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रजनीकांत की विचारधारा BJP के करीब: कमल हासन

इस साल के अंत तक कमल हासन अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर देंगे. उनकी पार्टी राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों के खिलाफ होगी

Updated On: Sep 25, 2017 05:25 PM IST

FP Staff

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रजनीकांत की विचारधारा BJP के करीब: कमल हासन

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार कमल हासन ने एक नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने कहा है कि विचारधारा के लिहाज से उनके प्रतिद्वंद्वी रजनीकांत बीजेपी के 'अधिक करीब' हैं

कमल हासन ने सीएनएन न्यूज़ 18 को दिए इंटरव्यू में कहा 'वो (रजनीकांत) अपनी धार्मिक विचारधारा के चलते बीजेपी के अधिक करीब हैं. जबकि मैं तर्कों में यकीन रखने वाला हूं.'

कमल हासन ने कहा 'तमिलनाडु में अच्छे दिन नहीं आए हैं. मैं दूसरे राज्यों की बात नहीं करता मगर अच्छे दिन कब आएंगे?'

कमल हासन ने कहा कि वो इस साल के आखिर तक एक नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर देंगे. उनकी पार्टी राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियों के खिलाफ होगी. उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु की जनता डीएमके और एआईएडीएमके के भ्रष्टाचार और कुशासन ने ऊब चुकी है. मेरी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है.'

Kamal Hasan and Rajinikanth

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के दो दिग्गज कलाकार कमल हासन और रजनीकांत

नए साल से पहले राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने की कोशिश

तमिल सुपरस्टार ने कहा 'मैं पक्के तौर पर समय का ऐलान नहीं कर सकता लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं कि नया साल आने से पहले नई पार्टी लॉन्च कर दें. इसके लिए मैं लोगों से बात कर रहा हूं, उनसे सलाह ले रहा हूं. मगर ऐसा कब तक चलेगा मैं नहीं कह सकता.'

पिछले हफ्ते चेन्नई में अरविंद केजरीवाल से हुई उनकी मुलाकात के बाद कयास लगने लगे थे कि वो आम आदमी पार्टी से जुड़ेंगे, इस पर कमल हासन ने कहा, 'मैं उनसे मिलने नहीं गया था. वो मुझसे मिलने आए थे. ये उनकी अच्छी बात है'

उऩ्होंने कहा, 'मैं जाति व्यवस्था के खिलाफ हूं. हालांकि, मैं वामपंथी नहीं हूं मगर मैं ऐसे कुछ लोगों को पसंद करता हूं. जिन चंद लोगों से मैं प्रभावित हुआ हूं वो वामपंथी विचारधारा वाले लोग हैं.'

कमल हासन ने कहा, 'मैं अपने देश से प्रेम करता हूं. मगर ये मेरे घर से शुरू होता है फिर यह मेरे राज्य तक जाता है. निश्चित तौर पर उत्तर भारत और दक्षिण भारत में भिन्नताएं हैं. दिल्ली तमिलनाडु को नहीं समझ पाता है इसी तरह तमिलनाडु भी दिल्ली को नहीं समझता. अगर एक पक्ष अपनी ओर से अच्छा संकेत देता है तो दूसरा पक्ष उसे शंका का नजर से देखता है. यही वजह है कि किसी भी राष्ट्रीय पार्टी की तमिलनाडु में पैठ नहीं बन सकी है.'

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