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पीएम अगर ईमेल पर इंटरव्यू देते रहे तो पत्रकारों की नौकरी चली जाएगी: शिवसेना

शिवसेना ने आरोप लगाया कि मोदी ने प्रधान मंत्री बनने के बाद से एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है. यह उनके 'व्यक्तित्व को शोभा' नहीं देता क्योंकि 2014 के लोकसभा तक मोदी पत्रकारों के 'दोस्त' थे.

Updated On: Aug 13, 2018 08:20 PM IST

FP Staff

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पीएम अगर ईमेल पर इंटरव्यू देते रहे तो पत्रकारों की नौकरी चली जाएगी: शिवसेना

पीएम द्वारा ईमेल पर इंटरव्यू दिए जाने की आलोचना खुद बीजेपी सहयोगी शिवसेना ने कर दी. शिवसेना का आरोप है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को इंटरव्यू देने के लिए 'ई-मेल का शॉर्ट कट' रास्ता चुना है. साथ ही इसे 'प्रोपगेंडा' करार दिया है.

पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में सेना ने लिखा है कि पीएम को ईमेल के बजाए लोगों के सवालों का जवाब देने के लिए 'फेस टू फेस' इंटरव्यू देना चाहिए. कुछ मीडिया संगठनों द्वारा पीएम के इंटरव्यू छापे गए. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सेना ने आरोप लगाया कि मोदी ने प्रधान मंत्री बनने के बाद से एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है. यह उनके 'व्यक्तित्व को शोभा' नहीं देता क्योंकि 2014 के लोकसभा तक मोदी पत्रकारों के 'दोस्त' थे.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शिवसेना ने कहा, 'लेकिन प्रधान मंत्री बनने के बाद, उन्होंने खुद के चारों ओर एक पिंजरा बना लिया है.'

सामाना के संपादकीय में कहा गया, 'अगर पीएम इसी तरह ई-मेल के जरिए इंटरव्यू देना जारी रखेंगे तो पत्रकारों की नौकरी चली जाएगी. फिर पत्रकारों को नौकरी दिलाने का एक और काम उनके जिम्मे आ जाएगा.'

सेना ने कहा, 'प्रधान मंत्री मोदी ने अचानक ही ई-मेल के द्वारा इंटरव्यू दिया है. इसका मतलब है कि वे पत्रकारों के आमने-सामने नहीं थे. पत्रकारों ने प्रधान मंत्री कार्यालय को प्रश्न भेजे और उन्हें लिखित उत्तर दिए गए.' पार्टी ने कहा, 'दूसरे शब्दों में, इसे प्रोपगेंडा या प्रचार कहा जाता है.'

 

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