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जीवन में कभी बिना शर्त ‘प्रेम’ नहीं मिला: जे. जयललिता

जयललिता निजी तौर पर बहुत ही शर्मीली और खुद में सीमित रहने वाली शख्स हैं.

Updated On: Dec 06, 2016 07:30 AM IST

Swati Arjun Swati Arjun
स्वतंत्र पत्रकार

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जीवन में कभी बिना शर्त ‘प्रेम’ नहीं मिला: जे. जयललिता

कुछ साल पहले बॉलीवुड एक्ट्रेस सिमी गरेवाल के टॉक शो ‘रॉन्दवू विथ सिमी गरेवाल’ से की गई एक आत्मिक बातचीत में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे.जयललिता ने अपने जीवन के कुछ ऐसे अनछुए पहलुओं पर बातचीत की थी जो शायद पहले कभी नहीं हुआ था.

इस एक घंटे की बातचीत में जयललिता ने बताया कि कैसे उनके भीतर भी एक आम इंसान की तरह दुख, गुस्सा, हताशा और खुशी की भावनाएं जन्म लेती हैं लेकिन एक लीडर होन के कारण उन्हें उन भावनाओं पर काबू करना होता है. उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने कभी भी सोच-समझ कर खुद को टफ दिखाने की कोशिश नहीं की, सब कुछ खुद ब खुद हो गया और वो उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गया.

जयललिता ने बताया कि वे निजी तौर पर बहुत ही शर्मीली और खुद में सीमित रहने वाली शख्स हैं, उन्हें दुनिया के सामने अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करना पसंद नहीं है, लेकिन किस्मत ने उन्हें दो-दो हाई-प्रोफाइल करियर में धकेल दिया जिस कारण वे पब्लिक लाइम-लाइट में आ गईं, जबकि वे निजी तौर पर पर्दे के पीछे रहना पसंद करती हैं. एक रुढ़िवादी तमिल अयंगर परिवार में जन्मीं जयललिता की परवरिश बहुत ही पारंपरिक तरीके से हुई थी, उनका पालन-पोषण उनके नाना-नानी के घर हुआ था क्योंकि उनकी माँ 20 साल की उम्र में ही विधवा हो गईं थी, तब जे.जयललिता दो साल की थीं. बाद के दिनों में जे जयललिता की मां को फिल्मों में काम करने का मौका मिला और वे फिल्मों में व्यस्त हो गईं.

अपने प्रशंसकों के बीच अम्मा के नाम से मशहूर जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को हुआ था.

अपने प्रशंसकों के बीच अम्मा के नाम से मशहूर जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को हुआ था.

क्रिकेटर नारी कॉन्ट्रैक्टर की दीवानी थी जयललिता

जयललिता ने इस बातचीत में बताया कि उनके जीवन के सबसे बड़े दुखों में से एक ये है कि उन्हें कभी भी अपनी मां के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिला, क्योंकि वो इतना ज्य़ादा व्यस्त रहा करतीं थी. जयललिता की स्कूलिंग एक कॉन्वेंट स्कूल में हुई थी और किसी भी आम लड़की की तरह वे भी सुनहरे सपने देखा करतीं थी. वे स्कूल के दिनों में क्रिकेटर नारी कॉन्ट्रैक्टर और बॉलीवुड अभिनेता शम्मी कपूर की दीवानी हुआ करतीं थी. नारी कॉन्ट्रैक्टर को देखने के लिए वे अक्सर टेस्ट मैच देखने जाया करतीं थी और शम्मी कपूर की फिल्म ‘जंगली’ उनकी ऑल टाइम फेवरिट फिल्म है.

उनके पसंदीदा गानों में, ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ और ‘आजा सनम, मधुर चांदनी में हम-तुम मिले तो विराने में भी आ जाएगी बहार है’. जयललिता ने बताया कि कैसे उनकी मां के एक एक्ट्रेस होने के कारण स्कूल में उनका मजाक उड़ाया जाया करता था और वे कुछ कर नहीं पाती थीं. लेकिन इसका जवाब वे अपनी पढ़ाई से देती थीं. वे अपने स्कूल की टॉपर थीं और इसे ही अपने जीवन का सबसे गर्वीला क्षण मानती हैं. 16 साल की उम्र में जब उन्हें कॉलेज की पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिला तब उन्हें परिवार की आर्थिक स्थिती को संभालने के लिए फिल्मों में काम करना पढ़ा और घर की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ी.

फिल्मों में काम करना पसंद नहीं था

जे जयललिता के मुताबिक उन्हें फिल्मों में काम करना बिल्कुल पसंद नहीं था लेकिन वे जब कुछ करने का ठान लेती हैं तो उसमें हर हाल में सफल होती हैं और शिखर से नीचे रहना पसंद नहीं करतीं. और यही बात उनके राजनीतिक करियर पर भी लागू होता है, उनके मुताबिक उन्हें राजनीति में रहना पसंद नहीं लेकिन वे मानती हैं कि वे एक सफल राजनेता हैं.

जयललिता के जीवन का सबसे कमजोर क्षण वो था जब उनकी मां की मौत हुई और उस वक्त वे इतनी अकेली हो गईं थी कि आत्महत्या करना चाहती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को इससे उबारा. इसी समय एमजी रामाचंद्रन उनके जीवन में आए उनकी मां की जगह ले ली. जे जयललिता के मुताबिक वे उनके लिए सबकुछ थे, ‘मां, पिता, दोस्त, गाइड और फिलॉसफर’. हालांकि वे ये भी मानती हैं कि उनकी मां के बाद एमजीआर ही वे शख्स थे जो पूरी तरह से उनके जीवन पर हावी रहे.

कभी बिना शर्त प्रेम नहीं मिला

जयललिता के मुताबिक, उन्हें अपने जीवन में कभी भी ‘बिना शर्त प्रेम’ नहीं मिला. उनके मुताबिक फिल्मों और राजनीति दोनों ही जगह ‘मेल शॉविनिज़्म’ हावी है, लेकिन फिल्मों जहां महिलाओं के बगैर काम नहीं चल सकता वहीं राजनीति में कोई उन्हें आसानी से हाशिये पर नहीं डाल सकता.

जयललिता के अनुसार, उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी लड़ाई एमजीआर की मौत के बाद जीती है. एमजीआर के बाद पार्टी में अपनी जगह बनाना उनके लिए बहुत ही ज़्यादा मुश्किल था. वे मानती हैं कि अगर वे एक्ट्रेस और नेता होने के बजाय शिक्षक या डॉक्टर होतीं तो उनके बारे में ऐसी मनगढ़ंत और अपमानजनक बातें नहीं की जातीं. हालांकि वे मानती हैं कि उनकी सबसे बड़ी विरोधी मर्द से ज्यादा औरतें रहीं हैं.

एक आम भारतीय लड़की की तरह जयललिता भी शादी करके घर बसाना चाहती थीं, लेकिन उनके अनुसार उन्हें कभी ऐसा व्यक्ति ही नहीं मिला और अब वो ये मानती हैं कि जरूरी नहीं कि सबको सब-कुछ मिल जाए. अपने आसपास की असफल शादियों को देखने के बाद भी उन्हें लगता है कि उनका शादी न करना जीवन का एक बेहतर निर्णय रहा. जयललिता के मुताबिक उन्हें अपनी आज़ाद ज़िंदगी बहुत पसंद है और वो इससे प्यार करती हैं. अब वो अपनी असल जिंदगी जी रहीं हैं.

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