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JDU का बड़ा बयान- बिहार में RJD और BJP के बीच मैच फिक्स्ड है

2005 के रेलवे होटल के बदले जमीन देने के घोटाले में रेलवे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी के मुद्दे को उछालते हुए जेडीयू की तरफ से कहा गया है कि ऐसा लग रहा है कि बीजेपी और आरजेडी के बीच मैच फिक्स्ड है

FP Staff Updated On: Jul 19, 2018 09:58 AM IST

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JDU का बड़ा बयान- बिहार में RJD और BJP के बीच मैच फिक्स्ड है

बिहार में सीट बंटवार के मसले पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के सीएम नीतीश कुमार की मुलाकात के बाद लग रहा था कि दोनों पार्टियों के बीच का तनाव खत्म हो गया है. लेकिन ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा है. जेडीयू की तरफ से बीजेपी को निशाने पर लेते हुए बड़ा हमला किया गया है. जेडीयू की तरफ से कहा गया है कि बीजेपी और आरजेडी के बीच मैच फिक्स्ड है. 2005 के रेलवे होटल के बदले जमीन देने के घोटाले में रेलवे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी के मुद्दे को उछालते हुए जेडीयू की तरफ से कहा गया है कि ऐसा लग रहा है कि बीजेपी और आरजेडी के बीच मैच फिक्स्ड है.

जेडीयू की तरफ से कहा गया है कि रेलवे अधिकारी भूपेन्द्र कुमार अग्रवाल के केस चलाने में देरी की जा रही है. इस देरी का सीधा फायदा मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव को हो रहा है. भूपेन्द्र अग्रवाल फिलहाल रेलवे बोर्ड के एडिशनल मेंबर हैं.

जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा है कि मामले में देरी की वजह से आरजेडी के तीनों नेता पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होंगे. इस मामले में तीनों के खिलाफ आईपीसी की जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया है, वो गैरजमानती अपराध के दायरे में आता है. सीबीआई ने 16 अप्रैल को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है. तीनों नेताओं की इस मामले में गिरफ्तारी हो सकती है.

संजय सिंह ने कहा है, ऐसा लग रहा है कि बीजेपी और जेडीयू के बीच मैच फिक्स्ड हो गया है. आरोप पत्र दाखिल करने में देरी की जा रही है. जिसकी वजह से सुनवाई नहीं शुरू हो सकी है.

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने रेलवे बोर्ड को 14 अप्रैल को चिट्ठी लिखी थी. जिसमें भूपेन्द्र अग्रवाल के खिलाफ केस चलाने की अनुमति मांगी गई थी.

आमतौर पर 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने की स्वीकृति दी जाती है. जिसके बाद ये कोर्ट का विशेषाधिकार है कि वो कब सुनवाई शुरू करे. लेकिन इस मामले में ये अब तक पेंडिंग है.

क्या है पूरा मामला?

2005 में जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. झारखंड के रांची और ओडिशा के पुरी में रेलवे के दो होटलों को मेसर्स सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया था. आरोप है कि होटल को लीज पर देने के लिए टेंडर के नियमों में घालमेल किया गया था. होटल लीज देने के बदले में डिलाइट मार्केटिंग कंपनी को पटना में 3 एकड़ जमीन मिली. ये जमीन चाणक्य होटल के डायरेक्टर विनय कोचर ने 1 करोड़ 47 लाख में बेची जबकि बाजार में उस वक्त इस जमीन की कीमत करीब दो करोड़ रुपए थी.

डिलाइट मार्केटिंग कंपनी आरजेडी सांसद प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी सरला गुप्ता के नाम पर थी. सीबीआई का कहना है कि ये कंपनी लालू परिवार की बेनामी कंपनी थी. 2014 में डिलाइट मार्केटिंग कंपनी के शेयर लारा प्रोजेक्ट के नाम ट्रांसफर कर दिए गए. लारा प्रोजेक्ट कंपनी में लालू की पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी डायरेक्टर हैं.

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