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कमल हासन: राजनीतिक एंट्री को मिली शानदार ओपनिंग, लेकिन मुश्किल रास्ता आगे

अगर कमल हासन समझते हैं कि जनता उनके काफी संगठित और व्यवस्थित ढंग से आयोजित इवेंट पर फिदा हो लाइन लगाकर उनके पीछे खिंची चली आएगी, तो ऐसा सोचना गलती होगी

Updated On: Feb 22, 2018 12:23 PM IST

T S Sudhir

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कमल हासन: राजनीतिक एंट्री को मिली शानदार ओपनिंग, लेकिन मुश्किल रास्ता आगे

'सिनेमा और राजनीति के बीच ज्यादा फर्क नहीं है. दोनों ही लोगों के बारे में हैं.' कमल हासन ने यह बात रामेश्वरम में अपनी राजनीतिक पार्टी लांच करने से चंद घंटे पहले कही. कमल उनकी एक झलक पाने, हाथ मिलाने और किस्मत अच्छी हुई तो एक सेल्फी ले लेने के लिए उनकी गाड़ी के पीछे भागती बेताब भीड़ को देखकर शायद इस नतीजे पर पहुंचे थे. यह उनकी किसी फिल्म की रिलीज से पहले का प्रमोशनल टूर भी हो सकता था, जैसा कि कमल सोच सकते थे. मदुरै में जनसभा के लिए भीड़ लाने को बड़ी संख्या में किराए की गाड़ियां जुटाने की मेहनत किए बिना ही उनका स्टार दर्जा राजनीतिक बॉक्स ऑफिस पर शानदार ओपनिंग दिलाने में मददगार रहा.

लेकिन अगर कमल हासन समझते हैं कि जनता उनके काफी संगठित और व्यवस्थित ढंग से आयोजित इवेंट पर फिदा हो लाइन लगाकर उनके पीछे खिंची चली आएगी, तो ऐसा सोचना गलती होगी. तमिल टीवी न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर गुणवत्तापूर्ण चर्चाओं के चलते साल 2018 के मतदाता उस पीढ़ी से बहुत ज्यादा समझदार हैं, जिसने एमजीआर की सिनेमाई पर्दे पर गढ़ी गई नेक इंसान की इमेज पर फिदा हो अंधे होकर वोट डाला था. चार दशक पहले पर्दे के चरित्र को हकीकत समझ लिया जाता रहा होगा, लेकिन आज समझदार मतदाता भूसे से गेहूं छांटना जानता है. मदुरई, रामेश्वरम और रामनाथपुरम के नागरिकों के लिए 21 फरवरी कमल हासन को परखने की तारीख है. असली कमल हासन कौन है?

लोगों ने उन्हें मौका दिया है, जरूरी नहीं कि वोट भी दें

चुनौतीपूर्ण किरदार में फौरन ढल जाने की उनकी मशहूर काबिलियत को देखते हुए यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल था. तमिलनाडु की जनता अभी तक नायकन के वेलू नायकर, इंडियन के सेनापति, थेवर मगन के सक्तिवेल और कमल हासन द्वारा बड़ी खूबसूरती से निभाए गए ऐसे ही विभिन्न किरदारों के जरिए उन्हें पहचानती थी. लेकिन वो जानते हैं कि इनमें से कोई भी असली कमल हासन नहीं है और उनकी राजनीतिक यात्रा अभिनेता के चेहरे से मुखौटे हटाने की एक प्रक्रिया है. भीड़ की धक्कामुक्की का मतलब यह नहीं है कि लोगों ने कमल हासन को नेता मान लिया है. यह सिर्फ उनके नए लबादे की स्वीकृति है, उन्हें सुनने और बराबरी का एक मौका देने की ख्वाहिश है.

कमल खुद भी अपने आपको जनता के बीच का ही एक आदमी दिखाने के लिए बहुत सचेत थे. अपने खास अंदाज में साहित्यिक शब्दों के चयन के साथ उन्होंने रामेश्वरम में लोगों से कहा कि वह सितारा नहीं हैं, बल्कि उनके घर के चिराग हैं. 'यह आपकी जिम्मेदारी है कि मुझे रौशन करें और हवाओं से महफूज रखें.'

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काव्यात्मक तमिल के साथ भरपूर मात्रा में रूपकों के इस्तेमाल का यह अंदाज कमल की सबसे बड़ी ताकत है और कमजोरी भी. यह आम इंसान के जेहन में, जिसका तमिल का ज्ञान कामचलाऊ है, हीनभावना को पैदा करता है. कमल को समझना होगा कि उनकी यह तमीज बहुत शशि थरूराना है, और उनको अपना संदेश सभी तक पहुंचाने के लिए आम तमिल द्वारा बोली जाने वाली तमिल बोलनी होगी. मीडिया जाहिर वजहों से नए नेता के उदय से उत्साहित है. यह हकीकत है कि कॉलीवुड + राजनीति = टीआरपी होता है, इस मामले में हकीकत यह भी है कि यह राजनीतिक अवतार ऐसे समय में आया है जब बड़ी संख्या में लोगों का राजनीतिक तबके से मोहभंग हो रहा है. ऐसी घड़ी में कमल हासन या रजनीकांत यहां विकल्प पेश कर रहे हैं. तमिलनाडु सुपरमार्केट में आकर्षक रैपर में एक नया उत्पाद. ज्यादातर मीडिया रहमदिली के साथ सवाल पूछ रहा है कि क्या कमल बिना अभिनेता-भक्ति का सहारा लिए तरसती जनता के वास्ते राज्य में बदलाव ला सकते हैं?

Actor Kamal Haasan at  Rameswaram

लेकिन पार्टियों में कमल का डर भी है

राजनीतिक हलकों में कमल हासन के बारे में जरा अलग राय है. पहली प्रतिक्रिया में उन्हें वास्तविक राजनीति में इंटर्न कहकर खारिज कर दिया गया. लेकिन नेताओं को थोड़ा सा कुरेदिए तो फौरन उनका डर सामने आ जाता है कि यह पार्टी उनके दल पर विपरीत असर डालेगी. वह जानते हैं कि तमिलनाडु की राजनीति, लंबे समय से कॉलीवुड से कैंपस सलेक्शन करती आई है और परंपरागत राजनेता कमल और रजनीकांत की साथ-साथ एंट्री देख मन-ही-मन कुढ़ रहे हैं.

शायद यही वजह है कि विभिन्न तमिल नेता कमल और रजनीकांत को अपमानित करने के लिए बॉटनी- वह भी बड़े अतार्किक तरीके से- का सहारा ले रहे हैं. डीएमके के एमके स्टालिन, जिन्हें आशंका है कि कमल का द्रविड़वाद उनकी पार्टी से टकराएगा, कमल और रजनीकांत का नाम लिए बिना उन्हें आकर्षक कागजी फूल बताते हैं. कमल हासन ने इसका जवाब यह कह कर दिया- 'मैं फूल नहीं हूं, मैं बीज हूं, मुझे जमीन में बो दो, मैं उग आउंगा.' एआईएडीएमके के डी जयकुमार ने इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए हसन को जेनेटिकली मॉडिफाइड बीज करार दिया, जो भारत में नहीं उग सकता. बीजेपी के राज्य अध्यक्ष तमिलिसाई सुंदरराजन ने कमल को विकास-रुद्ध बोनसाई करार दिया.

Actor Kamal Haasan at  Rameswaram

अगर सत्तारूढ़ पार्टी घबराई हुई है तो उसने इसका प्रदर्शन भी कर दिया. इसने एक दक्षिणपंथी संगठन हिंदू मुन्नानी की तरफ से उठाई गई आपत्ति का इस्तेमाल कर कमल हासन को रामेश्वरम में एपीजे अब्दुल कलाम के स्कूल जाने से रोकने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को लगा दिया. टीम कमल ने इसे मुद्दा नहीं बनाया और कमल ने सिर्फ इतना कहा कि वो उन्हें स्कूल जाने से रोक सकते हैं, लेकिन सीखने से नहीं रोक सकते. वैसे यह फैसला सही था कि एक स्कूल का अर्ध-राजनीतिक चर्चा के लिए इस्तेमाल ठीक नहीं है, लेकिन एआईएडीएमके सरकार भूल गई कि वह खुद हाल ही में एमजीआर के शताब्दी समारोह में स्टूडेंट्स को घंटों लाइन में खड़ा करने की दोषी है.

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तमिलनाडु में राजनेताओं और अभिनेताओं को भारी-भरकम उपाधियों से संबोधित किए जाने की परंपरा का पालन करते हुए उलागानायकन (ब्राह्मांड का हीरो) कमल हासन के राजनीतिक अवतार को नया नाम दिया जा रहा है- नम्मावर (हमारा आदमी). संयोग से नम्मावर उनकी 1994 की फिल्म का भी नाम था, जिसने सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था. कमल हासन के समर्थकों ने सुनिश्चित किया कि उनके पोस्टर मदुरई की हर दीवार पर दिखाई दें, लेकिन असल चुनौती अब शुरू होती है- ईंट से जोड़ कर पार्टी को खड़ा करने की.

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