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झारखंड: धर्मांतरण मुद्दे पर सियासी कार्ड खेल कर अपने किस मिशन को पूरा करने में लगी है BJP?

मिशन के मिशन को रोकने के लिए बीजेपी ने जो सियासी खेल शुरू किया है उसका सियासत पर असर पड़ना तय माना जा रहा है

Brajesh Roy Updated On: Jul 09, 2018 02:06 PM IST

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झारखंड: धर्मांतरण मुद्दे पर सियासी कार्ड खेल कर अपने किस मिशन को पूरा करने में लगी है BJP?

बदलते राजनीतिक हालात 2019 के लिए सूरते ए हाल अभी से बयां करने लगे हैं. वोट बैंक पर सेंधमारी करते हुए अपने पक्ष में हवा बनाने में राजनीतिक दल गोलबंद होने लगे हैं. दिलचस्प राजनीतिक समीकरण आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में भी दिखने लगा है. राज्य गठन के बाद से पहली दफा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज बीजेपी को अपनी कुर्सी की चिंता स्वाभाविक है और इसके लिए अब वो सधे कदमों से आगे बढ़ने भी लगी है. इस बाबत बीजेपी का पहला मिशन है मिशन के मिशन को रोकना ....

अगड़ों और पिछड़ों को अपना समर्थक मानने वाली बीजेपी की निगाह सरना आदिवासी वोट बैंक पर टिकी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंड विकास मोर्चा का दंभ भी बीजेपी तोड़ने को आतुर है. इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हुए बीजेपी ने एक बड़ा निर्णय लिया है 'धर्मांतरण को आरक्षण नहीं'. यानि अब झारखंड में धर्म परिवर्तन करने वालों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा.

निशाना सीधा ईसाई समुदाय पर है. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य में मसीही समुदाय में सरकार के इस निर्णय से बेचैनी बढ़ गई है. मसीही समुदाय गोलबंद होने लगे हैं. मूल सरना आदिवासी बीजेपी के इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत कर रहे हैं. हिंदू समाज भी अपना समर्थन जता रहा है.

बीजेपी जानती है कि आदिवासियों का कुल प्रतिशत राज्य में 27 है और इसमें आधी आबादी ईसाई आदिवासियों की है. ईसाई आदिवासी बीजेपी को वोट नहीं देंगे, वे विपक्ष के साथ हैं. दूसरी तरफ झामुमो और झाविमो की पकड़ जो ईसाई आदिवासियों के साथ मूल सरना आदिवासी समाज पर है, उसे तोड़ना भी बीजेपी बेहद जरूरी मानती है. यही वजह है कि बीजेपी प्रतिबद्ध है 'मिशन के मिशन को रोकने के लिए'.

BJP Mission (1)

बीजेपी को अपने इस मिशन के लिए हाल फिलहाल में कई ऐसे उदाहरण भी मिले जिसने  समाज के सामने ईसाई मिशन की छवि को धूमिल करने का काम किया है. कई उदाहरण बीजेपी सरकार और समाज के सामने आए जिसने ईसाई समुदाय को राज्य में कठघरे में खड़ा करने का काम किया है, मसलन ...

1. खूंटी जिला में पत्थलगड़ी की आड़ में आदिवासियों का संविधान को चुनौती देते हुए स्वायतता की मांग रखना.

2. खूंटी जिला में ही पत्थलगड़ी की आड़ में अवैध अफीम की खेती में भी ईसाई आदिवासी युवाओं का नाम सामने आना.

3. खूंटी जिला में ही एक मिशन स्कूल में नुक्कड़ नाटक कर रही पांच महिला युवतियों को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म मामले में स्कूल के पादरी पर सवाल खड़ा होते हुए फादर अल्फांसो का गिरफ्तार होना.

4. इसी सप्ताह नवजात बच्चे की खरीद फरोख्त का सीधा आरोप रांची स्थित मदर टेरेसा की संस्था मिशनरिज ऑफ चैरिटी पर लगना और इस मामले में दो महिला नन का गिरफ्तार होना.

5. दुमका जिला के शिकारिपाड़ा में चोरी छिपे घुस कर धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन देने के आरोप में 25 ईसाई धर्म प्रचारकों का गिरफ्तार होना. गिरफ्तारी से पूर्व स्थानीय ग्रामीणों का रात भर धर्म प्रचारको को बंधक बनाया जाना.

BJP Mission (8)

अब ईसाई समुदाय ने भी खोला बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा

मतलब साफ है कि बीजेपी ने आदिवासी ईसाई समाज को निशाने पर लेने का मन बनाया और सामाजिक तौर पर कुछ ऐसे घटनाएं राज्य में घटित हुई जिससे बीजेपी सरकार को कारण भी मिल गया. आलम यह है कि ईसाई समुदाय ने भी बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

रविवार के दिन रांची में सेलेब्रेशन हॉल में ईसाई समुदाय के लोगों ने बैठक की. इस बैठक में ईसाई धर्म को मानने वाले नेता और सामाजिक संगठन के लोग भी जुटे. कहने को तो इस बैठक में चर्चा आदिवासी हितों की रक्षा को लेकर थी. चर्चा हुई भी लेकिन बैठक में 90 फीसदी लोग वे जुटे थे जो आदिवासी ईसाई धर्म के थे.

बैठक में मौजूद फादर स्टेन स्वामी ने खुले तौर पर कहा कि बीजेपी सरकार मसीही समुदाय को टार्गेट कर रही है. 'धर्मांतरण को आरक्षण नहीं' मुद्दा लाकर राज्य सरकार संविधान की अवमानना का कार्य भी करने लगी है. मसीही समाज राज्य सरकार की इन नीतियों के खिलाफ न्यायपालिका का दरवाजा भी खटखटा सकती है. इसी बैठक में तेज तर्रार आदिवासी समाज की महिला नेता दयामनी बारला ने भी कहा कि रघुवर सरकार धर्म के नाम पर आदिवासी समाज को बांटने का एक गंदा खेल खेल रही है.

सरना हो या ईसाई यहां के आदिवासी आदिवासी ही हैं. इसी बैठक में शामिल और मुख्य आयोजक झारखंड विकास मोर्चा के नेता राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि रघुवर सरकार धर्मांतरण मुद्दा को आगे लाकर आदिवासी समाज को तोड़ना चाहती है. ताकि कुछ का वोट उसे आगे चुनाव हासिल हो सके. लेकिन रघुवर सरकार के इस इरादे को आदिवासी समाज सफल नहीं होने देगा.

 

BJP Mission (2)

बीजेपी का करारा जवाब

दूसरी तरफ इस मुद्दे पर बीजेपी के विरोध करने वालों को बीजेपी ने करारा जवाब देने की कोशिश की. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने सीधे तौर पर कहा कि बहला फुसला कर मूल सरना आदिवासियों को ईसाई बनाया जा रहा है. एक साजिश के तहत मिशन के लोग अपने मिशन को कामयाब करने के लिए झारखंड में लगातार घूम रहे हैं. हमारी सरकार चाहती है कि धर्म परिवर्तन न हो. यहां रह रहे सभी लोग स्वच्छ और सामाजिक सौहाद्र के बीच रहें, यही राज्य की खुशहाली है.

गौरतलब है कि एक महीने पहले ही राज्य के मुखिया रघुवर दास से बीजेपी ने दबाव बनाते हुए आग्रह किया था कि धर्मांतरण करने वालों को राज्य में आरक्षण का लाभ नहीं मिले, इसे लेकर एक कानून बनाया जाए. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पार्टी की इस मांग की फाइल को राज्य के महाधिवक्ता अजित सिन्हा के पास मशवरे के लिए भेजा था. खबर है कि महाधिवक्ता ने इसपर पार्टी की राय से सहमति जताते हुए अपनी राय दे दी है.  ऐसे में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले मॉनसून सत्र में रघुवर सरकार इसपर चर्चा करा सकती है

बहरहाल झारखंड में बीजेपी धर्मांतरण मुद्दे को लेकर अगले चुनाव के लिए जो सियासी कार्ड खेल रही है उसका राज्य की सियासत पर असर पड़ना तय माना जा रहा है. बड़ी बात यह भी है कि मूल सरना आदिवासी अपने तरीके से बीजेपी की इस मांग को समर्थन देने लगे हैं. सबकी निगाहें फिलहाल राज्य की रघुवर सरकार पर टिकी हैं. मतलब साफ है कि एक दिलचस्प मोड झारखंड की राजनीति में आने वाला है यह कहा जा सकता है.

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