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कैलाश विजयवर्गीय बने रहेंगे विधायक, निर्वाचन के खिलाफ याचिका खारिज

पराजित कांग्रेस उम्मीदवार ने आरोप लगाया था कि विजयवर्गीय ने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए महिलाओं को पैसे बांटे थे

Updated On: Nov 03, 2017 09:10 PM IST

Bhasha

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कैलाश विजयवर्गीय बने रहेंगे विधायक, निर्वाचन के खिलाफ याचिका खारिज

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर जिले के महू क्षेत्र के विधायक कैलाश विजयवर्गीय को एमपी हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली. हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने वर्ष 2013 के चुनावों में विधायक के रूप में उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने की गुहार वाली याचिका खारिज कर दी.

न्यायमूर्ति आलोक वर्मा ने विजयवर्गीय के निकटतम चुनावी प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस उम्मीदवार अंतरसिंह दरबार की ओर से दायर याचिका को नामंजूर करने का फैसला सुनाया.

अदालत ने सितंबर में इस मामले की सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. दरबार ने अपनी याचिका में कहा था कि विजयवर्गीय ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए भ्रष्ट तरीकों से चुनाव जीता था.

लिहाजा महू के विधायक के रूप में चार वर्ष पहले के उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया जाए.

अब तक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं कैलाश विजयवर्गीय 

पराजित कांग्रेस उम्मीदवार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि विजयवर्गीय ने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं को लुभाने के लिए महिलाओं को पैसे बांटे थे. बीजेपी उम्मीदवार के प्रतिनिधि की ओर से मतदाताओं को शराब भी बांटी गई.

शुक्रवार को इंदौर में विजयवर्गीय के वकील शेखर भार्गव ने संवाददाताओं से कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ दरबार की ओर से लगाए गए आरोप अदालत में साबित नहीं हो सके. मामले में करीब 100 तारीखों पर सुनवाई हुई.

विजयवर्गीय ने वर्ष 2013 के विधानसभा चुनावों में दरबार को 12,216 वोट से हराया था. इसके साथ ही, उन्होंने इंदौर जिले की अलग-अलग सीटों से लगातार छह बार विधानसभा चुनाव जीतकर अजेय रहने का रिकॉर्ड कायम किया था.

दिलचस्प बात है कि वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में भी विजयवर्गीय और दरबार महू क्षेत्र में ही आमने-सामने थे. इन चुनावों में विजयवर्गीय ने दरबार को 9,791 मतों से पटखनी दी थी.

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