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बिहारी दंगल: गुजरात की 'जिग्नेश' क्रांति अब बिहार में 'श्याम' पंख लगाकर उड़ेगी?

क्या दिलचस्प राजनीति है जो जिग्नेश के निशाने पर बीजेपी है और श्याम रजक के निशाने पर अपनी ही सरकार

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 12, 2018 05:21 PM IST

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बिहारी दंगल: गुजरात की 'जिग्नेश' क्रांति अब बिहार में 'श्याम' पंख लगाकर उड़ेगी?

क्या दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और जेडीयू महासचिव श्याम रजक साथ-साथ आएंगे? क्या दोनों एक साथ दलितों के मुद्दे को और धार देंगे? ऐसा संभव है क्योंकि दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें लगने लगी हैं.

जेडीयू महासचिव श्याम रजक इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि हर हाल में  उन्हें दलित उत्थान को लेकर आगे बढ़ना है. दलितों के हितों की रक्षा के लिए श्याम रजक को किसी से सहयोग लेने में कोई परहेज नहीं है. वो सभी दलों के दलित सांसद और विधायक के अलावा बाकी नेताओं से अपने अभियान में शामिल होने की अपील कर रहे हैं. श्याम रजक की जिग्नेश मेवाणी के साथ मुलाकात को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.

जिग्नेश के साथ बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के महासचिव श्याम रजक का खड़ा होना एक साथ कई सवाल खड़ा कर रहा है. यह अलग बात है कि दिल्ली में श्याम रजक जिग्नेश के साथ मंच पर नहीं थे लेकिन जिग्नेश को अपने साथ जोड़कर दलितों के मुद्दों को नई धार देने की उनकी कोशिश ने आगे की राजनीति और खासकर बिहार की राजनीति में खलबली मचा दी.

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श्याम रजक की दिल्ली में जिग्नेश मेवाणी के साथ मुलाकात हुई जिसके बाद उन्होंने फर्स्टपोस्ट से बातचीत में दलितों के मुद्दे को लेकर अपनी ही पार्टी की सरकार को कटघड़े में खड़ा कर दिया. श्याम रजक ने कहा ‘चाहे कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए हो या फिर बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए, सबने दलितों को केवल यूज किया है, सबने दलितों से सिर्फ फायदा लिया है लेकिन किसी ने दलित समुदाय को लेकर कुछ नहीं किया. मूल स्वभाव आज भी पड़ाव पर पड़े हैं.’

उन्होंने सभी पार्टियों पर दलित समुदाय के लोगों को झंडा-डंडा थमा देने और उनका इस्तेमाल वोट बैंक पॉलिटिक्स के तौर पर ही करने का आरोप भी लगाया.

shyam rajak

श्याम रजक जेडीयू के दलित समुदाय के कद्दावर नेता हैं. नीतीश कुमार की सरकार में पहले मंत्री भी रह चुके हैं. लेकिन, इस वक्त जेडीयू में रहते हुए दलितों के मुद्दे पर वो एक अलग आंदोलन चलाने की तैयारी में हैं. इसकी शुरुआत बाबा साहब की जयंती 14 अप्रैल से करने जा रहे हैं.

14 अप्रैल को पटना में 'भीम यात्रा'

बिहार की राजधानी पटना में 14 अप्रैल को भीम यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं. हालाकि उनका कहना है कि पहले यह कार्यक्रम पटना में ही होगा लेकिन आने वाले दिनों में प्रदेश भर में इस आंदोलन को जनांदोलन बनाने की कोशिश होगी.

गुजरात से निर्दलीय विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी को साथ लेने से भी उन्हें परहेज नहीं है. ये पूछे जाने पर कि जिग्नेश मेवाणी तो एनडीए के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, श्याम रजक इस पर कोई आपत्ति नहीं जताते. वो हर पार्टी के सांसदों और विधायकों के साथ-साथ और दूसरे नेताओं को भी साथ आने की अपील कर रहे हैं.

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लेकिन जिग्नेश मेवाणी के साथ जेडीयू के महासचिव का आना बिहार की सियासत को लेकर नई पटकथा लिखने वाला हो सकता है क्योंकि जिग्नेश के निशाने पर बीजेपी है और श्याम रजक के निशाने पर अपनी ही सरकार.

श्याम रजक ने दलितों के लिए नीतीश सरकार के कार्यों को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने अपनी ही पार्टी की सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा ‘मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दलितों के लिए योजनाएं तो बहुत बनाईं लेकिन उसका फलाफल नहीं हुआ. अब इसकी समीक्षा की जरूरत है.’

उन्होंने सवाल खड़ा किया कि स्कूलों में शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा है, इंडस्ट्री में भी उस तरह का सुधार नहीं हो पाया जैसा होना चाहिए था. ऐसे में दलित समुदाय के लोगों को भी रोजगार में परेशानी हो रही है.

पटना में स्लम की राजनीति

खासतौर से राजधानी पटना के स्लम एरिया में विकास नहीं होने को लेकर उन्होंने अपनी नाराजगी जताई. श्याम रजक ने कहा कि पटना में 108 स्लम एरिया हैं, जहां साफ पीने का पानी नहीं मिल रहा है. वहां का पानी जहरीला है इसलिए वहां दिव्यांग बच्चे पैदा हो रहे हैं.

जेडीयू के इस दलित नेता को एससी/एसटी एक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के बाद भी सरकार पर भरोसा नहीं हो रहा है. श्याम रजक ने इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केवल फेस सेविंग से कुछ नहीं होने वाला बल्कि इसे 9वीं अनुसूचि में शामिल किया जाए, जिससे इसमें बदलाव नहीं किया जा सके.

हालाकि जेडीयू की तरफ से अपनी ही पार्टी नेता के उठाए गए सवाल पर सफाई आई है. जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत में दावा किया कि नीतीश कुमार की सरकार ने जिस तरह से दलित समुदाय के विकास के लिए काम किया है, वो पूरे देश में एक उदाहरण है.

jignesh mevani

उन्होंने कहा कि ‘दलित समुदाय के लोगों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने में नीतीश कुमार ने बड़ी भूमिका निभाई है, जिसमें पंचायती राज में आरक्षण के जरिए दलितों के हाथों में पंचायत की सत्ता पहुंचना है. हर गांव में विकास मित्र के जरिए दलित समुदाय के लोगों और उनके इलाके के विकास के लिए काफी काम हुआ है, जिसके बाद अब दलित समुदाय के बच्चे ज्यादा तादाद में स्कूल जाने लगे हैं.’

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दरअसल, श्याम रजक काफी लंबे वक्त से पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे हैं. कांग्रेस से जेडीयू में आए अशोक चौधरी को मिल रहे ज्यादा महत्व से भी उन्हें परेशानी है. दलित समुदाय से आने वाले अशोक चौधरी के जेडीयू की बिहार इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की भी चर्चा है. ऐसे में श्याम रजक जैसे नेता इस वक्त अपने-आप को उचित जगह नहीं दिए जाने से नाराज चल रहे हैं.

मौजूदा दौर में श्याम रजक की अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ दलित मामलों को लेकर की गई टिप्पणी और अलग मंच से दलितों के उत्थान के मुद्दे को उठाना, उनकी इसी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. अगर श्याम रजक के मंच पर बिहार में जिग्नेश मेवाणी भी साथ आ गए तो बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ सकती है क्योंकि बिहार में दलितों की राजनीति करने वाले रामविलास पासवान से लेकर जीतनराम मांझी तक पहले से मौजूद हैं.

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