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लालू से करीबी दिखाकर किसे 'सेट' करना चाहते हैं पूर्व सीएम मांझी

मांझी ने कहा कि फालतू बातों से एनडीए को घाटा होगा. हमने एनडीए के भाइयों से कहा है कि लालू यादव के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी बंद करें

Updated On: Jan 22, 2018 03:11 PM IST

Anand Dutta
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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लालू से करीबी दिखाकर किसे 'सेट' करना चाहते हैं पूर्व सीएम मांझी

बिहार के पूर्व सीएम और हिन्दुस्तान अवामी मोर्चा सेक्युलर (हम) पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी फिलहाल तो एनडीए के साथी हैं. लेकिन उनके बयानों से लगता है कि वह विरोधी खेमें में भी अपनी जगह सुरक्षित रखना चाहते हैं. ताकि जब बिहार की राजनीति हिचखोले खाने लगे तो सुरक्षित नाव पर सवार हो सकें. आए दिन नीतीश कुमार पर अप्रत्यक्ष तौर पर निशाना साधते रहते हैं. हालांकि जीतन राम मांझी इसे स्वस्थ राजनीति के तहत की गई बयानबाजी कहते हैं. लेकिन जेडीयू के प्रवक्ता इसे विरोध के तौर पर ही लेते हैं.

बीते दिनों 'हम' के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मंत्री वृषिण पटेल रांची पहुंचे थे. जहां सीबीआई कोर्ट में उन्होंने लालू से मुलाकात की. जैसे ही ये खबर मीडिया में आई, बिहार की राजनीति में चर्चाओं का दौर गरम हो गया. जीतन राम मांझी ने फ़र्स्टपोस्ट के साथ पूरी स्थिति पर अपना पक्ष रखा.

हमने उनसे पूछा कि जब वृषिण पटेल को मिलने भेज दिया तो खुद क्यों नहीं चले गए? उन्होंने कहा कि ' ये बात तो मीडियावाले अपने नजरिए से बता रहे हैं. सच्चाई इसमें यह है कि हमलोगों ने वृषिण पटेल से कहा था कि रांची जाइए, वहां हमारे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगदीश शर्मा जेल में बंद हैं. उनसे मिलने भेजा था.

Ranchi: Former Bihar chief minister Lalu Prasad Yadav arrives at the special CBI court in Ranchi from Birsa Munda Jail, in Ranchi on Wednesday. PTI Photo (PTI1_10_2018_000030B)

वहां इत्तेफाक था कि लालू यादव जी से भेंट हो गई. एक ही गाड़ी से लालू यादव, जगदीश शर्मा, राणा आए थे. गाड़ी की अगली सीट पर लालू यादव बैठे थे. पहले वही उतरे. लालू यादव उनके नेता रहे हैं, वृषिण पटेल उनके मंत्रिमंडल में काम किए हैं, तो हाय हेलो नहीं करेंगे क्या? यह जरूरी भी था.

नमस्कार पाती के बाद वह जगदीश शर्मा से बात करने चले गए. जहां उनसे विस्तार से बातें हुई. इसको राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से मिलने गए थे, लालू से मिलना केवल इत्तेफाक था.'

गैरजरूरी है लालू परिवार के खिलाफ बयानबाजी 

एक सवाल कि आप लालू के परिवार के खिलाफ चल रही कार्रवाई को, बयान को गैरजरूरी बता चुके हैं. क्या आप गठबंधन करने जा रहे हैं? मांझी ने कहा- ' नहीं हमने ऐसा नहीं कहा है. हमने कहा है कि जो आदमी किसी भी मुकदमा में फंसा है, उस पर इनक्वायरी चल रही है, उस पर जांच के बाद एजेंसी अपनी राय देगी.

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इधर जांच चल रही है है और हम कह रहे हैं कि उनको जेल जाना होगा, सजा भुगतेंगे, वह पाप कर रहे हैं. यह सब फालूत बात है. जल्दबाजी है. राजनीतिक दृष्टिकोण से ऐसा कहा जाना गलत है. अगर जांच नहीं होती, तब मांग करते तो कोई बात थी. जांच के दौरान जेडीयू वालों की तरफ से ऐसा कहा जाना पूरी तरह गलत है.'

हमने पूछा कि आप सरकार में हैं, लालू विपक्ष में हैं, ऐसे में उनके प्रति हमदर्दी जताना क्या इशारा कर रहा है. पूर्व सीएम का कहना था कि यह हमदर्दी नहीं, यथार्थ है. अगर मैं लालू के खिलाफ बोलूंगा तो राजनीतिक माइलेज मिलेगा. लेकिन जो आदमी जेल में है, उसी को और प्रताड़ित करने से लोग समझते हैं कि एनडीए वाले जानबूझ कर ऐसा कर रहे हैं. हम तो एनडीए का बचाव कर रहे हैं.

कानून अपना काम करेगी. इन फालतू बातों से एनडीओ को घाटा होगा. हमने एनडीए के भाइयों से कहा है कि लालू यादव के खिलाफ इस तरह की बयानबाजी बंद करें.

nitish kumar jitanram manjhi

हमने पूछा कि एनडीए वाले कह रहे हैं कि आप मौका देख रहे हैं. चिढ़ते हुए मांझी कहते हैं- नहीं यह केवल मीडिया की उपज है. एनडीए वालों से हमारी लगातार बातचीत हो रही है. आज (रविवार) भी दिल्ली से आए कुछ वरिष्ठ अधिकारियों संग बैठक हुई है. केवल मीडिया इधर की बात को उधर कर रही है. हम एनडीए में हैं, एनडीए में रहेंगे.

शराबबंदी फ्लॉप है, ये बात मैं कहता रहूंगा 

शराबबंदी को मांझी लगातार फ्लॉप कहते आ रहे हैं. नीतीश कुमार के इस महत्वाकांक्षी निर्णय की आलोचना उनके सामने भी कर दे रहै हैं. लेकिन खुलकर अदावत नहीं कर रहे. मांझी चालाकी अपने बयानों का बचाव करते हैं. उनके मुताबिक- हम तो रामायण नहीं पढ़ते हैं, लेकिन उसकी एक चौपाई यहां कहना चाहूंगा कि सचिव, वैद्य अरु मित्र जो प्रिय बोलहिं भय आस, राज धर्म तंत्र तिन कर, बेगही बोलहिं नाश. सच्चा मित्र वही है जो मित्र के गलती करने पर उसे बताए, उसको सुधारे, आज नीतीश कुमार जी शराबबंदी और दहेज प्रथा के खिलाफ मानव शृंखला बनाई, मैंने उसका समर्थन किया.

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लेकिन इसके इतर मेरा कहना है कि शराब बंदी में रिजर्वेशन है. हम तो आज भी कहते हैं कि शराबबंदी बिहार में सफल नहीं हो पा रहा है. कारण है कि शराब तस्कर आज भी लगे हैं. एक बोतल दारू लेनेवाला (एक मिनट जहाज जा रही है, रुकिए) हां...जो पकड़ाया वह आज जेल में है, 70 हजार से अधिक लोग जेल में हैं. इसमें 60 हजार से अधिक गरीब लोग हैं. परिवार में वही कमाने वाले थे, पढ़ाई लिखाई वाले सब जेल में बंद हो गए हैं.

मेरा नीतीश से कहना है कि आप बिजनेस करनेवालों के साथ जो करना चाहते हैं, जो सजा देना चाहते हैं, करें. आधा लीटर, एक लीटर पीनेवालों को इस तरह की सजा मत दीजिए. दोनों को बराबर सजा नहीं मिलना चाहिए. यह विरोध नहीं है. एक भाई को, मित्र को सलाह है. उनको मानना है मानें, नहीं मानना है ना मानें. मैं तो गलत को गलत कहता रहूंगा.

क्या ये माना जाए कि आगामी चुनाव में आप, उपेंद्र कुशवाहा जी और बीजेपी के नाराज सांसद लालू के साथ जा रहे हैं. मीडिया पर हमलावर होते हुए मांझी कहते हैं- ये अलग बात है, राजनीतिक बातें हैं, मीडिया में इसे कहकर हम थोड़े करेंगे. सरकार के नीतिगत निर्णय में साथ हैं, दैड डज नॉट मीन कि हर निर्णय को समर्थन दे देंगे. आज हमारे कहने पर हजारों लोग जमा हो जाते हैं. सुनते हैं. वही न कल वोट टर्न करेगा. वही ना कल हम एनडीए को वोट दिलाएंगे. परसों ही नीतीश कुमार से फोन पर बात हुई है. सब सही है.

बावजूद इसके मैं नीतीश कुमार के मन की दवा नहीं दे सकता हूं. कल अगर एनडीए साथ हादसा हो गया तो और अगर हम बता नहीं पाए तो उस वक्त तकलीफ होगी कि कुछ कर नहीं पाए. यह सुधारात्मक है, आलोचनात्मक नहीं. आप लोग अपने टीआरपी के लिए इसे आलोचनात्मक मान रहे हैं. हम तो सीएम रहते कह रहे थे कि घोटाला हो रहा है, मेरे पास पैसा पहुंच रहा है, इसका मतलब यह थोड़े है कि हम पैसा ले रहे हैं. जो सच्चाई था, बता दिए. फिलहाल घोटालों पर जांच एजेंसी क्या करती है, उसका इंतजार करना चाहिए.

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