ती दिख रही है. लेकिन, आप की तरफ से अपने सभी विधायकों को विधानसभा में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी करने से अब साफ हो गया है कि आप के केजरीवाल समर्थक और नाराज विधायकों को भी विधानसभा की चौखट पर दस्तक देनी ही पड़ेगी.

केजरीवाल की रणनीति क्या है?

इसे केजरीवाल की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी के भीतर उनसे नाराज विधायकों पर भी नकेल कसने की तैयारी हो रही है. इसमें वो सभी विधायक भी शामिल हैं जिन्हें आप से निलंबित किया जा चुका है, लेकिन, उनका निष्कासन नहीं हुआ है.

Arvind Kejriwal

आप से निलंबित विधायक कपिल मिश्रा ने भी इस बात को लेकर अपनी तरफ से आशंका जता दी है कि केजरीवाल की तरफ से की जा रही हरकत उनकी सदस्यता खत्म करने की साजिश है. लेकिन, सवाल है कि कपिल मिश्रा को कैसे अपनी विधानसभा की सदस्यता खत्म होने का डर सता रहा है.

व्हिप के जरिए क्या साधने की कोशिश?

दरअसल, विधानसभा के भीतर आप के 67 विधायक थे जिसके बाद रजौरी गार्डन उपचुनाव में हार के बाद आंकड़ा 66 हो गया था. एमसीडी चुनाव से पहले बवाना से विधायक वेदप्रकाश के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफे के बाद बीजेपी में शामिल होने से ये आंकड़ा 65 हो गया है.

इन  65 विधायकों में भी आप के कई ऐसे विधायक हैं जिन्हें पार्टी ने अलग-अलग कारणों से पार्टी से निलंबित कर दिया है. इन्हीं विधायकों में से एक कपिल मिश्रा हैं, जिन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निलंबित किया गया है.

aam aadmi party in delhi

इसके अलावा सेक्स सीडी कांड में फंसे संदीप कुमार, कुमार विश्वास पर उंगली उठाने वाले अमानतुल्लाह, पंजाब चुनाव के दौरान आप आलाकमान पर सवाल खड़ा करने वाले देवेंद्र सहरावत और मटियामहल से विधायक आसिम मोहम्मद खान भी अलग-अलग मामलों में पार्टी से निलंबित हैं.

ये भी पढ़ें: चौतरफा घिर गए हैं केजरीवाल, बगावती विधायक कर सकते हैं नया 'खेल'

भले ही यह सभी विधायक निलंबित हैं लेकिन, व्हिप जारी होने की सूरत में इन सभी विधायकों को पार्टी का व्हिप भी मानना पड़ेगा.

क्या होता है व्हिप?

सबसे पहले व्हिप के बारे में जानना जरूरी है. व्हिप किसी पार्टी के संसद या विधानसभा के भीतर अपने सभी सांसदों या विधायकों को उपस्थित रहने के लिए बाध्य करता है. किसी पार्टी की तरफ से व्हिप जारी होने की सूरत में उस पार्टी के सभी सांसदों या विधायकों को सदन में  मौजूद रहना जरूरी होता है.

इसके अलावा व्हिप जारी होता है सदन के भीतर किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रस्ताव के दौरान वोटिंग के लिए. अगर किसी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर वोटिंग होती है और उसके लिए व्हिप जारी होता है तो उस सूरत में पार्टी के सदस्य को चाहे वो सांसद हो या विधायक, सदन के भीतर मौजूद रहकर पार्टी के पक्ष में वोटिंग करनी पड़ती है. अगर वो पार्टी के व्हिप का उल्लंघन कर पार्टी के पक्ष में वोटिंग नहीं करता है तो उसकी सदस्यता खत्म हो जाएगी.

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दलबदल विरोधी अधिनियम के अन्तर्गत व्हिप का उल्लंघन करने पर सदस्यता खत्म होने का प्रावधान है.

ऐसी सूरत में आप से निलंबित विधायक कपिल मिश्रा की बात को समझना होगा. कपिल मिश्रा ने भले ही इस बात की आशंका जताई है कि व्हिप के जरिए उनकी सदस्यता खत्म करने की साजिश हो रही है. लेकिन उनकी सदस्यता उसी सूरत में खत्म होगी जब आप की तरफ से किसी मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा में वोटिंग कराई जाए और व्हिप जारी कर दिया जाए. कपिल मिश्रा अगर व्हिप का उल्लंघन कर आप के पक्ष में वोटिंग नहीं करते हैं तो उनकी सदस्यता खत्म हो सकती है.

यहां पर यह जानना भी जरूरी है कि पार्टी से निलंबन के बावजूद व्हिप उन निलंबित विधायकों पर क्यों लागू होता है. दल-बदल विरोधी अधिनियम के अंतर्गत निलंबित विधायकों पर भी इसका असर रहता है. केवल पार्टी से निष्कासित विधायकों और सांसदों पर व्हिप का असर नहीं होता.

ऐसे में कपिल मिश्रा को न चाहते हुए भी वोटिंग की सूरत में न चाहते हुए भी केजरीवाल की शर्तों को मानना पड़ेगा वरना सदस्यता से हाथ धोना पड़ेगा. देखना है ऐसी नौबत आने पर कपिल मिश्रा क्या अपननी विधायकी बचाते है या फिर अपने वसूलों पर चलते हुए अपनी कुर्बानी देकर हीरो के तौर पर सामने आते हैं.

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